US Iran talks: ईरान और अमेरिका के बीच इस्लामाबाद में हुई शांति वार्ता फेल होने के बाद होर्मुज में दोनों पक्षों के बीच कई बार स्टैंडऑफ हो चुका है। ईरान की प्रेस टीवी ने बताया कि एक बार रविवार को अमेरिका के 2 डिस्ट्रॉयर युद्धपोत होर्मुज में ईरान के हाथों पूरी तरह नष्ट होते-होते बच गए। क्योंकि ईरान की लास्ट फायरिंग वार्निंग देने के बाद वह पीछे मुड़कर भाग गए।
ईरान ने कहा है कि वह युद्ध से नहीं डरता है, बशर्ते शांतिपूर्ण समाधान और कूटनीति में उसका भरोसा है। ईरानी दूतावास ने एक पोस्ट में कहा- ईरान कूटनीति और विवादों के शांतिपूर्ण समाधान में विश्वास रखता है। हालांकि ईरान युद्ध से नहीं डरता और पूरी तरह से तैयार है, फिर भी वह कभी आत्मसमर्पण नहीं करेगा। ईरान शांति के लिए प्रतिबद्ध है और संघर्ष का सूत्रधार नहीं है। इसके अलावा, ईरान अपने वार्ताकारों पर भरोसा करता है।
ईरान ने देश के दक्षिणी तटरेखा पर नौसैनिकों की तैनाती कर दी है।
ईरानी संसद के प्रमुख मोहम्मद गालिबाफ ने कहा कि “वार्ता शुरू होने से पहले मैंने जोर देकर कहा था कि हममें आवश्यक सद्भावना और इच्छाशक्ति तो है, लेकिन पिछले दो युद्धों के अनुभवों के कारण हम विपक्षी पक्ष पर कोई भरोसा नहीं कर सकते।”“मेरे सहयोगियों ने ईरानी प्रतिनिधिमंडल ‘मीनाब 168’ की ओर से भविष्योन्मुखी और सकारात्मक पहलें रखीं, लेकिन इस दौर की वार्ताओं में विपक्षी पक्ष ईरानी प्रतिनिधिमंडल का विश्वास जीतने में पूरी तरह असफल रहा।”
वहीं ईरान के सुरक्षा प्रमुख इब्राहिम अज़ीज़ी ने आरटी को दिए विशेष बयान में कहा, 'अमेरिकियों को इस समझौते की हमसे कहीं ज़्यादा ज़रूरत है। अगर वे हमारी शर्तें नहीं मानते, तो हम अपना रास्ता खुद चुनेंगे-कुछ भी नहीं बदलेगा।'
खाड़ी देशों में चल रही जंग को खत्म करने के लिए पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के नेताओं के बीच तीन दौर की वार्ता बेनतीजा रही है। अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में इसकी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि हम बिना किसी समझौते के वापस लौट रहे हैं। वेंस ने कहा कि हमने अपनी ओर से सबसे अच्छा प्रस्ताव ईरान के सामने रखा लेकिन ईरान ने उसे मानने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि 21 घंटे की बातचीत बेनतीजा रही।
सऊदी अरब का बड़ा कदम
ईरान-अमेरिका के बीच शांति वार्ता फेल होने के बाद सऊदी अरब ने बड़ा कदम उठाया है। सऊदी अरब ने होर्मुज जलडमरूमध्य को दरकिनार करते हुए पूर्व-पश्चिम तेल पाइपलाइन को पूरी तरह से बहाल कर दिया है और प्रतिदिन 7,000,000 बैरल तेल का उत्पादन कर रहा है।
बता दें कि दोनों देशों के नेताओं के बीच में तीन दौर की बातचीत हुई। दोनों देशों के नेता 21 घंटे से ज्यादा वक्त तक आमने-सामने बैठकर बात करते रहे। दोनों देशों के नेता अपनी-अपनी मांगों पर अड़े रहे। इस बीच होर्मुज में अमेरिका और ईरान की नौसैना के बीच स्टैंडऑफ की खबरें सामने आ रही हैं।
पाकिस्तान की भारी बेइज्जती
ईरान-अमेरिका के बीच शांति वार्ता फेल होने पर पाकिस्तान की भारी बेइज्जती हो रही है। पाकिस्तान अब बुरा फंस गया है। क्योंकि पाकिस्तान इसे अपने लिए बड़े अवसर के रूप में देख रहा था।
ईरान अपनी फ्रीज संपत्ति को रिलीज करने की मांग कर रहा है साथ ही उसका कहना है कि वह स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों से टोल वसूलता रहेगा। वहीं अमेरिका ईरान की इन शर्तों पर नरम रुख अपनाने को तैयार नहीं दिख रहा है। सबसे बड़ा पेंच परमाणु हथियारों को लेकर फंसा। अमेरिका चाहता है कि ईरान परमाणु हथियार नहीं बनाए जबकि ईरान इसे मानने को तैयार नहीं है। सूत्रों के मुताबिक सुबह के 3 बजे तक दोनों पक्षों के बीच बातचीत होती रही। इसके बाद भी होर्मुज समेत कुछ ऐसे प्वाइंट हैं जहां मतभेदों को दूर करना मुश्किल हो रहा है।