कोलकाता: अफगानिस्तान की राजधानी काबुल में अपह्रत भारतीय महिला सहायताकर्मी जूडिथ डिसूजा के परिवार वालों ने शुक्रवार को यहां उम्मीद जताई है कि जूडिथ की जल्द रिहाई के लिए भारत और अफगानिस्तान उचित कदम उठाएंगे। जूडिथ की बहन एग्नेस डिसूजा ने यहां मीडिया से कहा, "यह एक दूसरे देश में हुआ है। वहां की सरकार को इसके लिए कदम उठाने चाहिए। जूडिथ को वह स्थान पसंद है और उसने बताया कि वहां काम करने के लिए बहुत कुछ है। लेकिन अगर ऐसी घटनाएं होती हैं तो वहां कोई क्यूं जाना चाहेगा। मैं प्रत्येक एजेंसी से आग्राह करती हूं कि वह अपने तरफ से प्रयास करे। भारत सरकार को अपनी तरफ से जोर लगाना चाहिए और मेरी बहन को वापस लाना चाहिए।"
इस हमले में तालिबान की भूमिका को लेकर पूछे गए सवाल पर एग्नेस ने कहा, "मुझे जानकारी नहीं है।"
जूडिथ के परिवार को यह सूचना गुरुवार देर रात काबुल में भारतीय दूतावास से प्राप्त हुई।
उन्होंने कहा, "हम आगे के कदम उठाने के लिए अधिक जानकारी का इंतजार कर रहे हैं। मैंने काबुल में दूतावास से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन वह शुक्रवार को बंद रहता है। दिल्ली में लोग हमारी तरफ से अधिकारियों से संपर्क करने की कोशिश कर रहे हैं।"
एग्नेस ने कहा कि उनकी बहन जूडिथ ने उन्हें कभी किसी खतरे के बारे में नहीं बताया था।
"वह पहले भी विदेशों में रही है, लेकिन इस तरह की घटना पहली बार घटी है।"
40 वर्षीय जूडिथ जेंडर विशेषज्ञ हैं, और वह महिला और बाल विकास के मुद्दे पर काबुल में एक गैर-सरकारी संस्था (एनजीओ) के साथ काम कर रही हैं।
जूडिथ के पिता ने कहा, "उसने कहा कि वह सुरक्षित है। हमारी काफी लंबी बात हुई थी।"
अफगानिस्तान की राजधानी काबुल में गुरुवार देर रात अज्ञात बंदूकधारियों ने एक महिला भारतीय सहायताकर्मी का अपहरण कर लिया। इस अपहरण की किसी आतंकवादी समूह ने जिम्मेदारी नहीं ली है।
अपहरण की यह घटना भारतीय दूतावास द्वारा अफगानिस्तान में रहने वाले और यात्रा करने वाले अपने नागरिकों के लिए पिछले माह चेतावनी जारी करने के बाद हुई है।