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VIDEO: ये है चंदा मामा के 47 साल पुराने बोल, जिसे सुनकर अंतरिक्ष यात्री रह गए थे दंग

 Written By: India TV News Desk
 Published : Feb 24, 2016 04:29 pm IST,  Updated : Feb 24, 2016 04:30 pm IST

यह बातचीत उस वक्त अंतरिक्ष यात्री यूगीन करनैन और जॉन यंग के बीच हुई थी। इस ध्वनि को चार दशकों तक संभालकर रखा गया, इसके बाद साल 2008 में इसके लिखित दस्तावेज को जगजाहिर किया गया। इस बातचीत की ध्वनि (टेप) को हाल ही में जारी किया गया है।

apolo mission 10
- India TV Hindi
apolo mission 10

बीजिंग: बचपन में आपने चंदा मामा का ये गाना तो जरुर सुना होगा। चंदा मामा दूर के, पुए पकाएं गूर के, आप खाएं  थाली में...। जिसके सुन कर हम चांद को मामा कहने लगे। लेकिन आप यह जान चौक जाएगे कि अब आप भी चंदा मामा के गाने को कहीकत में सुन सकते है। नासा मे एक गाना जारी किया है जो मून म्यूजिक नाम से है। यह आवाज एक रहस्यमयी आवाज है। इस रहस्मयी आवाज को 1969 में सना गया था।

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20 जुलाई, 1969 में अमेरिकी अंतरिक्ष एंजेसी के मानवयुक्त विमान अपोलो 11 ने पहली बार चांद की धरती पर कदम रखा था। यह एक ऐतिहासिक लैंडिंग थी। लेकिन इससे ठीक दो महीने पहले अपोलो 10 ने जब चंद्रमा की कक्षा में प्रवेश किया तो उस वक्त विमान पर मौजूद अंतरिक्ष यात्रियों को अपने हेडफोन से कुछ अजीब और विलक्षण संगीत की तरह शोर सुनाई दिया था। इस पर अंतरिक्ष यात्रियों ने आपस में पूछा। "क्या तुमने सीटी जैसी ध्वनि सुनी?"

"लगता है जैसे यह बाहरी अंतरिक्ष में एक प्रकार का संगीत है।"

"मैं हैरान हूं कि यह क्या है।"

यह बातचीत उस वक्त अंतरिक्ष यात्री यूगीन करनैन और जॉन यंग के बीच हुई थी। इस ध्वनि को चार दशकों तक संभालकर रखा गया, इसके बाद साल 2008 में इसके लिखित दस्तावेज को जगजाहिर किया गया। इस बातचीत की ध्वनि (टेप) को हाल ही में जारी किया गया है।

सीएनएन की रिपोर्ट के मुताबिक, यह ध्वनि इतनी विचित्र थी कि इन शोधार्थियों को समझ में नहीं आ रहा था कि इसकी जानकारी नासा को देनी चाहिए या नहीं, क्योंकि इससे संभावित भविष्य की अंतरिक्ष यात्राओं पर प्रश्नचिन्ह लग सकता था। हालांकि नासा के हालिया बयान में करनैन ने खुद ही इस दावे पर शक जाहिर किया।

उन्होंने कहा, "मुझे याद नहीं है कि उस घटना ने मुझे इतना उत्साहित किया था कि मैं उस गंभीरता से लूं। यह शायद केवल रेडियो हस्तक्षेप था। अगर हम इसे कुछ और समझते तो यात्रा के बाद हम इसके बारे में सबको बताते। हमने कभी नहीं सोचा कि यह कुछ अलग है।"

 (Science Channel नाम से यह वीडियों यू-ट्यूब में शेयर किया गया)

 

 

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