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'13 साल की लड़की के साथ निकाह पूरी तरह जायज', कोर्ट के फैसले से दहशत में पाकिस्तानी ईसाई

 Edited By: Vineet Kumar Singh
 Published : Apr 15, 2026 04:23 pm IST,  Updated : Apr 15, 2026 04:23 pm IST

पाकिस्तान के कराची में 13 साल की ईसाई लड़की के अपहरण और निकाह को अदालत जायज ठहराने के फैसले से समुदाय में दहशत और गुस्से का माहौल है। प्रदर्शनकारियों ने जबरन धर्म परिवर्तन और बाल विवाह के खिलाफ आवाज उठाई, जबकि नेताओं ने लड़कियों की सुरक्षा के लिए सख्त कानून और न्यायिक समीक्षा की मांग की है।

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पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों पर अत्याचार की खबरें आती रहती हैं। Image Source : AP

कराची: पाकिस्तान के कराची शहर में अदालत के एक विवादित फैसले के बाद ईसाई समुदाय में भारी दहशत और नाराजगी देखने को मिल रही है। यह मामला मारिया शाहबाज नाम की एक 13 साल की लड़की से जुड़ा है, जिसमें फेडरल कॉन्स्टीट्यूशनल कोर्ट (FCC) ने उसके कथित अपहरणकर्ता के साथ हुए निकाह को सही ठहराया है। इस फैसले के विरोध में सैकड़ों लोग सेंट पैट्रिक कैथेड्रल में इकट्ठा हुए और प्रदर्शन किया। यह प्रदर्शन कराची के कैथोलिक आर्चडायोसिस और कैथोलिक कमीशन फॉर जस्टिस एंड पीस के सहयोग से आयोजित किया गया।

'अल्पसंख्यक समुदायों में दहशत का माहौल'

प्रदर्शनकारियों ने 'जबरन धर्म परिवर्तन बंद करो', 'ईसाई लड़कियों को न्याय दो' और 'बाल विवाह अपराध है' जैसे संदेशों वाले पोस्टर लहराए। प्रदर्शन के दौरान समुदाय के लोगों ने कहा कि यह फैसला न्याय के खिलाफ है और इससे अल्पसंख्यक समुदायों में दहशत का माहौल बन गया है। उन्होंने जबरन धर्म परिवर्तन और कम उम्र में शादी जैसी घटनाओं पर चिंता जताई, जो अल्पसंख्यक परिवारों को खासतौर पर प्रभावित करती हैं। कराची के आर्चबिशप बेनी मारियो ट्रावस ने इस फैसले पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि प्रदर्शन में बड़ी संख्या में लोगों का शामिल होना समुदाय के दर्द और गुस्से को दिखाता है।

'अल्पसंख्यक परिवार शोषण का शिकार होते हैं'

आर्चबिशप ने कहा कि समाज का कर्तव्य है कि कमजोर और असहाय लोगों की रक्षा की जाए। उन्होंने यह भी बताया कि आर्थिक तंगी के कारण कई बार अल्पसंख्यक परिवार शोषण का शिकार हो जाते हैं। ट्रावस ने जोर देकर कहा कि शिक्षा और सामुदायिक सहयोग ही ऐसे हालात से निपटने के सबसे मजबूत साधन हैं, खासकर तब जब कानूनी सुरक्षा कमजोर पड़ जाए। उन्होंने कानूनी विशेषज्ञों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं से अपील की कि इस फैसले को मिसाल बनने से रोका जाए और इसकी समीक्षा कराई जाए।

लड़कियों की सुरक्षा के लिए कानून बनाने की मांग

कैथोलिक कमीशन फॉर जस्टिस एंड पीस के समन्वयक काशिफ एंथनी ने प्रदर्शन में शामिल सभी धार्मिक नेताओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं और नागरिकों का धन्यवाद किया। उन्होंने कहा कि जबरन धर्म परिवर्तन और बाल विवाह केवल एक समुदाय की समस्या नहीं है, बल्कि सभी अल्पसंख्यकों की है। इस दौरान कई प्रमुख हस्तियों ने भी अदालत के फैसले की आलोचना की। सामाजिक कार्यकर्ता सफीना जावेद, वकील यूनुस एस. खान, समाजसेवी जाहिद फारूक और विधायक रूमा मुश्ताक मट्टो ने इस फैसले को गलत बताया और कम उम्र की लड़कियों की सुरक्षा के लिए सख्त कानून बनाने की मांग की।

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