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भारत के इस पड़ोसी देश में दमघोंटू हुई हवा, एक सप्ताह के लिए बंद किए गए स्कूल

 Edited By: Amar Deep
 Published : Nov 04, 2024 02:07 pm IST,  Updated : Nov 04, 2024 02:07 pm IST

भारत के पड़ोसी देश पाकिस्तान में भी वायु प्रदूषण से लोगों का हाल बेहाल है। यहां लाहौर में वायू प्रदूषण की वजह से प्राथमिक स्कूलों को एक सप्ताह के लिए बंद कर दिया गया है।

लाहौर में एक सप्ताह के लिए बंद किए गए स्कूल।- India TV Hindi
लाहौर में एक सप्ताह के लिए बंद किए गए स्कूल। Image Source : AP

लाहौर: भारत के कई शहरों में प्रदूषण से लोगों का हाल बेहाल है। यहां लोगों को सांस लेने संबंधी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। हालांकि ये समस्या भारत के शहरों तक ही सीमित नहीं है। भारत के पड़ोसी देश पाकिस्तान में भी प्रदूषण से लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा रहा है। यहां पाकिस्तान की सांस्कृतिक राजधानी कहे जाने वाले लाहौर में वायु प्रदूषण सारे रिकॉर्ड तोड़ रहा है। एयर क्वालिटी खराब होने की वदह से लाहौर में एक सप्ताह के लिए स्कूलों को भी बंद करना पड़ा है। इसके अलावा ज्यादा धुआं देने वाले वाहनों पर जुर्माना भी लगाया जा रहा है।

बंद किए गए स्कूल

दरअसल, पाकिस्तान के लाहौर शहर में वायु गुणवत्ता की की स्थिति बेहद खतरनाक हो गई है। इस वजह से अधिकारियों ने सोमवार को सभी प्राथमिक स्कूलों को एक सप्ताह के लिए बंद कर दिया। मिली जानकारी के अनुसार 1.4 करोड़ की आबादी वाले शहर में बच्चों को सांस लेने में होने वाली समस्याओं और अन्य बीमारियों से बचाने के ऐसा किया गया है। बता दें कि भारत की सीमा से लगने वाले पूर्वी पंजाब प्रांत की राजधानी लाहौर में पिछले महीने से ही हवा की गुणवत्ता खराब होने लगी थी। वहीं विषैले धुएं से बच्चों तथा बुजुर्गों समेत हजारों लोग बीमार होने लगे थे। 

निर्माण कार्यों पर लगी रोक

वहीं वायु प्रदूषण को देखते हुए सरकार ने कुछ इलाकों में निर्माण कार्य पर भी रोक लगा दी है। इसके अलावा ज्यादा धुआं छोड़ने वाले वाहनों के मालिकों पर जुर्माना लगाया जा रहा है। सरकार की ओर से जारी विज्ञप्ति के अनुसार, प्रदूषण के कारण स्कूल एक सप्ताह तक बंद रहेंगे। पंजाब पर्यावरण संरक्षण विभाग ने बताया कि हवा में प्रदूषक तत्व पीएम 2.5 की सांद्रता 450 के करीब पहुंच गई है, जिसे खतरनाक माना जाता है। बता दें कि लाहौर को कभी बागों के शहर के रूप में जाना जाता था, जो 16वीं से 19वीं शताब्दी तक लगभग हर जगह देखने को मिलते थे। हालांकि बाद में तेजी से बढ़ते शहरीकरण और बढ़ती जनसंख्या वृद्धि की वजह से हरियाली के लिए बहुत कम जगह रह गई है। (इनपुट- एजेंसी)

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