Iran US Conflict: अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव के मध्य सीजफायर को आगे बढ़ाने की कोशिशें तेज हो गई हैं। मध्यस्थ देशों के प्रयासों से दोनों पक्ष इस अस्थायी समझौते को बढ़ाने और बातचीत फिर से शुरू करने के करीब पहुंचते दिख रहे हैं। बता दें कि यह युद्धविराम 22 अप्रैल को समाप्त होने वाला है। सूत्रों के मुताबिक, अमेरिका और ईरान ने 'सैद्धांतिक रूप में' युद्धविराम बढ़ाने पर सहमति जताई है ताकि कूटनीतिक बातचीत के लिए और समय मिल सके। हालांकि, दोनों देशों के बीच तनाव अभी भी बना हुआ है। हालांकि व्हाइट हाउस ने कहा है कि उसने सीजफायर बढ़ाने के लिए कोई औपचारिक अनुरोध नहीं किया है।
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'ईरान पूरे क्षेत्र में व्यापार रोक सकता है'
ईरान के वरिष्ठ सैन्य अधिकारी अली अब्दोल्लाही ने चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों पर लगाई गई नौसैनिक नाकेबंदी नहीं हटाई, तो ईरान पूरे क्षेत्र में व्यापार रोक सकता है। उन्होंने कहा कि ईरान अपनी संप्रभुता और हितों की रक्षा के लिए पूरी ताकत से कदम उठाएगा। अब्दोल्लाही ने अमेरिका द्वारा की गई नाकेबंदी को युद्धविराम का उल्लंघन बताया। मध्यस्थों के मुताबिक, बातचीत में तीन बड़े मुद्दे अब भी अटके हुए हैं जिनमें ईरान का परमाणु कार्यक्रम, होर्मुज जलडमरूमध्य और युद्ध के दौरान हुए नुकसान का मुआवजा शामिल है। इन मुद्दों पर सहमति बनने के बाद ही स्थायी समाधान संभव होगा।
'दोनों पक्ष समझौता करना चाहते हैं'
इस बीच, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने उम्मीद जताई है कि आने वाले दिनों में बातचीत फिर से शुरू हो सकती है। ट्रंप ने एक इंटरव्यू में कहा कि 'दोनों पक्ष समझौता करना चाहते हैं और मामला खत्म होने के करीब है।' ट्रंप ने यह भी दावा किया कि चीन ने ईरान को हथियार न देने पर सहमति जताई है। उन्होंने कहा कि चीन 'होर्मुज जलडमरूमध्य को स्थायी रूप से खोलने' के उनके फैसले से खुश है। हालांकि, अमेरिका का कहना है कि चीन पहले से ईरान के मिसाइल कार्यक्रम को तकनीकी मदद देता रहा है।
नाकेबंदी से व्यापार और अर्थव्यवस्था प्रभावित
बता दें कि अमेरिका की नाकेबंदी लागू होने के बाद कई जहाजों को वापस लौटना पड़ा है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड के अनुसार, पहले 24 घंटों में कोई भी जहाज नाकेबंदी पार नहीं कर सका, जबकि 6 व्यापारिक जहाजों को वापस ईरानी जलक्षेत्र में लौटना पड़ा। यह नाकेबंदी ईरान पर दबाव बनाने के लिए की गई है, क्योंकि युद्ध शुरू होने के बाद से वह एशिया को बड़ी मात्रा में तेल निर्यात कर रहा था। इस दौरान कई जहाज गुप्त रूप से प्रतिबंधों से बचते हुए तेल ले जा रहे थे, जिससे ईरान की अर्थव्यवस्था को सहारा मिल रहा था।
होर्मुज के बंद होने का असर पूरी दुनिया पर
ईरान ने भी समुद्री आवाजाही को सीमित कर दिया है, जिससे होर्मुज जलडमरूमध्य, जहां से दुनिया का लगभग पांचवां हिस्सा तेल गुजरता है, लगभग बंद हो गया है। इसका असर वैश्विक बाजार पर पड़ा है और तेल की कीमतें तेजी से बढ़ी हैं, जिससे पेट्रोल, खाद्य पदार्थ और अन्य जरूरी चीजें महंगी हो गई हैं। हालांकि बुधवार को युद्ध खत्म होने की उम्मीद में तेल की कीमतों में गिरावट आई और अमेरिकी शेयर बाजार में तेजी देखी गई। बता दें कि करीब 7 हफ्तों से जारी इस युद्ध में अब तक ईरान में 3,000, लेबनान में 2,100 से ज्यादा, इजरायल में 23 और खाड़ी देशों में दर्जनों लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं 13 अमेरिकी सैनिक भी मारे गए हैं।