
रिपोर्ट में अनुमान जाहिर किया गया है कि विश्व की मौजूदा आबादी 7.349 अरब है, जो अगले 15 सालों में एक अरब बढ़कर 8.5 अरब हो जाएगी और इसके 2050 तक 9.725 अरब होने का अनुमान है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत की इस विशाल आबादी से प्रारंभ में देश को जनसांख्यिकी लाभांश और युवाओं की उत्पादकता से लाभ मिल सकता है। लेकिन इससे चीन के 9,597,000 वर्ग किलोमीटर की तुलना में भारत के 3,288,000 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैले संसाधनों पर व्यापक दबाव बनेगा।
भारत को इस आबादी के लिए अधिक से अधिक रोजगारों सृजन के लिए अपनी अर्थव्यवस्था बढ़ानी होगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2022 तक 10 करोड़ रोजगार सृजन का लक्ष्य रखा है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत की आबादी लगातार बढ़ती रहेगी। घटती प्रजनन दर, जनसांख्यिकी लाभांश के कम होने की वजह से भारतीयों की मध्य उम्र बढ़ेगी। वर्तमान में शिशु जन्म दर 2.48 है और यह 2020 तक लुढ़क तक 2.34 हो जाएगी। वहीं, 2030 तक 2.14 और 2050 तक घट कर 1.89 होने का अनुमान है।