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बर्बाद होने वाला है ‘आतंकियों का पनाहगाह’ पाकिस्तान! FATF ने दे डाली चेतावनी

Edited by: IndiaTV Hindi Desk Published : Jun 22, 2019 07:31 am IST, Updated : Jun 22, 2019 07:31 am IST

अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद के वित्तपोषण की निगरानी करने वाली संस्था ‘फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स’(FATF) ने शुक्रवार को कहा कि पाकिस्तान आतंकवाद को वित्तपोषण पर अपनी कार्ययोजना को पूरा करने में विफल रहा है।

Pak failed to complete its action plan on terror financing: FATF- India TV Hindi
Pak failed to complete its action plan on terror financing: FATF

वाशिंगटन: अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद के वित्तपोषण की निगरानी करने वाली संस्था ‘फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स’(FATF) ने शुक्रवार को कहा कि पाकिस्तान आतंकवाद को वित्तपोषण पर अपनी कार्ययोजना को पूरा करने में विफल रहा है। एफएटीएफ ने पाकिस्तान को अक्टूबर तक अपनी प्रतिबद्धता को पूरा करने या कार्रवाई का सामना करने की चेतावनी दी है, जिसके तहत उसे काली सूची में डाला जा सकता है।

फ्लोरिडा के ओरलैंडो में अपनी पूर्ण बैठक के समापन पर जारी एक बयान में, FATF ने चिंता व्यक्त की कि ‘‘न केवल पाकिस्तान जनवरी की समय सीमा के साथ अपनी कार्ययोजना को पूरा करने में विफल रहा, बल्कि वह मई 2019 तक भी अपनी कार्य योजना को पूरा करने में भी विफल रहा है।’’ FATF ने ‘‘कड़ाई’’ से पाकिस्तान से अक्टूबर 2019 तक अपनी कार्ययोजना को पूरा करने का अनुरोध किया।

पाकिस्तान लगातार यह कहता है कि उसने लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए- मोहम्मद, जमात-उद-दावा और फलह-ए-इंसानियत फाउंडेशन (एफआईएफ) की 700 से अधिक सम्पत्तियां जब्त करके काफी कदम उठाया है, जैसा उसने 2012 में उसे ‘ग्रे’ सूची में डालने के परिणामस्वरूप भी किया था। हालांकि, एफएटीएफ के सदस्य आतंकवादी सरगनाओं मुख्य तौर पर सईद एवं मसूद और संयुक्त राष्ट्र द्वारा घोषित अन्य आतंकवादियों के खिलाफ कोई मामले दर्ज नहीं किये जाने को लेकर चिंतित हैं। 

एफएटीएफ के पूर्ण सत्र और अन्य संबंधित चर्चाओं में भारत का रुख पाकिस्तान को लेकर हमेशा एक जैसा रहा है। भारत ने फरवरी 2018 में चार देशों अमेरिका, ब्रिटेन, जर्मनी और फ्रांस के कदम का दृढ़तापूर्वक समर्थन किया था। जून 2018 में पाकिस्तान को ‘ग्रे’ सूची में डाल दिया गया था और एफएटीएफ ने उसे 27 बिंदु कार्य योजना दी थी। इस योजना की अक्तूबर 2018 में हुए पिछले पूर्ण सत्र में और दूसरी बार फरवरी में समीक्षा की गई थी। पाकिस्तान को फिर से तब ‘ग्रे’ सूची में डाल दिया गया था जब भारत ने पाकिस्तान स्थित आतंकवादी समूहों के बारे में नयी सूचना मुहैया करायी थी।

वहीं, अगर एफएटीएफ आगे भी पाकिस्तान को ‘ग्रे’ सूची में बनाये रखता है तो इसका मतलब है कि देश की आईएमएफ, विश्व बैंक, एडीबी, यूरोपीय संघ द्वारा साख कम की जाएगी। इससे पाकिस्तान की वित्तीय समस्याएं और बढ़ेंगी। वित्तीय निगरानीकर्ता को धोखा देने के लिए पाकिस्तान प्राधिकारियों ने लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद, जमात-उद-दावा और एफआईएफ सदस्यों की गिरफ्तारियां दिखायी हैं। यद्यपि इन सभी सदस्यों को आतंकवाद निरोधक कानून, 1997 के तहत नहीं बल्कि लोक व्यवस्था रखरखाव अधिनियम के तहत पकड़ा गया है।

(इनपुट- भाषा)

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