वॉशिंगटन: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर दबाव बढ़ाने के लिए टैरिफ बम फोड़ा है। ट्रंप ने कहा है कि ईरान के ट्रेड पार्टनर्स को अमेरिका से 25 प्रतिशत टैरिफ का सामना करना पड़ेगा। ट्रंप ने ऐसा कदम इस वजह से उठाया है जिससे तेहरान पर उसके हिंसक विरोध प्रदर्शनों पर कार्रवाई को लेकर दबाव बनाया जा सके। ईरान में जारी विरोध प्रदर्शनों में 600 से अधिक लोग मारे गए हैं।
डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पोस्ट में टैरिफ की घोषणा करते हुए कहा कि ये तुरंत प्रभावी होंगे। चीन, ब्राजील, तुर्किए और रूस उन देशों में शामिल हैं जो तेहरान के साथ व्यापार करते हैं।
अमेरिकी राष्ट्रपति ने तेहरान को बार-बार मिलिट्री एक्शन की धमकी दी है। ट्रंप ने कहा है कि अगर उनके प्रशासन को पता चलता है कि इस्लामिक रिपब्लिक सरकार प्रदर्शनकारियों के खिलाफ जानलेवा बल का इस्तेमाल कर रही है तो अमेरिका सैन्य कार्रवाई से पीछे नहीं हटेगा। ट्रंप का कहना है कि ये एक रेड लाइन है जिसे ईरान पार करना शुरू कर रहा है और इससे वो और उनकी नेशनल सिक्योरिटी टीम संभावित विकल्पों पर विचार कर रहे हैं।
ट्रंप के एक्शन के बीच तेहरान में विदेशी राजनयिकों से बात करते हुए ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि देश में स्थिति पूरी तरह से नियंत्रण में आ गई है। उन्होंने ईरान में हिंसक विरोध प्रदर्शनों के लिए इजरायल और अमेरिका को दोषी ठहराया है। ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बगाई ने कहा कि अमेरिका के साथ एक चैनल खुला हुआ है, लेकिन बातचीत आपसी हितों और चिंताओं की स्वीकृति पर आधारित होनी चाहिए, ना कि एकतरफा, एकपक्षीय और हुक्म के आधार पर।
इस बीच ईरान में सरकार समर्थक प्रदर्शनकारी भी सड़कों पर उतरे हैं। यह ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के शासन को सीधे चुनौती देने वाले कई दिनों के विरोध प्रदर्शनों के बाद शक्ति प्रदर्शन था। ईरानी सरकारी टेलीविजन ने भीड़ के नारों को प्रसारित किया, जिसमें हजारों लोग शामिल थे, जो "अमेरिका मुर्दाबाद!" और "इजरायल मुर्दाबाद!" के नारे लगा रहे थे। ईरान के अटॉर्नी जनरल ने चेतावनी दी है कि विरोध प्रदर्शनों में हिस्सा लेने वाले किसी भी व्यक्ति को "खुदा का दुश्मन" माना जाएगा। यह मौत की सजा वाला आरोप है।
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