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'अपने हितों के लिए दूसरे देशों का इस्तेमाल बंद करे अमेरिका', ग्रीनलैंड पर ट्रंप के रुख से भड़का ड्रैगन

 Edited By: Niraj Kumar
 Published : Jan 12, 2026 08:09 pm IST,  Updated : Jan 12, 2026 08:13 pm IST

ग्रीनलैंड पर नियंत्रण को लेकर अब बात बुहत आगे बढ़ चुकी है। चीन ने अमेरिकी रुख का विरोध करते हुए कड़ा बयान दिया है। उसने कहा है कि अपने हितों के लिए दूसरे देशों का इस्तेमाल अमेरिका बंद करे।

XI Jinping And Donald Trump- India TV Hindi
शी जिनपिंग और डोनाल्ड ट्रंप Image Source : AP

ग्रीनलैंड पर अमेरिका का नियंत्रण कैसे स्थापित हो, अब इस जुगत में डोनाल्ड ट्रंप जोर-शोर से लगे हुए हैं। वेनेजुएला के सैन्य ऑपरेशन में राष्ट्रपति को निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी को बंधक बनाने के बाद उनका मनोबल काफी बढ़ हुआ है। ग्रीनलैंड पर नियंत्रण को लेकर वे कई बयान दे चुके हैं जिसका सार यही है कि अगर आपसी बातचीत से ग्रीनलैंड पर अमेरिका का वर्चस्व हो जाए तो ठीक है नहीं तो वे किसी सैन्य कार्रवाई से भी पीछे नहीं हटेंगे। वहीं अमेरिका के इस रुख से चीन भड़क गया है। चीन की ओर से साफ तौर पर ट्रंप को ये नसीहत दी गई है कि अमेरिका अपने हितों के लिए दूसरे देशों का इस्तेमाल बंद करे। इसके साथ ही चीन ने यह भी कहा कि आर्कटिक में उसकी गतिविधियां इंटरनेशनल कानून के मुताबिक हैं।

ट्रंप के बयान पर चीन ने क्या कहा?

सोमवार को बीजिंग में जब अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप इस के बयान के बारे में पूछा गया कि चीन और रूस को ग्रीनलैंड पर कब्ज़ा करने से रोकने के लिए वाशिंगटन का ग्रीनलैंड पर कब्ज़ा करना ज़रूरी है, तो चीनी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग ने कहा- “आर्कटिक में चीन की गतिविधियों का मकसद इस इलाके में शांति, स्थिरता और सस्टेनेबल डेवलपमेंट को बढ़ावा देना है और ये इंटरनेशनल कानून के मुताबिक हैं।” हालांकि उन्होंने उन गतिविधियों के बारे में ज़्यादा जानकारी नहीं दी।

सभी देशों के अधिकारों का सम्मान होना चाहिए

माओ ने ग्रीनलैंड का सीधे तौर पर ज़िक्र किए बिना कहा, “आर्कटिक में कानून के मुताबिक गतिविधियां करने के सभी देशों के अधिकारों और आज़ादी का पूरा सम्मान किया जाना चाहिए। अमेरिका को दूसरे देशों का बहाना बनाकर अपने फायदे नहीं उठाने चाहिए।”

इंटरनेशनल कम्युनिटी के पूरे फायदे से जुड़ा है आर्कटिक

उन्होंने कहा कि “आर्कटिक इंटरनेशनल कम्युनिटी के पूरे फायदे से जुड़ा है।” बता दें कि चीन ने 2018 में इस इलाके में ज़्यादा असर डालने की कोशिश में खुद को आर्कटिक के पास का देश घोषित किया था। बीजिंग ने अपने ग्लोबल बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव के हिस्से के तौर पर पोलर सिल्क रोड बनाने के प्लान की भी घोषणा की है, जिसने दुनिया भर के देशों के साथ इकोनॉमिक लिंक बनाए हैं।

क्या जबरन कब्जा करेंगे ट्रंप, जानिए क्या कहा था?

बता दें कि न्यूयॉर्क टाइम्स को दिए एक इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा था कि वह केवल लंबे समय से चले आ रहे उस समझौते पर निर्भर रहने के बजाय पूरे ग्रीनलैंड का स्वामित्व चाहते हैं, जो अमेरिका को ग्रीनलैंड में सैन्य ठिकानों के इस्तेमाल की व्यापक अनुमति देता है। ट्रंप ने कहा, “मालिकाना हक आपको वह चीज देता है, जो किसी पट्टे या संधि से नहीं मिल सकती। सिर्फ दस्तावेज पर हस्ताक्षर करने से जो नहीं मिलता, वह स्वामित्व से मिलता है।” दरअसल, अमेरिका 1951 की एक संधि का पक्षकार है, जिसके तहत उसे डेनमार्क और ग्रीनलैंड की सहमति से वहां सैन्य अड्डे स्थापित करने के व्यापक अधिकार प्राप्त हैं। 

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