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Explainer: ‘पैक्स सिलिका’ में शामिल होगा भारत ! जानिए अमेरिका की इस पहल का क्या है रणनीतिक महत्व?

 Published : Jan 12, 2026 05:02 pm IST,  Updated : Jan 12, 2026 05:05 pm IST

अमेरिका ने वैश्विक कूटनीति और तकनीकी के क्षेत्र में भारत के बढ़ते वर्चस्व को मानते हुए आखिरकार पैक्स सिलिका में भारत को शामिल करने पर राजी हो गया है। भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने इसका ऐलान किया है।

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नरेंद्र मोदी और डोनाल्ड ट्रंप Image Source : AP/FILE PHOTO

Pax Silica: टैरिफ विवाद को लेकर भारत और अमेरिका के संबंधों में आई गिरावट के बाद अब भारत में अमेरिका राजदूत सर्जियो गोर के एक बयान से दोनों देशों के संबंधों में सकारात्मक पहल की उम्मीद जगी है। भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने ऐलान किया है कि भारत को पैक्स सिलिका में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया जाएगा। यह अमेरिका की अगुवाई वाली एक रणनीतिक पहल है जिसका मकसद सिलिकॉन, एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तक फैली ज़रूरी सप्लाई चेन को सुरक्षित करना है। इससे पहले टैरिफ के मुद्दे पर विवाद के बाद सिलिकॉन सप्लाई चेन वाले मुल्कों की इस लिस्ट से अमेरिका ने भारत को बाहर रखा था। इस लेख में हम यह जानने की कोशिश करेंगे कि पैक्स सिलिका क्या है और अमेरिका की इस पहल का रणनीतिक उद्देश्य क्या है?

दरअसल, अमेरिका ने वैश्विक कूटनीति और तकनीकी के क्षेत्र में भारत के बढ़ते वर्चस्व को मान लिया है। यह वजह है कि भारत में अमेरिका राजदूत सर्जियो गोर कहा कि वाशिंगटन के लिए कोई भी देश भारत जितना महत्वपूर्ण नहीं है और दोनों पक्ष व्यापार समझौते को मजबूत करने में सक्रिय रूप से बातचीत कर रहे हैं।उन्होंने कहा कि सच्चे दोस्त असहमत हो सकते हैं लेकिन अंत में हमेशा अपने मतभेद सुलझा लेते हैं। गोर ने यह भी घोषणा की कि भारत ‘पैक्स सिलिका’ गठबंधन का सदस्य होगा। उन्होंने कहा, ‘‘मुझे यह घोषणा करते हुए खुशी हो रही है कि भारत को अगले महीने राष्ट्रों के इस समूह में पूर्ण सदस्य के रूप में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया जाएगा।’’

'पैक्स सिलिका' क्या है?

पैक्स सिलिका अमेरिका की अगुवाई में कुछ खास देशों का एक समूह है जिसका लक्ष्य उच्च-स्तरीय माइक्रोचिप्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और महत्वपूर्ण खनिजों (Critical Minerals) के लिए एक अभेद्य और विश्वसनीय सप्लाई चेन बनाना है। क्योंकि फिलहाल इस क्षेत्र में चीन का नियंत्रण है। भविष्य की तकनीक और सेमीकंडक्टर बाजार से चीन के एकाधिकार को चुनौती देने के लिए इसे तैयार किया गया है। इस क्षेत्र में चीन की निर्भरता को पूरी तरह समाप्त करने की दिशा में इसे एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

अमेरिकी विदेश मंत्रालय के अनुसार, ‘पैक्स सिलिका’ का उद्देश्य दबावयुक्त निर्भरता को कम करना, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के लिए मूलभूत सामग्री और क्षमताओं की रक्षा करना तथा यह सुनिश्चित करना है कि सहयोगी राष्ट्र बड़े पैमाने पर परिवर्तनकारी टेक्नोलॉजी का विकास कर सकें और उसे लागू कर सकें। 

कौन-कौन से देश शामिल?

इस समूह में केवल वे ही देश शामिल हैं जो लोकतांत्रिक मूल्यों को साझा करते हैं और एडवांस्ड टेक्नोलॉजी मैन्यूफैक्चरिंग में सक्षम हैं। इसमें अमेरिका, जापान, दक्षिण कोरिया, सिंगापुर, नीदरलैंड, ब्रिटेन, इज़राइल, संयुक्त अरब अमीरात और ऑस्ट्रेलिया शामिल हैं। वहीं अमेरिका ने पहले भारत को इससे अलग रखा था लेकिन तकनीकी के क्षेत्र में भारत वर्चस्व के आगे उसे झुकना पड़ा है। 

भारत के लिए इसका रणनीतिक महत्व

भारत के लिए इसका काफी रणनीतिक महत्व है। क्योंकि इसमें शामिल होने से भारत को ग्लोबल चिप हब के तौर पर उभरने का मौका मिलेगा। पैक्स सिलिका का हिस्सा बनते ही भारत को अमेरिका, जापान और दक्षिण कोरिया की दिग्गज कंपनियों से सेमीकंडक्टर 'फैब्स' और डेटा सेंटर स्थापित करने के लिए भारी निवेश और तकनीकी हस्तांतरण (Tech Transfer) मिलेगा।

वहीं रक्षा और अंतरिक्ष के क्षेत्र में भी भारत को मजबूती मिलेगी। क्योंकि सुरक्षित चिप्स और AI के बिना आधुनिक मिसाइल और अंतरिक्ष तकनीक अधूरी है। यह गठबंधन भारत की सैन्य सुरक्षा को भी नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा।

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