बांग्लादेश के प्रसिद्ध हिंदू गायक और राजनीतिक कार्यकर्ता प्रोलॉय चाकी की मौत ने देश में राजनीतिक दबाव, मानवाधिकार और अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर एक नई बहस छेड़ दी है। अवामी लीग से जुड़े चाकी की रविवार रात पुलिस कस्टडी में मौत हो गई, जिससे उनके परिवार और समर्थकों में गहरी चिंता और आक्रोश है। सरकारी अधिकारियों का कहना है कि चाकी की मौत प्राकृतिक कारणों से हुई, लेकिन परिवार ने हिरासत के दौरान लापरवाही और समय पर मेडिकल ट्रीटमेंट न मिलने का गंभीर आरोप लगाया है। यह घटना ऐसे समय में सामने आई है, जब बांग्लादेश राजनीतिक अस्थिरता के दौर से गुजर रहा है। पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को सत्ता से हटाए जाने के बाद देश में राजनीतिक हिंसा और अल्पसंख्यकों पर हमलों की घटनाएं तेजी से बढ़ी हैं।
कौन थे प्रोलॉय चाकी?
प्रोलॉय चाकी सिर्फ एक राजनीतिक नेता नहीं, बल्कि बांग्लादेश के एक चर्चित संगीतकार और सांस्कृतिक कार्यकर्ता भी थे। वे उत्तरी बांग्लादेश में अवामी लीग के एक प्रभावशाली आयोजक माने जाते थे और दशकों से संगीत व सांस्कृतिक कार्यक्रमों के जरिए धर्मनिरपेक्ष और प्रगतिशील विचारधारा को बढ़ावा देते रहे। वे अवामी लीग की पबना जिला इकाई में सांस्कृतिक मामलों के सचिव थे और 1990 के दशक से सांस्कृतिक आंदोलनों में सक्रिय भूमिका निभा रहे थे। उनके गीत और प्रस्तुतियां खासतौर पर अल्पसंख्यक और प्रगतिशील समुदायों के बीच बेहद लोकप्रिय थीं।
क्यों हुई गिरफ्तारी?
दिसंबर में पुलिस ने प्रोलॉय चाकी को 2024 के विरोध प्रदर्शनों के दौरान हुए एक धमाके से जुड़े मामले में गिरफ्तार किया था। इन्हीं विरोध प्रदर्शनों के बाद शेख हसीना को सत्ता छोड़नी पड़ी थी। परिवार का दावा है कि गिरफ्तारी के वक्त केस में चाकी का नाम तक शामिल नहीं था, इसके बावजूद उन्हें हिरासत में लिया गया। यह गिरफ्तारी ऐसे समय में हुई, जब अंतरिम सरकार के दौरान अवामी लीग से जुड़े नेताओं और कार्यकर्ताओं पर बड़े पैमाने पर कार्रवाई की जा रही थी।
मौत पर प्रशासन का पक्ष
जेल प्रशासन का कहना है कि चाकी पहले से ही गंभीर बीमारियों से जूझ रहे थे। पबना जेल के सुपरिटेंडेंट मोहम्मद उमर फारुक के अनुसार, चाकी को डायबिटीज और दिल की बीमारी थी। उनके मुताबिक, उन्हें कार्डियक अरेस्ट आया, जिसके बाद पहले पबना जनरल हॉस्पिटल और फिर राजशाही मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल ले जाया गया, जहां रविवार रात करीब 9 बजे उनकी मौत हो गई। 60 वर्षीय चाकी की मौत इलाज के दौरान जेल कस्टडी में हुई।
परिवार के आरोप
चाकी के परिवार ने प्रशासन के दावों को सिरे से खारिज कर दिया है। उनके बेटे सोनी चाकी का आरोप है कि जेल में रहते हुए उनके पिता की तबीयत बिगड़ती रही, लेकिन अधिकारियों ने न तो समय पर इलाज कराया और न ही परिवार को सूचना दी। उनका कहना है कि अस्पताल में भर्ती कराने के लिए भी परिवार को खुद हस्तक्षेप करना पड़ा, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी।
बढ़ती हिंसा के बीच गंभीर सवाल
प्रोलॉय चाकी की मौत ऐसे वक्त में हुई है, जब बांग्लादेश में धार्मिक और जातीय अल्पसंख्यकों, राजनीतिक विरोधियों, सांस्कृतिक संगठनों और मीडिया संस्थानों पर हमले बढ़े हैं। कई सांस्कृतिक संस्थानों, शेख मुजीबुर रहमान से जुड़े स्मारकों और राजनयिक मिशनों को भी निशाना बनाया गया है। इस पृष्ठभूमि में चाकी की कस्टोडियल डेथ अब सिर्फ एक व्यक्ति की मौत नहीं, बल्कि राजनीतिक दमन, अल्पसंख्यकों के अधिकार और अभिव्यक्ति की आजादी पर मंडराते खतरे का प्रतीक बन गई है। उनके निधन ने कानून के शासन और हिरासत में बंद लोगों के साथ व्यवहार को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
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