Sundar Mundariye Lori Song Lyrics: आज भी लोहड़ी के शुभ अवसर पर 'सुन्दर मुंदरिए' गीत जरूर गुनगुनाया जाता है। दरअसल यह लोकगीत लोहड़ी की पहचान बन चुका है। लोहड़ी की आग के चारों ओर खड़े होकर जब बच्चे-बड़े सब साथ में इस गीत को गुनगुनाते हैं, तभी लोहड़ी का असली रंग देखने को मिलता है। दरअसल ये गीत पंजाब के नायक दुल्ला भट्टी की उस कहानी से जुड़ा है जब उन्होंने सुंदरी-मुंदरी नाम की दो गरीब लड़कियों को मुगल अधिकारियों के अत्याचारों का शिकार होने से बचाया था। इसी कहानी को गीत के जरिए आज भी लोहड़ी पर जरूर सुना जाता है।
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लोहड़ी सुन्दर मुंदरिए गीत लिरिक्स (Lohri Sunder Mundriye Song Lyrics)
- सुन्दर मुंदरिए
- तेरा कौन विचारा
- दुल्ला भट्टीवाला
- दुल्ले दी धी व्याही
- सेर शक्कर पायी
- कुड़ी दा लाल पताका
- कुड़ी दा सालू पाटा
- सालू कौन समेटे
- मामे चूरी कुट्टी
- जिमींदारां लुट्टी
- जमींदार सुधाए
- गिन गिन पोले लाए
- इक पोला घट गया
- ज़मींदार वोहटी ले के नस गया
- इक पोला होर आया
- ज़मींदार वोहटी ले के दौड़ आया
- सिपाही फेर के ले गया
- सिपाही नूं मारी इट्ट
- भावें रो ते भावें पिट्ट
- साहनूं दे लोहड़ी
- तेरी जीवे जोड़ी
- साहनूं दे दाणे तेरे जीण न्याणे
‘सुन्दर मुंदरिए’ गीत का महत्व
‘सुन्दर मुंदरिए’ गीत में दुल्ला भट्टी का जिक्र मिलता है जो पंजाब के लोकनायक माने जाते हैं। कहते हैं उन्होंने मुगलों के अत्याचारों के खिलाफ आवाज उठाई और सुंदर-मुंदरी जैसी गरीब व असहाय लड़कियों की रक्षा कर उनकी शादी कराई। यह गीत उनके साहस, वीरता और समर्पण की याद दिलाता है और साथ ही ये संदेश देता है कि जरूरतमंद की रक्षा करना सबसे बड़ा धर्म है।
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)
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