Surya Rashi Parivartan 2026 Rashifal: सूर्य के मकर राशि में प्रवेश को मकर संक्रांति के नाम से भी जाना जाता है। मकर संक्रांति को खिचड़ी भी कहा जाता है। सूर्य के मकर राशि में प्रवेश करते ही खरमास या धनुर्मास भी समाप्त हो जाता है। लिहाजा शादी-ब्याह आदि शुभ कार्यों पर जो रोक लगी थी, वो सूर्य के मकर राशि में प्रवेश करते ही हट जायेगी और फिर से शादियों का सीज़न शुरू हो जायेगा। कहीं-कहीं पर मकर संक्रान्ति को उत्तरायणी भी कहते हैं। उत्तरायण काल में दिन बड़े हो जाते हैं और रातें छोटी होने लगती हैं। चलिए अब जानते हैं कि मकर संक्रांति के दिन कौन–सी राशि के किस घर में सूर्य देव गोचर करेंगे और उनके शुभ फलों को सुनिश्चित करने के लिये और अशुभ फलों से बचने के लिये संक्रांति पर कौन–से उपाय करने चाहिए यहां हम इसकी चर्चा करेंगे।
सूर्यदेव आपके दसवें स्थान पर गोचर कर रहे है। जन्म कुंडली में यह स्थान आपके करियर और पिता की उन्नति से संबंध रखता है। सूर्य के इस गोचर से करियर में आपको अपनी मेहनत का फल जरूर मिलेगा। आप काफी आगे बढ़ेंगे। साथ ही इस दौरान आपके पिता की भी तरक्की सुनिश्चित होगी। लिहाजा इस दौरान सूर्य के शुभ फल बनाये रखने के लिये - सिर ढक्कर रखें। साथ ही काले और नीले रंग के कपड़े पहनना अवॉयड करें।
सूर्यदेव आपके नवे स्थान पर गोचर कर रहे है। जन्म कुंडली में नवा स्थान भाग्य का स्थान है। इस स्थान पर सूर्य के गोचर से आपके भाग्य में वृद्धि होगी। आप अपने काम में जितनी मेहनत करेंगे, उसका शुभ फल आपको अवश्य ही मिलेगा। साथ ही धार्मिक कार्यों में भी आपकी रुचि बढ़ेगी। लिहाजा अगले संक्रांति तक सूर्य के शुभ फलों को सुनिश्चित करने के लिये - घर में पीतल के बर्तनों का इस्तेमाल करें। साथ ही प्रतिदिन सूर्यदेव को नमस्कार करें।
सूर्यदेव आपके आठवें स्थान पर गोचर कर रहे है। जन्म कुंडली में यह स्थान आयु से संबंध रखता है। इस स्थान पर सूर्य के गोचर से आपकी आयु में वृद्धि होगी और आपका स्वास्थ्य भी अच्छा रहेगा। लिहाजा इस दौरान सूर्य के शुभ फल सुनिश्ति करने के लिये-काली गाय या बड़े भाई की सेवा करें।
सूर्यदेव आपके सातवें स्थान पर गोचर कर रहे है। जन्म कुंडली में यह स्थान जीवनसाथी का होता है। इस स्थान पर सूर्य के गोचर से जीवनसाथी के साथ आपका तालमेल ठीक बना रहेगा और आपका वैवाहिक जीवन खुशहाल रहेगा। लिहाजा अगली संक्रांति तक सूर्यदेव के इस गोचर का शुभ फल बनाये रखने के लिये - स्वयं भोजन करने से पहले किसी दूसरे व्यक्ति को भोजन जरूर खिलाएं।
सूर्यदेव आपके छठे स्थान पर गोचर कर रहे है। जन्म कुंडली में यह स्थान मित्र का होता है। इस स्थान पर सूर्य के गोचर से मित्रों के साथ अच्छे रिश्ते स्थापित करने के लिये आपको अधिक मेहनत करनी पड़ सकती है। आपको इस दौरान अपने शत्रु पक्ष से बचकर रहने की जरूरत है। साथ ही अगले 30 दिनों के दौरान सूर्य के अशुभ फलों से बचने के लिये और शुभ फल सुनिश्चित करने के लिये - मन्दिर में बाजरा दान करें।
सूर्यदेव आपके पांचवें स्थान पर गोचर कर रहे है। जन्म कुंडली में यह स्थान विद्या, गुरु, विवेक, संतान और जीवन में रोमांस से संबंध रखता है। सूर्य के इस गोचर से आपको इस दौरान अपने गुरु से बनाकर रखनी चाहिए। आपकी कही बात उन्हें बुरी लग सकती है, इसलिए बात संभलकर करें और अपना विवेक बनाये रखें। साथ ही इस दौरान आप रोमांस के मामले में कुछ पिछड़ सकते हैं। लिहाजा इस दौरान सूर्य के अशुभ फलों से छुटकारा - जरूरतमंद लोगों को ऊनि वस्त्र दान करें।
सूर्यदेव आपके चौथे स्थान पर गोचर कर रहे है। जन्म कुंडली में यह स्थान माता, भूमि-भवन और वाहन के सुख से संबंध रखता है। सूर्य के इस गोचर से 13 फरवरी तक आपको अपने कार्यों में माता से पूरा सहयोग मिलेगा। वो आपके हर कदम में आपका साथ देंगी। साथ ही इस दौरान आपको भूमि-भवन और वाहन का सुख मिलने की भी पूरी उम्मीद है। लिहाजा इस 13 फरवरी तक सूर्य के शुभ फल सुनिश्चित करने के लिये - किसी जरूरतमंद को भोजन कराएं।
सूर्यदेव आपके तीसरे स्थान पर गोचर कर रहे है। जन्म कुंडली में यह स्थान भाई-बहन और आपकी अभिव्यक्ति से संबंध रखता है। सूर्य के इस गोचर से आपको भाई-बहनों से उम्मीद के अनुसार सहयोग मिलेगा। साथ ही आप अपनी बात को दूसरे के सामने अच्छे से एक्सप्रेस नहीं कर पायेंगे। लिहाजा सूर्य के अशुभ फलों से बचने के लिये और शुभ फल सुनिश्चित करने के लिये प्रतिदिन सूर्यदेव के इस मंत्र का 11 बार जप करें। मंत्र है - ऊँ घृणिः सूर्याय नमः।
सूर्यदेव आपके दूसरे स्थान पर गोचर कर रहे है। जन्म कुंडली में यह स्थान धन से संबंध रखता है। सूर्य के इस गोचर से आपको धन की बढ़ोतरी के बहुत से साधन मिलेंगे। आपको अचानक से धन लाभ हो सकता है। इससे आपकी आर्थिक स्थिति अच्छी बनी रहेगी। लिहाजा सूर्य के शुभ फल सुनिश्चित करने के लिये - मन्दिर में नारियल का तेल या कच्चे नारियल का दान करें।
सूर्यदेव आपके पहले यानि लग्न स्थान पर गोचर कर रहे है। जन्म कुंडली में यह स्थान व्यक्ति का अपना स्थान होता है। इससे किसी व्यक्ति के प्रेम, मान-सम्मान, धन और संतान के न्यायलय संबंधी कार्यों पर विचार किया जाता है। इस स्थान पर सूर्य के गोचर से लवमेट के साथ आपके रिश्ते मजबूत होंगे। आपके पास पैसों की लगातार आवक बनी रहेगी। साथ ही आपकी संतान को भी न्यायलय संबंधी कार्यों से भरपूर लाभ मिलेगा। लिहाजा 13 फरवरी तक सूर्य के इन शुभ फलों का लाभ पाने के लिये - प्रतिदिन सुबह स्नान आदि के बाद सूर्यदेव को जल चढ़ाएं।
सूर्यदेव आपके बारहवें स्थान पर गोचर कर रहे है। जन्म कुंडली में यह स्थान शैय्या सुख और व्यय से संबंध रखता है। सूर्य के इस गोचर से आपको शैय्या सुख की प्राप्ति तो होगी, लेकिन साथ ही आपके खर्चों में भी बढ़ोतरी होगी। लिहाजा आगली संक्रांति तक सूर्य के अशुभ प्रभावों से बचने के लिये और शुभ प्रभाव सुनिश्चित करने के लिये - धार्मिक कार्यों में अपना सहयोग दें।
सूर्यदेव आपके ग्यारहवें स्थान पर गोचर कर रहे है। जन्म कुंडली में यह स्थान आमदनी और कामना पूर्ति से संबंध रखता है। सूर्य के इस गोचर से आपकी अच्छी आमदनी होगी। आपको आमदनी के नये स्रोत भी मिलेंगे। साथ ही आपकी जो भी इच्छा होगी, वो जरूर पूरी होगी। लिहाजा इस दौरान सूर्य के शुभ फल सुनिश्चित करने के लिये - मन्दिर में मूली का दान करें।
(आचार्य इंदु प्रकाश देश के जाने-माने ज्योतिषी हैं, जिन्हें वास्तु, सामुद्रिक शास्त्र और ज्योतिष शास्त्र का लंबा अनुभव है। इंडिया टीवी पर आप इन्हें हर सुबह 7.30 बजे भविष्यवाणी में देखते हैं।)
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