न्यूयॉर्क : अमेरिका के प्रमुख यहूदी समर्थक संगठन अमेरिकन ज्यूइश कमेटी (AJC) ने रूस से तेल खरीद को लेकर भारत की आलोचना कर रहे अमेरिकी अधिकारियों पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। संगठन ने स्पष्ट कहा कि रूस-यूक्रेन संकट के लिए भारत को जिम्मेदार ठहराना अनुचित है और यह अमेरिका-भारत रणनीतिक संबंधों को नुकसान पहुंचा सकता है। यहूदियों के समर्थक समूह ने कहा कि इस संकट के लिए भारत जिम्मेदार नहीं है। उन्होंने भारत पर अनुचित दबाव डालने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के फैसले की आलोचना भी की।
मित्र देश से ऐसे व्यवहार गलत
AJC ने शुक्रवार को एक बयान में कहा कि वह भारत पर अमेरिकी अधिकारियों द्वारा की गई बयानबाज़ी से "हैरान और चिंतित" है। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि भारत एक लोकतांत्रिक मित्र देश है और अमेरिका का एक महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदार भी। ऐसे में उसके साथ इस तरह का व्यवहार अनुचित है। यहूदियों ने ट्रंप के सलाहकार पीटर नवारो की टिप्पणी को भी "अपमानजनक" करार दिया।
नवारो ने क्या कहा था?
पीटर नवारो ने रूस-यूक्रेन युद्ध को “मोदी का युद्ध” कहा था। नवारो ने यह भी कहा था कि “शांति का मार्ग आंशिक रूप से नई दिल्ली से होकर जाता है।” AJC ने इसे “एक अपमानजनक और भ्रामक आरोप” बताया। साथ ही कहा कि भारत को इस युद्ध के लिए जिम्मेदार ठहराना गलत है। AJC ने स्वीकार किया कि भारत की ऊर्जा आवश्यकताएं उसे रूसी तेल की ओर झुका सकती हैं, लेकिन यह भी जोड़ा कि इसका मतलब यह नहीं कि भारत रूस के युद्ध अपराधों में सहभागी है।
वैश्विक संतुलन में भारत की अहम भूमिका
यहूदियों ने कहा, "हमें भारत की रूसी तेल पर निर्भरता को लेकर खेद है, लेकिन पुतिन के युद्ध के लिए भारत कतई जिम्मेदार नहीं है। भारत एक स्वतंत्र लोकतंत्र है, जो वैश्विक शक्ति संतुलन में अहम भूमिका निभा रहा है। AJC ने जोर देते हुए कहा कि अब समय है अमेरिका और भारत के बीच रिश्तों को फिर से सशक्त करने का प्रयास किए जाए। “यह दो लोकतांत्रिक देशों के बीच भरोसे और सहयोग को बढ़ाने का समय है, न कि बेबुनियाद आरोपों से रिश्तों में खटास लाने का।”(भाषा)