बिहार के कटिहार जिले से एक ऐसी खबर आई है जिसने न सिर्फ सामाजिक मर्यादाओं को तार-तार कर दिया है, बल्कि कानून व्यवस्था को भी खुली चुनौती दी है। कुर्सेला थाना क्षेत्र के गोबराही दियारा में ग्रामीणों ने 'तालिबानी' मानसिकता का परिचय देते हुए दो नाबालिग बच्चों की जबरन शादी करा दी। गांव वालों ने तालिबानी इंसाफ करते हुए नाबालिग लड़के का आधा सिर भी मुंडवा दिया। इस घटना के सामने आने के बाद हर कोई हैरान हो गया है।
नैतिकता के नाम पर क्रूरता
बताया जा रहा है कि कटिहार जिले के गांधीग्राम बिनटोली की 11 वर्षीय लड़की और 12 वर्षीय लड़के को ग्रामीणों ने कथित तौर पर एक साथ देख लिया। इसके बाद जो हुआ, उसने मानवता को शर्मिंदा कर दिया। भीड़ ने कानून को अपने हाथ में लेते हुए पहले जमकर हंगामा किया और फिर सजा के तौर पर नाबालिग लड़के का आधा सिर मुंडवा दिया गया। लड़की के पिता और ग्रामीणों के दबाव में दोनों मासूमों की जबरन शादी करा दी गई।
कानून की धज्जियां, बचपन पर प्रहार
जिस उम्र में इन बच्चों के हाथों में कलम और किताब होनी चाहिए थी, उस उम्र में समाज के स्वयंभू ठेकेदारों ने उनके गले में वैवाहिक बंधन की बेड़ियां डाल दीं। क्या 21वीं सदी के भारत में आज भी भीड़ का तंत्र कानून से ऊपर है? बाल विवाह निषेध अधिनियम के तहत यह न केवल अपराध है, बल्कि बच्चों के मौलिक अधिकारों का हनन भी है।
प्रशासनिक चुप्पी पर उठते सवाल
हैरानी की बात यह है कि इतनी बड़ी घटना होने के बावजूद अब तक प्रशासन की ओर से किसी ठोस कार्रवाई की खबर सामने नहीं आई है। स्थानीय लोग दबी जुबान में कह रहे हैं कि मामला सामाजिक दबाव में दबाने की कोशिश की जा रही है। यह घटना हमारे समाज के लिए एक 'वेक-अप कॉल' है। यदि इस मामले में त्वरित कार्रवाई नहीं हुई और दोषियों को जेल की सलाखों के पीछे नहीं भेजा गया, तो ऐसे 'कंगारू कोर्ट' (भीड़ का फैसला) कानून व्यवस्था को निगल जाएंगे। लोग अब प्रशासन से मांग कर रहे हैं कि इस कुप्रथा और क्रूरता के खिलाफ सख्त से सख्त एक्शन लिया जाए। (रिपोर्ट: निरंजन कुमार)
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