दिल्ली के पूर्व एसीपी विनोद कुमार पांडे ने 2013 में पासपोर्ट बनवाते समय एक गलती की थी। यह गलती 13 साल बाद उनके लिए मुश्किलें खड़ी कर रही है। तीस हजारी कोर्ट ने एसीपी के खिलाफ आरोप तय करने का आदेश दिया है। अक्टूबर तक आरोप तय होने के बाद मामले की अगली सुनवाई होगी। इसके बाद कोर्ट फैसला सुनाएगा। पूरा मामला साल 2000 से जुड़ा हुआ है।
पूर्व एसीपी विनोद कुमार पांडे के खिलाफ साल 2000 में मारपीट का मामला दर्ज किया गया था। इसी मामले में कोर्ट की तरफ से उन्हें साल 2005 में नोटिस भेजा गया था, जिसमें इंडियन पीनल कोड की धारा 323 (जानबूझकर चोट पहुंचाना), 427 (नुकसान पहुंचाना) और 448 (घर में बिना इजाजत घुसने की सजा) के तहत अपराधों के सिलसिले में समन भेजा था, और 2010 में उन्हें बेल दे दी गई थी।
2013 में किया पासपोर्ट के लिए आवेदन
साल 2013 में उन्होंने गाजियाबाद में तत्काल पासपोर्ट के लिए आवेदन किया। इस दौरान उन्होंने दावा किया कि उनके खिलाफ कोई भी मामला लंबित नहीं है, उन्हें कोई समन भी नहीं भेजा गया है। इस एफिडेविट के आधार पर उन्हें पासपोर्ट मिल गया, लेकिन 2022 में उनके खिलाफ एफिडेविट में गलत जानकारी देने का मामला दर्ज हुआ और अब इस मामले पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने आरोप तय करने को कहा है। दिल्ली के उपराज्यपाल ने भी उनके खिलाफ मुकदमा चलाने की अनुमति दे दी है।
24 अक्टूबर तक तय होंगे आरोप
न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रीति ने विनोद कुमार पांडे के खिलाफ मामले की सुनवाई करते हुए आरोपी की आपत्तियों को खारिज कर दिया और माना कि पासपोर्ट अधिनियम, 1967 की धारा 12 के तहत उसके खिलाफ प्रथम दृष्टया मामला बनता है। अभियोजन पक्ष के बयानों पर अदालत ने 25 अगस्त के एक आदेश में कहा, "किसी आपराधिक मुकदमे के लंबित होने की जानकारी छिपाना एक अहम जानकारी छिपाना है। रिकॉर्ड से पता चलता है कि आवेदन दाखिल करने की तारीख पर आरोपी के खिलाफ एक आपराधिक मुकदमा लंबित था और इसलिए, आरोपी के खिलाफ अहम जानकारी छिपाने के लिए पासपोर्ट अधिनियम की धारा 12 के तहत दंडनीय अपराध का प्रथम दृष्टया मामला बनता है।" अदालत ने आरोप तय करने के लिए 24 अक्टूबर की तारीख निर्धारित की है।
यह भी पढ़ें-
दिल्ली के नामी स्कूल में 3 साल की बच्ची से यौन शोषण, 4 बार हुई शिकार; ड्राइवर गिरफ्तार
दिल्ली में कांग्रेस नेता अलका लांबा के पिता के घर लाखों की चोरी, CCTV में दिखे चोर