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दिल्ली की तीनों निगमों को एक करने का विधेयक लोकसभा में पेश, विपक्ष ने जताया विरोध

 Edited By: IndiaTV Hindi Desk
 Published : Mar 25, 2022 03:19 pm IST,  Updated : Mar 25, 2022 03:19 pm IST

देश की राजधानी दिल्ली में होने वाले नगर निगम चुनाव से पहले लोकसभा मे निगम के एकीकरण को लेकर विधेयक पेश किया है। लोकसभा में क्रेंदीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने दिल्ली नगर निगम (संशोधन) विधेयक,2022 पेश किया है।

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INDIAN PARLIAMENT Image Source : PTI

Highlights

  • दिल्ली नगर निगम (संशोधन) विधेयक, 2022 हुआ पेश
  • केंद्र सरकार ने लोकसभा में पेश किया

नई दिल्ली:  दिल्ली के तीन नगर निगमों का एकीकरण करने संबंधी दिल्ली नगर निगम (संशोधन) विधेयक, 2020 को शुक्रवार को विपक्षी दलों के सदस्यों के विरोध के बीच लोकसभा में पेश किया। विपक्षी दलों ने इसका विरोध करते हुए कहा कि इस विधेयक को पेश करना इस सदन के विधायी दायरे में नहीं आता है। निचले सदन में केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने विधेयक पेश किया। इसका कांग्रेस, आरएसपी और बहुजन समाज पार्टी ने विरोध किया। इस पर गृह राज्य मंत्री राय ने कहा कि वह स्पष्ट करना चाहते हैं कि विधेयक को पेश करना कहीं से भी भारत के संविधान की मूल भावना का उल्लंघन नहीं है और ना ही यह संघीय ढांचे के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि अनुच्छेद 239 (क) (क) के तहत दिल्ली से जुड़े इस कानून में संशोधन करने में सदन सक्षम है। 

तीनों निगम का एकीकरण बेहद जरुरी

केंद्रीय गृहराज्य मंत्री नित्यानंद राय ने संदन में कहा कि दिल्ली में तीन नगर निगमों का मुख्य उद्देश्य जनता को प्रभावी नागरिक सेवाएं उपलब्ध कराना था लेकिन पिछले 10 वर्षों का अनुभव यह दर्शाता है कि ऐसा नहीं हुआ। इसलिये यह विधेयक लाया गया है। विधेयक में कहा गया है कि दिल्ली के तीन नगर निगमों की वित्तीय कठिनाइयां लगातर बढ़ रही थी, जिससे वे अपने कर्मचारियां को वेतन और सेवानिवृत्ति फायदे प्रदान करने में अक्षम हो गए। वेतन और सेवानिवृत्ति फायदे प्रदान करने में विलंब का परिणाम नगर निगम कर्मचारियों द्वारा निरंतर हड़ताल के रूप में सामने आया जिसने न केवल नागरिक सेवाओं को प्रभावित किया बल्कि इससे सफाई और स्वच्छता से संबंधित समस्याएं भी उत्पन्न हुईं।

विपक्ष ने किया विधेयक का विरोध

विधेयक पेश किये जाने का विरोध करते हुए आरएसपी के एन के प्रेमचंद्रन ने कहा कि यह विधेयक दिल्ली सरकार और दिल्ली विधानसभा के अधिकार क्षेत्र का हनन करता है। उन्होंने कहा कि सदस्यों को विधेयक के मसौदा का अध्ययन करने के लिए पर्याप्त समय नहीं मिला और इसका मसौदा जटिल है। कांग्रेस के गौरव गोगोई ने कहा कि यह विधेयक संघीय ढांचे पर प्रहार करता है। उन्होंने कहा कि इसे सदन में लाने से पहले केंद्र ने राजनीतिक दलों और अन्य हितधारकों से कोई विचार-विमर्श नहीं किया। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार अपनी विफलताओं को छिपाने के प्रयास में जल्दबाजी में यह विधेयक लाई है। बसपा के रीतेश पांडे ने कहा कि हम इस विधेयक को पेश किये जाने का विरोध करते हैं क्योंकि यह संविधान के प्रावधानों के खिलाफ है।

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