दिल्ली के जंतर मंतर पर प्रदर्शन के दौरान लगातार हिंसा हो रही है। दूसरी तरफ पुलिस भी अब साजिश के तार जोड़ने में जुट गई है। इसी जांच के दौरान बड़ा खुलासा हुआ है। पुलिस को पता चला है कि संसद मार्च के दौरान उपद्रवियों ने हिंसा से पहले और हिंसा के बाद तक की पूरी प्लानिंग तैयार कर रखी थी। प्रदर्शनकारियों में शामिल उपद्रवियों ने हिंसा के दौरान एक दूसरे से कम्युनिकेट करने के लिए स्पेशल एप्लीकेशन का इस्तेमाल किया। इस मैसेजिंग एप को ऐसे इस्तेमाल किया गया कि इसकी भनक तक जांच एजेंसियों और सुरक्षा बलों तक नहीं लगी।
कैसे काम करता है ये एप?
जानकारी के अनुसार, ये एप्लिकेशन ब्लू टूथ तकनीक से काम करता है। प्रदर्शनकारियों ने संसद मार्च के दौरान पुलिस पर हमले के दौरान एक दूसरे से संपर्क करने के लिए इसी ब्लू-टूथ एप्लीकेशन का इस्तेमाल किया। ये एप इंटरनेट के बिना भी काम करता है। पुलिस को आशंका है कि इसी मैसेजिंग एप के जरिये हिंसा के दौरान उपद्रवियों ने बातचीत की। पुलिस ऐसे ऐप और उनके सर्विस प्रोवाइडर से जानकारी मांगने की तैयारी कर रही है। आपको बता दें कि 20 मार्च को CJP ने संसद मार्च का ऐलान किआ था। इस मार्च में हजारों लोग शामिल हुए थे लेकिन इस दौरान हिंसा भी देखी गई। इस हिंसा में 100 से ज्यादा पुलिसकर्मी घायल हुए थे। इस हिंसा के बाद पुलिस ने अलग-अलग धाराओं में FIR दर्ज की थी।
बातचीत के लिए ब्लूएटूथ एप का इस्तेमाल
पुलिस की जांच का फोकस प्रदर्शन के दौरान उपद्रवियों के आपस मे बातचीत के तरीकों पर है। अभी तक की जांच में ये भी सामने आया की भीड़ को इक्कठा करने के लिए व्हाट्सएप ग्रुप बनाये गए लेकिन हिंसा के दौरान जब इंटरनेट बंद था तब आपस मे बातचीत के लिए ब्लूएटूथ एप का इस्तेमाल किया। पुलिस हिंसा से पहले और हिंसा के बाद दोनों परिस्थितियों की जांच कर रही है। इसके अलावा पुलिस के पास करीब डेढ़ सौ वायरल वीडियो भी मौजूद हैं। इन वीडियो के जरिये उन लोगों की पहचान की जा रही है तो हिंसा में शामिल थे। खास तौर पर वायरल वीडियो के जरिए पुलिस पत्थरबाजों और सुरक्षाबल कर्मियों से बदसलूकी करने वाले असामाजिक तत्वों की पहचान की कोशिश की जा रही है।
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