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दिल्ली SIR पर सुप्रीम कोर्ट का सवाल- "पहले से वोटर हैं तो Form-6 क्यों?" चुनाव आयोग से मांगा जवाब

 Reported By: Atul Bhatia,  Written By: Malaika Imam
 Published : Oct 28, 2026 04:34 pm IST,  Updated : Oct 28, 2026 04:50 pm IST

दिल्ली में SIR के तहत वोटर लिस्ट से करीब 43 लाख लोगों के नाम हटाए जाने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से सवाल पूछे हैं। कोर्ट ने पूछा कि जब कोई व्यक्ति पहले से वोटर है, तो उसे दोबारा Form-6 भरने की जरूरत क्यों है?

सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से जवाब मांगा- India TV Hindi
सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से जवाब मांगा Image Source : FILE (PTI)

दिल्ली में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से कई अहम सवाल पूछे हैं। शीर्ष कोर्ट ने सवाल किया कि 2026 की वोटर लिस्ट में पहले से शामिल मतदाताओं को फॉर्म 6 क्यों भरना पड़ रहा है, जबकि यह फॉर्म सिर्फ पहली बार मतदाता बनने वालों के लिए है। ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से लगभग 43 लाख लोगों के नाम अनुपस्थित या दूसरी जगह स्थानांतरित होने के कारण हटा दिए गए हैं।

इस पर चुनाव आयोग को कोर्ट को आश्वस्त किया है कि वह देर से जमा किए गए फॉर्म स्वीकार करने पर विचार करेगा और जरूरत पड़ने पर 30 अक्टूबर की समय सीमा भी बढ़ाई जा सकती है। सुप्रीम कोर्ट ने आयोग को दो सप्ताह में जवाब देने को कहा है।

फॉर्म 8 को लेकर कोर्ट ने क्या कहा?

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि फॉर्म 6 पहली बार वोटर बनने वालों के लिए है। 2026 की वोटर लिस्ट में पहले से शामिल लोगों ने यदि केवल अपना पता बदला है, तो उन्हें फॉर्म 8 भरने की अनुमति दी जानी चाहिए। उनसे यह घोषणा नहीं करवाई जानी चाहिए कि वे पहले कभी मतदाता के तौर पर रजिस्टर्ड  ही नहीं थे। काम के सिलसिले में एक-दो महीने के लिए बाहर रहने का मतलब यह नहीं निकाला जाना चाहिए कि वोटर ने स्थायी रूप से अपना निवास स्थान बदल लिया है।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कुछ लोग ऐसे भी हो सकते हैं जो कहीं गए ही नहीं, लेकिन उन्हें मतदाता गणना फॉर्म मिला ही नहीं। ऐसे लोगों के लिए भी समाधान होना चाहिए। कोर्ट ने सवाल किया कि अगर कोई व्यक्ति समय पर फॉर्म नहीं भर पाया, तो उसका वोट देने का अधिकार हमेशा के लिए खत्म हो जाएगा। कोर्ट ने कहा कि जब तक अंतिम वोटर लिस्ट तैयार नहीं होती, तब तक केवल देर से फॉर्म जमा करने के कारण उसे खारिज नहीं करना चाहिए।

"जब दिल्ली में तुरंत चुनाव नहीं है तो..."

शीर्ष अदालत ने कहा कि जब दिल्ली में तुरंत चुनाव नहीं होने वाला है, तो चुनाव आयोग को आखिरी तारीख पर इतना जोर नहीं देना चाहिए। समय सीमा बढ़ाई जा सकती है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि दिल्ली में बहुत से मजदूर, रेहड़ी-पटरी वाले और दिहाड़ी मजदूर काम के सिलसिले इधर-उधर जाते हैं। आयोग को खुद भी उनसे संपर्क करना चाहिए, न कि सारी जिम्मेदारी उन्हीं पर डाल देनी चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि लिस्ट से हटाए गए लोगों की सूची सार्वजनिक होनी चाहिए। इसमें सरल हिंदी और स्थानीय भाषाओं में बताया जाए कि नाम क्यों हटा और जवाब न देने पर क्या होगा। जस्टिस बागची ने कहा कि बिहार में दिए गए आदेशों से SIR से जुड़े सभी सवाल हल नहीं हो जाते। वोटर लिस्ट में तार्किक गड़बड़ियों की जांच की वैधता पर भी अभी अंतिम फैसला नहीं हुआ है।

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