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दिल्ली के त्यागराज स्टेडियम में कुत्ता टहलाने के मामले में IAS को झटका, सुप्रीम कोर्ट ने बहाली पर लगाई रोक

 Written By: Vinay Trivedi
 Published : Sep 11, 2026 03:37 pm IST,  Updated : Sep 11, 2026 03:37 pm IST

दिल्ली के त्यागराज स्टेडियम में कुत्ता टहलाने का मामला फिर चर्चा में है क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने IAS अधिकारी रिंकू दुग्गा की बहाली के आदेश पर रोक लगा दी है। जानें ये पूरा मामला क्या है।

IAS Rinku Dugga- India TV Hindi
IAS अधिकारी रिंकू दुग्गा की बहाली के आदेश पर रोक लग गई है। Image Source : PTI (प्रतीकात्मक फोटो)

सुप्रीम कोर्ट ने कथित रूप से कुत्ता टहलाने के लिए त्यागराज स्टेडियम खाली करवाने के कारण चर्चा में आईं IAS अफसर रिंकू दुग्गा को बहाल करने के दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी है। दरअसल, रिंकू दुग्गा को केंद्र सरकार ने अनिवार्य सेवानिवृत्ति दे दिया था। CJI सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच ने दिल्ली हाईकोर्ट की तरफ से अनिवार्य सेवानिवृत्ति को रद्द किए जाने के खिलाफ केंद्र सरकार की तरफ से की गई अपील पर रिंकू दुग्गा को नोटिस जारी किया था।

हाईकोर्ट ने बरकरार रखा था CAT का फैसला

बेंच ने 7 सितंबर को अपने ऑर्डर में कहा, 'इस बीच, प्रतिवादी की बहाली पर रोक जारी रहेगी।' सुप्रीम कोर्ट ने इसी के साथ केस की अगली सुनवाई के लिए 13 अक्टूबर की तारीख तय की। इस केस की सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार का पक्ष रखने के लिए एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी पेश हुईं। रिंकू दुग्गा ने केंद्र सरकार के निर्णय को केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (CAT) में चुनौती दी थी, जिसने उन्हें बहाल करने का ऑर्डर दिया। दिल्ली हाईकोर्ट ने भी 15 अप्रैल को CAT के निर्णय को बरकरार रखा।

स्टेडियम में कुत्ता टहलाने को लेकर चर्चा में आए थे IAS पति-पत्नी

गौरतलब है कि ये विवाद 2022 का है, जब रिंकू दुग्गा और उनके पति जो खुद भी एक आईएएस अधिकारी हैं, पर आरोप लगा है कि उन्होंने अपने कुत्ते को टहलाने के लिए दिल्ली के त्यागराज स्टेडियम को खाली करवाया था। इस घटना की फोटो और वीडियो वायरल होने के बाद काफी आक्रोश फैल गया था।

हाईकोर्ट ने अनिवार्य सेवानिवृत्ति करने को नहीं माना था सही

दिल्ली हाईकोर्ट ने रिंकू दुग्गा के पक्ष में निर्णय देते हुए कहा कि इस घटना की वजह से अनुशासनात्मक कार्यवाही में उन्हें मामूली सजा दी गई थी। हाईकोर्ट ने बिना अनुमति अनुपस्थित रहने के आरोप का भी संज्ञान लिया। उन्हें अनिवार्य तौर पर सेवानिवृत्त करने के ऑर्डर में इन दोनों घटनाओं का हवाला दिया गया था। अदालत ने ये भी पाया था कि समीक्षा समिति की तरफ से उन्हें अनिवार्य तौर पर सेवानिवृत्त करने की सिफारिश को सही नहीं ठहराया जा सकता, क्योंकि कमेटी ने उनके सेवा रिकॉर्ड से जुड़ी कई जरूरी बातों पर गौर नहीं किया।

दिल्ली हाईकोर्ट ने अपने फैसले में क्या कहा था?

हाईकोर्ट ने ये भी कहा कि इनमें उनकी सालाना प्रदर्शन मूल्यांकन रिपोर्ट यानी APAR में कोई भी नकारात्मक टिप्पणी न होना, पिछले साल में उनकी बेहतरीन ग्रेडिंग और यह फैक्ट शामिल था कि उन्हें प्रमोट करने पर विचार किया जा रहा था। दिल्ली हाईकोर्ट ने अपने निर्णय में ये भी कहा कि अनिवार्य सेवानिवृत्ति का मकसद उन अधिकारियों को सेवा से हटाना है जिन्हें अयोग्य या अनुपयोगी माना जाता है। यह सिद्धांत दुग्गा के मामले में लागू नहीं होता है।

(इनपुट- भाषा)

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