जबलपुर: मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मंगलवार को वीरांगना रानी दुर्गावती के बलिदान दिवस पर एक बड़ा ऐलान किया है। इस मौके पर आयोजित एक भव्य कार्यक्रम में उन्होंने घोषणा की कि रानी दुर्गावती के जीवन और बलिदान की कहानी को प्रदेश के स्कूलों और कॉलेजों के पाठ्यक्रम में शामिल किया जाएगा, ताकि नई पीढ़ी उनसे प्रेरणा ले सके। मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में रानी दुर्गावती के साहस, युद्ध कौशल और प्रशासनिक क्षमता की जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि रानी दुर्गावती की 500वीं जयंती को पूरे राज्य में धूमधाम से मनाया जाएगा।
'रानी दुर्गावती ने 52 युद्ध लड़े, 51 में विजय प्राप्त की'
सीएम मोहन यादव ने कहा, 'रानी दुर्गावती की वीरता और आत्म-बलिदान की गाथा शिखरों से ऊंची है। वे न केवल युद्ध कला में पारंगत थीं, बल्कि कुशल प्रशासक भी थीं। उन्होंने अपने जीवनकाल में 52 युद्ध लड़े और 51 में विजय प्राप्त की। मुगल सेनापति आसफ खां को तीन बार पराजित करने वाली यह वीरांगना गोंडवाना साम्राज्य की गौरव थीं, जिन्होंने 15 वर्षों तक 23,000 से अधिक गांवों का सफल संचालन किया।' उन्होंने बताया कि रानी दुर्गावती की 500वीं जयंती को राज्य स्तर पर धूमधाम से मनाया जाएगा। इसके लिए जबलपुर में विशेष कैबिनेट बैठक भी आयोजित की गई। साथ ही, उनके नाम पर 'रानी दुर्गावती श्रीअन्न प्रोत्साहन योजना' शुरू की गई है, जिसमें मिलेट्स की फसलों के समर्थन मूल्य में 1000 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी कर इसे 4000 रुपये किया गया है।
'रानी दुर्गावती के आदर्शों को नई पीढ़ी तक पहुंचाएं'
मुख्यमंत्री ने रानी दुर्गावती के जल संरक्षण के प्रयासों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा, 'रानी ताल, आधार ताल और संग्राम ताल जैसे जल स्रोत आज भी उनके पर्यावरणीय दृष्टिकोण का प्रमाण हैं।' सरकार ने इन तालाबों को संरक्षित करने और उनके नाम से जोड़ने का काम शुरू किया है। सीएम ने कहा, 'यह कार्यक्रम केवल एक श्रद्धांजलि नहीं, बल्कि हमारी परंपरा, संस्कृति और नारी सम्मान का उत्सव है।' उन्होंने लोगों से अपील की कि रानी दुर्गावती के बलिदान को जीवन की प्रेरणा बनाएं और उनके आदर्शों को नई पीढ़ी तक पहुंचाएं।
कौन थीं रानी दुर्गावती?
रानी दुर्गावती (1524-1564) गोंडवाना साम्राज्य की वीरांगना शासक थीं। उनका जन्म चंदेल राजवंश में हुआ था। वे न केवल एक कुशल योद्धा थीं, बल्कि एक दूरदर्शी प्रशासक भी थीं। उन्होंने 15 साल तक गोंडवाना का शासन संभाला और 23,000 से अधिक गांवों का कुशलतापूर्वक प्रबंधन किया। रानी दुर्गावती ने 52 युद्ध लड़े, जिनमें से 51 में उन्हें विजय मिली। मुगल सेनापति आसफ खां को तीन बार हराने वाली रानी ने अपनी वीरता से इतिहास में अमर स्थान बनाया। 24 जून 1564 को मुगलों से युद्ध में वीरगति प्राप्त करने से पहले उन्होंने अपने साहस और बलिदान से भारतीय नारी शक्ति का गौरव बढ़ाया।