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क्या है विकसित भारत शिक्षा अधीक्षण बिल, जिसे केंद्रीय कैबिनेट ने दी मंजूरी; जान लें इसके बारे में

 Published : Dec 13, 2025 11:05 am IST,  Updated : Dec 13, 2025 11:05 am IST

केंद्रीय कैबिनेट की तरफ से विकसित भारत शिक्षा अधीक्षण बिल को मंजूरी दे दी गई है। इसका क्या काम होगा? आइए इस खबर के जरिए जानते हैं।

सांकेतिक फोटो- India TV Hindi
सांकेतिक फोटो Image Source : PEXELS

भारतीय उच्च शिक्षा में एक बड़ा बदलाव होने वाला है। केंद्रीय कैबिनेट ने यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (UGC), ऑल इंडिया काउंसिल फॉर टेक्निकल एजुकेशन (AICTE) और नेशनल काउंसिल फॉर टीचर एजुकेशन (NCTE) की जगह लेने वाले एक ऐतिहासिक बिल को मंजूरी दे दी है। इस प्रस्तावित कानून का नाम पहले हायर एजुकेशन कमीशन ऑफ इंडिया (HECI) बिल था, जिसे अब विकसित भारत शिक्षा अधीक्षण बिल नाम दिया गया है। एक अधिकारी ने बताया, "विकसित भारत शिक्षा अधीक्षण स्थापित करने वाले बिल को कैबिनेट ने मंजूरी दे दी है।"

मुख्यत: तीन काम होंगे

कमीशन को एक सिंगल हायर एजुकेशन रेगुलेटर के तौर पर स्थापित करने का प्रस्ताव है। इसके मुख्यत: तीन काम होंगे- रेगुलेशन, एक्रेडिटेशन और प्रोफेशनल स्टैंडर्ड को तय करना। फंडिंग, जिसे चौथे वर्टिकल के तौर पर देखा जा रहा है, उसे अभी तक रेगुलेटर के तहत रखने का प्रस्ताव नहीं है। फंडिंग की ऑटोनॉमी एडमिनिस्ट्रेटिव मिनिस्ट्री के पास रहने का प्रस्ताव है। 

एक ड्राफ्ट बिल के रूप में पहले भी हो चकी चर्चा

HECI के कॉन्सेप्ट पर पहले भी एक ड्राफ्ट बिल के रूप में चर्चा हो चुकी है। हायर एजुकेशन कमीशन ऑफ इंडिया (यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन एक्ट को खत्म करना) बिल, 2018 का एक ड्राफ्ट, जिसमें UGC एक्ट को खत्म करने और हायर एजुकेशन कमीशन ऑफ इंडिया की स्थापना का प्रावधान था, 2018 में फीडबैक और स्टेकहोल्डर्स के साथ सलाह-मशविरे के लिए पब्लिक डोमेन में डाला गया था।

इसके बाद धर्मेंद्र प्रधान के नेतृत्व में HECI को हकीकत बनाने के लिए नए सिरे से कोशिशें शुरू की गईं, जिन्होंने जुलाई 2021 में केंद्रीय शिक्षा मंत्री का पद संभाला था। एक सिंगल हायर एजुकेशन रेगुलेटर की अहमियत पर जोर देते हुए, NEP-2020 डॉक्यूमेंट कहता है, "हायर एजुकेशन सेक्टर को फिर से मजबूत बनाने और उसे आगे बढ़ने में मदद करने के लिए रेगुलेटरी सिस्टम में पूरी तरह से बदलाव की जरूरत है।"

इसमें यह भी कहा गया है कि नया सिस्टम यह पक्का करे कि रेगुलेशन, एक्रेडिटेशन, फंडिंग और एकेडमिक स्टैंडर्ड तय करने जैसे अलग-अलग काम अलग-अलग, आजाद और मजबूत संस्थाओं द्वारा किए जाएं। (With PTI Input)

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