नई दिल्ली: मशहूर बंगाली फिल्मकार श्रीजीत मुखर्जी पर नेताजी सुभाष चंद्र बोस के परिवारवालों ने नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि अपने नए द्विभाषी (हिंदी-बंगाली) परियोजना 'गुमनामी' में उन्होंने नेताजी को गुमनामी बाबा के रूप में दिखाकर उनकी छवि को खराब करने की कोशिश की है।
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जब इस बारे में पूछने के लिए श्रीजीत से संपर्क किया गया तो उन्होंने कहा कि नेताजी के परिवारवाले पहले से ही इस पर विरोध जता रहे हैं। क्या उन्होंने फिल्म देखी है? मैंने किसी भी तरह से उनकी छवि खराब नहीं की है। देखिए, उनके अंतिम दिनों और उनके निधन के बारे में तीन सिद्धांत है। एक रशियन थ्योरी, दूसरा प्लेन-क्रैश थ्योरी और तीसरा 'बाबा गुमनामी' थ्योरी है। मैं इन तीन सिद्धांतों में से किसी के साथ नहीं गया हूं बल्कि मैं यहां निष्पक्ष रहा हूं। अब उनकी आखिरी दिनों के रहस्य के बारे में दर्शकों को ही निर्धारित करने दीजिए ।
श्रीजीत दर्शकों की प्रतिक्रिया को जानने के लिए बेहद उत्साहित व उत्सुक हैं। उन्होंने कहा, "नेताजी पर फिल्म बनाने का सपना मेरा काफी लंबे समय से रहा है। मैं एक इंसान के तौर पर जितना हो सके उतना निष्पक्ष रहने की कोशिश की है। गैर-बॉलीवुड फिल्म के लिए दिए गए बजट को ध्यान में रखते हुए मैं जितना कर सकता था उतना मैंने किया है।"
साल 2005 में श्याम बेनेगल की फिल्म 'नेताजी सुभाष चंद्र बोस: द फॉरगौटेन हीरो' आई थी, इसे वह अपनी फिल्म के साथ किस तरह से तुलना करते हैं?
इस पर उन्होंने कहा, "मेरे ख्याल से युद्ध के दृश्य और बेहतर किए जा सकते थे, लेकिन नेताजी के रूप में सचिन खेड़ेकर एक चमक थे। किरदार में खुद को ढालने के लिए उन्होंने खुद को शारीरिक और भावनात्मक रूप से बदला। अब देखते हैं कि नेताजी के रूप में प्रसेनजीत (चटर्जी) पर दर्शकों की क्या प्रतिक्रिया रहती है।" 'गुमनामी' श्रीजीत की पहली द्विभाषी फिल्म है और इसलिए यह उनके लिए काफी स्पेशल भी है। उन्होंने कहा, "इसे हिदी और बंगाली दोनों भाषाओं में एकसाथ बनाया गया है और यह 2 अक्टूबर को रिलीज हो रही है।"
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