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'चिंताओं को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता', विवाद के बीच हाई कोर्ट ने 'द केरल स्टोरी 2' की स्क्रीनिंग का दिया आदेश

 Written By: Jaya Dwivedie @JDwivedie
 Published : Feb 24, 2026 01:27 pm IST,  Updated : Feb 24, 2026 01:27 pm IST

केरल हाई कोर्ट ने फिल्म 'केरल स्टोरी 2' के सर्टिफिकेशन को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर फैसला करने से पहले इसकी स्क्रीनिंग करने को कहा, साथ ही CBFC से भी जवाब मांगा। कोर्ट ने फिल्म में राज्य को दिखाए जाने पर चिंता जताई।

The Kerala Story 2- India TV Hindi
द केरल स्टोरी 2 के ट्रेलर से लिया गया सीन। Image Source : STILL FROM THE KERALA STORY 2 TRAILER

केरल हाई कोर्ट में मंगलवार को उस वक्त अहम मोड़ आया, जब अदालत ने कहा कि वह विवादों में घिरी फिल्म 'द केरल स्टोरी 2' खुद देखेंगी। फिल्म के सर्टिफिकेशन और केरल राज्य को कथित तौर पर गलत तरीके से पेश करने के आरोपों को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान यह टिप्पणी की गई। याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस बेचू कुरियन थॉमस ने कहा कि अदालतें आमतौर पर कलात्मक अभिव्यक्ति में हस्तक्षेप करने से बचती हैं। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जब किसी फिल्म के शीर्षक में केरल जैसे राज्य का नाम शामिल हो तो वहां के लोगों की चिंताओं को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

पहले फिल्म देखेगी अदालत

उन्होंने कहा कि केरल मेलजोल और सेक्युलरिज्म के लिए जाना जाता है, जहां लोग शांति से साथ रहते हैं। ऐसे में यदि फिल्म यह संकेत देती है कि कोई विवादित घटना पूरे राज्य में हो रही है तो इससे गलत संदेश जा सकता है और तनाव पैदा हो सकता है। कोर्ट ने सवाल उठाया कि क्या सेंसर बोर्ड ने इन पहलुओं पर गंभीरता से विचार किया है। जज ने कहा कि वह आगे कोई आदेश देने से पहले फिल्म देखना चाहेंगे। उन्होंने निर्माताओं को निर्देश दिया कि वे स्क्रीनिंग की व्यवस्था बुधवार को करें और समय व स्थान की जानकारी अदालत को दें। मामले पर दोपहर 1:45 बजे दोबारा सुनवाई तय की गई है।

दोनों पक्षों की दलीलें

फिल्म के निर्माताओं की ओर से पेश वकील ने दलील दी कि मूवी में ऐसा कुछ नहीं है जो किसी धर्म या समुदाय को निशाना बनाता हो। उनका कहना था कि फिल्म किसी विशेष वर्ग के खिलाफ नहीं है। वहीं याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि फिल्म में लव जिहाद की शिकार के रूप में कुछ युवतियों को दिखाया गया है, जबकि कथित पीड़ितों में से कोई भी केरल से नहीं है। इसके बावजूद फिल्म का नाम ‘द केरला स्टोरी 2’ रखा गया है, जो उनके अनुसार राज्य की छवि को नुकसान पहुंचा सकता है।

पुराने मामले का भी जिक्र

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने एक पुराने मामले का उल्लेख किया, जिसमें आपत्तियों के बाद फिल्म के कुछ दृश्य हटाए गए थे। अदालत ने संकेत दिया कि यदि मौजूदा मामले में भी जरूरत पड़ी तो वही मानदंड अपनाए जा सकते हैं। फिल्म का निर्देशन कामाख्या नारायण सिंह ने किया है, जबकि इसे विपुल अमृत लाल शाह ने प्रोड्यूस किया है। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि हाई कोर्ट फिल्म देखने के बाद क्या निर्देश देता है। यह मामला केवल एक फिल्म तक सीमित नहीं है, बल्कि आर्टिस्टिक फ्रीडम, सेंसरशिप और सामाजिक संवेदनशीलता के बीच संतुलन पर भी एक अहम बहस बन चुका है।

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