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जब मिस यूनिवर्स को 21 की उम्र में काटने पड़े थे कोर्ट के चक्कर, पिता की सम्पत्ति बनी सहारा, तब जाकर मिला न्याय

 Published : Nov 19, 2025 06:00 am IST,  Updated : Nov 19, 2025 06:30 am IST

भारत की पहली मिस यूनिवर्स सुष्मिता सेन को 21 साल की उम्र में अपनी बेटी रेनी को गोद लेने के लिए कोर्ट जाना पड़ा। फिर पिता की संपत्ति मिलने के बाद उन्हें बेटी की कस्टडी मिल गई।

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सुष्‍म‍िता सेना भारत की पहली मिस यूनिवर्स हैं। Image Source : INSTAGRAM/@SUSHMITASEN47

बॉलीवुड एक्ट्रेस सुष्मिता सेन 19 नवंबर को अपना 50वां जन्मदिन सेलिब्रेट कर रही हैं। भारत की पहली मिस यूनिवर्स ने अब तक शादी नहीं की है और अपनी दो बेटियों के साथ आलीशान जिंदगी जीती हैं। सुष्मिता अक्सर अपनी प्रोफेशनल लाइफ के साथ-साथ पर्सनल लाइफ को लेकर भी चर्चा में बनी रहती हैं। खासतौर पर बेटी रेने सेन को गोद लेने के प्रक्रिया के कारण, जो उन्होंने कानूनी लड़ाई लड़ी, उसका जिक्र आए दिन होता रहता है। उन्होंने खुद खुलासा किया था कि उन्हें अपनी पहली बेटी को गोद लेने के लिए कोर्ट-कचहरी के चक्कर लगने पड़े और उस वक्त उनके पिता ने उनका साथ दिया था।

एक्ट्रेस को बेटी के लिए काटने पड़े थे कोर्ट के चक्कर

सुष्मिता सेन ने कई इंटरव्यू में अपनी बेटी रेनी को गोद लेने के लंबे प्रोसेस के बारे में बताया। उन्होंने लंबी कोर्ट लड़ाई के बारे में खुलकर बात की और बताया कि कैसे उनके पिता ने एक्ट्रेस की गोद ली हुई बच्ची को सपोर्ट करने के लिए फाइनेंशियल मजबूत दिखाने के लिए अपनी संपत्ति उनके नाम साइन करने का फैसला किया था। सुष्मिता सेन इस मामले पर खुलकर बात की है और बताया है कि ये सब उनके लिए कितना मुश्किल था। 21 साल की उम्र में उन्हें कोर्ट-कचहरी के चक्कर काटने पड़ रहे थे। 

4 साल बाद मिला न्याय

डॉ. शीन गुरिब के साथ उनके यूट्यूब चैनल पर बातचीत में सुष्मिता सेन ने बताया कि कैसे उनकी बेटी रेनी को गोद लेने की कानूनी लड़ाई 21 साल की उम्र से लेकर 24 साल की उम्र तक चलती रही। उन्होंने साफ-साफ बताया कि उन्हें लगातार डर लगा रहता था, उन्हें पक्का नहीं था कि कोर्ट का फैसला किस तरफ होगा। सुष्मिता सेन ने बताया, 'जब मैं 21 साल की उम्र में कानूनी तौर पर बड़ी हुई तो मुझे पता था कि मैं यही करना चाहती हूं। इसलिए, 21 से 24 साल की उम्र तक, कानूनी लड़ाई शुरू हुई। एक बार जब यह शुरू हुआ तो कम से कम मेरी बेटी मेरे साथ फॉस्टर केयर में थी, लेकिन आप लगातार इस ट्रॉमा के साथ जीते हैं कि 'क्या होगा अगर फैमिली कोर्ट ने मेरे फेवर में फैसला नहीं सुनाया? वे बच्चे को वापस ले लेंगे और अब यह बच्चा मुझे मां कहने लगा है। मेरे पास एक प्लान था।'

सुष्मिता सेन को कैसे मिली बेटी की कस्टडी

एक्ट्रेस ने आगे अपने पिता के बारे में बात की और बताया कि उन्हें उनके सपोर्ट की वजह से ये खुशी मिली। इस बारे में बात करते हुए कि कोर्ट ने उनके पिता से उनके बच्चे को सपोर्ट करने के लिए 'फाइनेंशियल सपोर्ट' दिखाने के लिए कैसे कहा और सुष्मिता सेन ने बताया, 'मुझे अपने पिता पर बहुत गर्व है। मेरे बच्चे उनकी वजह से हैं, ऐसे देश में जहां बच्चा गोद लेने के लिए या तो पिता या पिता जैसा कोई होना जरूरी है। कोर्ट ने उनसे कहा कि उन्हें मेरे बच्चे को सपोर्ट करने के लिए मजबूत आर्थिक स्थिति दिखाना होगा और उन्हें अपनी आधी से ज्यादा प्रॉपर्टी पर साइन करना होगा, लेकिन मेरे पिता ने कोर्ट से कहा, 'मैं बहुत अमीर आदमी नहीं हूं, इसलिए अगर आप उसका आधा भी ले लेंगे तो कुछ नहीं होगा। मैं अपनी हर चीज पर बिना किसी शर्त के उसके नाम पर साइन करने आया हूं।'

रेनी के बाद दूसरी बेटी को लिया गोद

सुष्मिता सेन ने आगे बताया कि कैसे कोर्ट ने उनके पिता को चेतावनी दी थी कि एक सिंगल मदर होने के नाते उन्हें कभी कोई लड़का नहीं मिलेगा। हालांकि, टर्निंग पॉइंट तब आया जब उनके पिता ने कहा कि उन्होंने अपनी बेटी को किसी की पत्नी बनने के लिए नहीं पाला है। एक्ट्रेस ने आखिर में कहा कि अपनी पहली बच्ची रेनी को गोद लेने के मुश्किल रास्ते के बाद दूसरी बार यह प्रोसेस आसान हो गया, जब उन्होंने अलीशा को गोद लिया।

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