आज के समय में ओटीटी प्लेटफॉर्म्स पर एक्शन, क्राइम और मर्डर मिस्ट्री सीरीज का दबदबा है। इसके बावजूद ‘पंचायत’, ‘गुल्लक’ और ‘ये मेरी फैमिली’ जैसे शो अपनी सादगी और भावनात्मक जुड़ाव के चलते दर्शकों के दिलों में खास जगह बना चुके हैं। हालांकि इन वेब सीरीज से बहुत पहले ही भारतीय टेलीविजन पर एक ऐसा शो आ चुका था, जिसने बिना शोर-शराबे के आम जिंदगी की कहानियों से लोगों का दिल जीत लिया था।
OTT से पहले भी था सादगी भरा मास्टरपीस
लगभग 40 साल पहले, जब ओटीटी जैसी कोई अवधारणा भी नहीं थी, तब इस शो ने पारिवारिक मूल्यों और रिश्तों को बेहद सहज तरीके से दर्शाया। न इसमें हाई-ऑक्टेन ड्रामा था और न ही सस्पेंस या हिंसा, फिर भी इसकी लोकप्रियता किसी सुपरहिट शो से कम नहीं रही।
छोटी कहानी में छुपा बड़ा जीवन संदेश
इस शो की सबसे बड़ी खूबी इसकी कहानियां थीं। हर एपिसोड एक छोटी सी कहानी पेश करता था, जिसके भीतर जीवन का एक बड़ा सबक छिपा होता था। यही वजह रही कि यह शो न सिर्फ बच्चों और युवाओं को पसंद आया, बल्कि उनके माता-पिता और बुजुर्ग दर्शकों ने भी इसकी सच्चाई और सादगी की सराहना की।
डेली सोप्स के दौर में लिमिटेड एपिसोड्स की जीत
उस दौर में जब टेलीविजन पर कभी न खत्म होने वाले डेली सोप्स का बोलबाला शुरू हो चुका था, यह शो केवल करीब 50 एपिसोड्स में अपनी बात कहकर खत्म हो गया। इसके बावजूद, दर्शकों पर इसका प्रभाव इतना गहरा रहा कि इसे बार-बार देखा गया और याद किया गया।
80 के दशक में सबसे ज्यादा IMDb रेटिंग
इस शो को न सिर्फ दर्शकों का प्यार मिला, बल्कि आलोचकों ने भी इसे खूब सराहा। 80 के दशक में यह शो टेलीविजन की दुनिया में सबसे ज्यादा IMDb रेटिंग हासिल करने वाले कार्यक्रमों में शामिल रहा, जो इसे एक ऐतिहासिक उपलब्धि बनाता है। इस शो का पहली बार प्रसारण 1986 में हुआ था। सीमित बजट और कम तकनीकी संसाधनों के बावजूद, इसके कंटेंट की मजबूती ने सभी कमियों को पीछे छोड़ दिया और इसे हर घर में लोकप्रिय बना दिया।
भारत की मिट्टी से जुड़ी कहानियां
शो की कहानियां पूरी तरह भारतीय परिवेश से जुड़ी थीं, स्कूल की शरारतें, दोस्ती, परिवार, गांव की जिंदगी और नैतिक मूल्य। इन्हें इतनी सहजता से दिखाया गया कि हर उम्र का दर्शक खुद को इन कहानियों से जोड़ पाया। जिस शो की बात हो रही है, उसका नाम है ‘मालगुड़ी डेज़’ (Malgudi Days)। यह मशहूर लेखक आर. के. नारायण की कहानियों पर आधारित था और इसका निर्देशन दिग्गज अभिनेता-निर्देशक शंकर नाग ने किया था।
शंकर नाग और कविता लंकेश का निर्देशन
‘मालगुड़ी डेज’ के पहले तीन सीजन शंकर नाग ने खुद डायरेक्ट किए थे। चौथे सीजन का निर्देशन उन्होंने कविता लंकेश के साथ मिलकर किया, जिसने शो की आत्मा को बरकरार रखा। इस शो के कुल चार सीजन बनाए गए थे और हर सीजन ने दर्शकों के दिलों पर गहरी छाप छोड़ी। इसके किरदार आज भी याद किए जाते हैं और इन्हीं में सबसे लोकप्रिय नाम रहा स्वामी का।
स्वामी का किरदार बना दर्शकों का चहेता
मास्टर मजनूनाथ द्वारा निभाया गया स्वामी का किरदार शो की जान था। उसकी मासूमियत, शरारतें और दोस्ती ने बच्चों से लेकर बड़ों तक सभी को भावुक कर दिया। इस शो की लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि कर्नाटक के अरसलु रेलवे स्टेशन को लोग प्यार से ‘मालगुड़ी रेलवे स्टेशन’ कहने लगे। आज भी यह जगह शो के फैंस के लिए खास आकर्षण बनी हुई है।
9.4 IMDb रेटिंग के साथ आज भी टॉप पर
IMDb पर 9.4 की शानदार रेटिंग के साथ ‘मालगुड़ी डेज़’ आज भी दुनिया की सबसे बेहतरीन टीवी सीरीज में गिनी जाती है। यह रेटिंग आज की कई लोकप्रिय वेब सीरीज से भी ज्यादा है। आज की नई पीढ़ी भी इस कालजयी शो को ओटीटी प्लेटफॉर्म Amazon Prime Video पर देख सकती है और इसकी सादगी, भावनात्मक गहराई और भारतीय संस्कृति से जुड़ी कहानियों का अनुभव कर सकती है।
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