भोजपुरी सुपरस्टार मनोज तिवारी उन चंद कलाकारों में से हैं जिन्होंने राजनीति में भी इस मयार की सफलता हासिल की है। नॉर्थ ईस्ट दिल्ली से सांसद तिवारी का सियासी दुनिया में ताना बाना बनने से पहले ग्लैमर की दुनिया में भी खूब नाम था। आज भी उनके 15 साल पुराने कामों को भी लोग याद करते रहते हैं। हाल ही में मनोज तिवारी ने 15 साल पहले 2010 में बिग बॉस 4 में अंडों को लेकर हुए लफड़े पर खुलकर बात की है। भारत में जिन लोगों ने सोशल मीडिया को शुरुआत से चलाया है वो जानते होंगे कि मनोज तिवारी सोशल मीडिया के भी फर्स्ट जनरेशन वायरल स्टार भी रहे हैं। बिग बॉस 4 में डॉली बिंद्रा के साथ हुए मनोज तिवारी के झगड़े के वीडियो सभी ने देखे हैं। वीडियो जिसमें डॉली बिंद्रा चिल्ला रही हैं कि 'ये....बाप पर जाना नहीं'। हाल ही में फराह खान अपना ब्लॉग शूट करने मनोज तिवारी के घर पहुंची थीं। यहां फराह के साथ मनोज ने ढेर सारी गप्पें लड़ाईं, अपनी सियासी सोच के बारे में खुलकर बात की और ये भी बताया कि उस मामले की सच्चाई क्या है जब उनके ऊपर बिग बॉस 4 के घर में अंडे चुराने का आरोप लगा था।
क्या बताया अंडे की लड़ाई का पूरा सच?
साल 2010 में मनोज तिवारी बिग बॉस 4 में पहुंचे थे। इसमें श्वेता तिवारी, खली और डॉली बिंद्रा जैसे कई दूसरे कलाकार भी थे। श्वेता इस सीजन की विनर रहीं थीं और मनोज तिवारी भी पूरे सीजन में काफी सुर्खियां बटोरते रहे थे। शो में खली थे तो उनकी खुराक ज्यादा थी और वे दूसरे लोगों के हिस्से के भी अंडे खा जाया करते थे। इसी दौरान डॉली बिंद्रा किचिन की जिम्मेदारी संभाल रही थीं और एक सुबह मनोज ने ऑमलेट मांग लिया। डॉली ने मना कर दिया कि जो सभी के लिए ब्रेकफास्ट बना है वही खाना पड़ेगा। मनोज ने खुद ऑमलेट बनाने की पेशकश की तो डॉली ने इसका विरोध किया जिसके जवाब में मनोज ने कह दिया कि किचिन किसी के बाप का नहीं है। बाप की बात पर डॉली भड़क गईं और खूब गुस्सा निकाला और यहां तक कह दिया कि काट कर रख दूंगी। ये फाइट सोशल मीडिया पर खूब वायरल रही और आज भी इसके वीडियो कहीं-कहीं मीम्स में दिख जाते हैं। अब मनोज तिवारी के ऊपर लगे अंडे चुराने के आरोपों को लेकर भी उन्होंने अपनी सफाई दी है। साथ ही फराह खान को बताया कि मैंने वो अंडे चुराए नहीं थे बल्कि छुपाकर रखे थे क्योंकि खली जी सब अंडे खा जाते थे। उन्होंने ये भी कहा कि ध्यान देने वाली बात ये है कि छुपाने और चुराने में फर्क होता है। हालांकि उन्होंने ये भी बताया कि पहले वे अंडे खाया करते थे लेकिन अब उन्होंने काफी समय से छोड़ दिए हैं।
कला से सियासी दुनिया तक छोड़े निशान
मनोज तिवारी का जन्म वाराणसी में एक साधारण परिवार में हुआ था। 6 भाई-बहनों के बीच उनका बचपन काफी आर्थिक तंगी लेकिन प्रेम से भरा रहा। स्कूल पूरा करने के बाद बनारस हिंदु यूनिवर्सिटी में दाखिला लिया और साथ ही में संगीत का शौक था तो बनारस के शीतला घाट पर भजन गाते थे। कॉलेज के साथ जेबखर्ची और परिवार की मदद के लिए ड्राइवर समेत कई हार्ट जॉब्स भी की। इसके बाद गानों में अपने करियर बनाने का फैसला लेते हुए भोजपुरी म्यूजिक बनाना शुरू कर दिया। करीब 10 साल के संघर्ष के बाद उन्हें सफलता मिल गई और 2003 में उनकी फिल्म 'ससुरा बड़ा पैसा वाला' सुपरहिट हो गई। मनोज तिवारी स्टार बन गए और इसके बाद भोजपुरी इंडस्ट्री में सबसे बड़े सुपरस्टार बनकर उभरे। ग्लैमर में खूब नाम कमाने और दर्जनों सदाबहार गानों के बाद मनोज तिवारी ने साल 2009 में सियासी दुनिया में कदम रखा। 2009 में मनोज ने समाजवादी पार्टी के टिकट पर गोरखपुर से योगी आदित्यनाथ के खिलाफ चुनाव लड़ा। इसके बाद तिवारी को इस चुनाव में हार का सामना करना पड़ा। इसके बाद उन्होंने 2013 में भाजपा ज्वाइन की और दिल्ली आ गए। यहां 2014 के आम चुनाव में मनोज तिवारी ने नॉर्थ ईस्ट सीट से मैंबर ऑफ पार्लियामेंट का चुनाव लड़ा और बड़े अंतर से जीत दर्ज की। इसके बाद इसी सीट से तीसरी बार सांसद हैं और दिल्ली के भाजपा के अध्यक्ष भी रह चुके हैं।
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