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Mutual Fund में पैसे लगाने वाले 90% लोग करते हैं ये 5 बड़ी गलतियां, निवेश से पहले जान लें वरना पछताएंगे

Edited By: Shivendra Singh
Published : Jan 04, 2026 01:24 pm IST,  Updated : Jan 04, 2026 01:24 pm IST
म्यूचुअल फंड को आम निवेशकों के लिए सबसे आसान और असरदार निवेश ऑप्शन माना जाता है। लॉन्ग टर्म में अच्छा रिटर्न, प्रोफेशनल मैनेजमेंट और SIP जैसी सुविधाएं इसे फेमस बनाती हैं। लेकिन हैरानी की बात यह है कि म्यूचुअल फंड में निवेश करने वाले करीब 90% लोग कुछ ऐसी आम गलतियां कर बैठते हैं, जो उनके वेल्थ क्रिएशन के सपने को कमजोर कर देती हैं। ये गलतियां फंड की नहीं, बल्कि निवेशक की सोच, जल्दबाजी और अनुशासन की कमी से जुड़ी होती हैं। अगर आप भी निवेश शुरू करने जा रहे हैं या पहले से निवेशक हैं, तो इन गलतियों को समझना बेहद जरूरी है।
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म्यूचुअल फंड को आम निवेशकों के लिए सबसे आसान और असरदार निवेश ऑप्शन माना जाता है। लॉन्ग टर्म में अच्छा रिटर्न, प्रोफेशनल मैनेजमेंट और SIP जैसी सुविधाएं इसे फेमस बनाती हैं। लेकिन हैरानी की बात यह है कि म्यूचुअल फंड में निवेश करने वाले करीब 90% लोग कुछ ऐसी आम गलतियां कर बैठते हैं, जो उनके वेल्थ क्रिएशन के सपने को कमजोर कर देती हैं। ये गलतियां फंड की नहीं, बल्कि निवेशक की सोच, जल्दबाजी और अनुशासन की कमी से जुड़ी होती हैं। अगर आप भी निवेश शुरू करने जा रहे हैं या पहले से निवेशक हैं, तो इन गलतियों को समझना बेहद जरूरी है।
1. ज्यादातर इन्वेस्टर्स वही फंड चुनते हैं जिसने पिछले 1, 3 या 5 साल में शानदार रिटर्न दिया हो। लेकिन केवल आंकड़ों के आधार पर फैसला करना खतरनाक हो सकता है। कई बार किसी एसेट में अचानक तेजी आ जाती है, जिससे उसका पूरा रिटर्न चार्ट चमकने लगता है। इसका मतलब यह नहीं कि वह फंड हर बाजार हालात में अच्छा परफॉर्म करेगा। सही निवेश के लिए फंड की स्ट्रेटेजी, रिस्क लेवल और अलग-अलग मार्केट साइकिल में उसका व्यवहार समझना जरूरी है।
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1. ज्यादातर इन्वेस्टर्स वही फंड चुनते हैं जिसने पिछले 1, 3 या 5 साल में शानदार रिटर्न दिया हो। लेकिन केवल आंकड़ों के आधार पर फैसला करना खतरनाक हो सकता है। कई बार किसी एसेट में अचानक तेजी आ जाती है, जिससे उसका पूरा रिटर्न चार्ट चमकने लगता है। इसका मतलब यह नहीं कि वह फंड हर बाजार हालात में अच्छा परफॉर्म करेगा। सही निवेश के लिए फंड की स्ट्रेटेजी, रिस्क लेवल और अलग-अलग मार्केट साइकिल में उसका व्यवहार समझना जरूरी है।
2. मार्केट में जो ट्रेंड में होता है, इन्वेस्टर उसी की ओर दौड़ पड़ते हैं चाहे वह सेक्टोरल फंड हो या कोई थीमैटिक निवेश। मिस न हो जाए का डर अक्सर गलत फैसलों की वजह बनता है। जबकि हर निवेशक की जरूरत, जोखिम क्षमता और समय सीमा अलग होती है। ट्रेंड के बजाय अपने टारगेट के हिसाब से निवेश करना ज्यादा समझदारी है।
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2. मार्केट में जो ट्रेंड में होता है, इन्वेस्टर उसी की ओर दौड़ पड़ते हैं चाहे वह सेक्टोरल फंड हो या कोई थीमैटिक निवेश। मिस न हो जाए का डर अक्सर गलत फैसलों की वजह बनता है। जबकि हर निवेशक की जरूरत, जोखिम क्षमता और समय सीमा अलग होती है। ट्रेंड के बजाय अपने टारगेट के हिसाब से निवेश करना ज्यादा समझदारी है।
3. जो फंड या एसेट बाजार से ज्यादा रिटर्न देते हैं, वे उतनी ही तेजी से गिर भी सकते हैं। हाई-बिटा निवेश अट्रैक्टिव लगते हैं, लेकिन इनमें उतार-चढ़ाव भी ज्यादा होता है। बिना रिस्क समझे निवेश करना पोर्टफोलियो को असंतुलित कर सकता है।
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3. जो फंड या एसेट बाजार से ज्यादा रिटर्न देते हैं, वे उतनी ही तेजी से गिर भी सकते हैं। हाई-बिटा निवेश अट्रैक्टिव लगते हैं, लेकिन इनमें उतार-चढ़ाव भी ज्यादा होता है। बिना रिस्क समझे निवेश करना पोर्टफोलियो को असंतुलित कर सकता है।
4. कई इन्वेस्टर जल्दी पैसा दोगुना करने की सोच रखते हैं। लेकिन असली दौलत शॉर्टकट से नहीं, बल्कि लंबे समय की कंपाउंडिंग से बनती है। बार-बार खरीद-बिक्री करना अक्सर फायदे से ज्यादा नुकसान पहुंचाता है।
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4. कई इन्वेस्टर जल्दी पैसा दोगुना करने की सोच रखते हैं। लेकिन असली दौलत शॉर्टकट से नहीं, बल्कि लंबे समय की कंपाउंडिंग से बनती है। बार-बार खरीद-बिक्री करना अक्सर फायदे से ज्यादा नुकसान पहुंचाता है।
5. मार्केट गिरते ही घबराकर निवेश बेच देना सबसे आम भूल है। अगर निवेश सही टारगेट और समय सीमा के साथ किया गया है, तो उतार-चढ़ाव में धैर्य रखना जरूरी है। डर और लालच में लिए गए फैसले लंबी अवधि में भारी पड़ सकते हैं।
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5. मार्केट गिरते ही घबराकर निवेश बेच देना सबसे आम भूल है। अगर निवेश सही टारगेट और समय सीमा के साथ किया गया है, तो उतार-चढ़ाव में धैर्य रखना जरूरी है। डर और लालच में लिए गए फैसले लंबी अवधि में भारी पड़ सकते हैं।
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