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कहीं त्वचा पर न हो जाए फंगल इंफेक्शन, मानसून में रखें इन बातों का ख्याल

Written By: Bharti Singh
Published : Aug 14, 2026 12:18 pm IST,  Updated : Aug 14, 2026 12:18 pm IST
बारिश के मौसम का असर सिर्फ चेहरे पर नहीं पड़ता। गर्मी, नमी और ज्यादा पसीने के कारण शरीर पर भी बैक्टीरिया और फंगस के पनपने का खतरा बढ़ सकता है। इस मौसम में लंबे समय तक गीले कपड़े पहनना, पसीने वाले जिम कपड़ों में रहना या शरीर की त्वचा की सिलवटों में नमी जमा रहना बॉडी एक्ने, फॉलिकुलाइटिस और फंगल इंफेक्शन जैसी समस्याओं का कारण बन सकता है।
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बारिश के मौसम का असर सिर्फ चेहरे पर नहीं पड़ता। गर्मी, नमी और ज्यादा पसीने के कारण शरीर पर भी बैक्टीरिया और फंगस के पनपने का खतरा बढ़ सकता है। इस मौसम में लंबे समय तक गीले कपड़े पहनना, पसीने वाले जिम कपड़ों में रहना या शरीर की त्वचा की सिलवटों में नमी जमा रहना बॉडी एक्ने, फॉलिकुलाइटिस और फंगल इंफेक्शन जैसी समस्याओं का कारण बन सकता है।
मानसून में शरीर को साफ रखने के साथ-साथ त्वचा को ज्यादा देर तक गीला या नम रखने से बचना जरूरी है। अगर पैर गीले हैं तो इससे नाखून और त्वचा में इंफेक्शन का खतरा बढ़ जाता है। खुली और जल्दी सूखने वाले फुटवियर पहनें। सूती, हल्के और जल्दी सूखने वाले कपड़ों का इस्तेमाल करें।
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मानसून में शरीर को साफ रखने के साथ-साथ त्वचा को ज्यादा देर तक गीला या नम रखने से बचना जरूरी है। अगर पैर गीले हैं तो इससे नाखून और त्वचा में इंफेक्शन का खतरा बढ़ जाता है। खुली और जल्दी सूखने वाले फुटवियर पहनें। सूती, हल्के और जल्दी सूखने वाले कपड़ों का इस्तेमाल करें।
बारिश के मौसम में ज्यादा से ज्यादा स्ट्रॉन्ग प्रोडक्ट इस्तेमाल करना भी सही नहीं है। स्क्रब, एक्सफोलिएटिंग एसिड, एक्ने ट्रीटमेंट और ऑयल-कंट्रोल प्रोडक्ट जरूरत के हिसाब से इस्तेमाल किए जा सकते हैं। लेकिन एक साथ कई हार्श प्रोडक्ट लगाने से त्वचा में जलन और संवेदनशीलता बढ़ सकती है। सिर्फ ज्यादा प्रोडक्ट इस्तेमाल करने का मतलब यह नहीं है कि रिजल्ट भी जल्दी मिलेगा। स्किन की जरूरत को समझकर ही प्रोडक्ट चुनना बेहतर है।
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बारिश के मौसम में ज्यादा से ज्यादा स्ट्रॉन्ग प्रोडक्ट इस्तेमाल करना भी सही नहीं है। स्क्रब, एक्सफोलिएटिंग एसिड, एक्ने ट्रीटमेंट और ऑयल-कंट्रोल प्रोडक्ट जरूरत के हिसाब से इस्तेमाल किए जा सकते हैं। लेकिन एक साथ कई हार्श प्रोडक्ट लगाने से त्वचा में जलन और संवेदनशीलता बढ़ सकती है। सिर्फ ज्यादा प्रोडक्ट इस्तेमाल करने का मतलब यह नहीं है कि रिजल्ट भी जल्दी मिलेगा। स्किन की जरूरत को समझकर ही प्रोडक्ट चुनना बेहतर है।
मानसून में स्किन केयर रुटीन में भी बदलाव करें। इसके लिए पसीना, ज्यादा तेल और गंदगी हटाने के लिए चेहरे को जरूरत के हिसाब से साफ करें। बार-बार चेहरा धोने से बचें। इससे त्वचा का नेचुरल ऑयल कम होता है। मौसम चिपचिपा होने के बावजूद मॉइस्चराइजर लगाना बंद न करें। हल्का और नॉन-कॉमेडोजेनिक मॉइस्चराइजर इस्तेमाल किया जा सकता है।
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मानसून में स्किन केयर रुटीन में भी बदलाव करें। इसके लिए पसीना, ज्यादा तेल और गंदगी हटाने के लिए चेहरे को जरूरत के हिसाब से साफ करें। बार-बार चेहरा धोने से बचें। इससे त्वचा का नेचुरल ऑयल कम होता है। मौसम चिपचिपा होने के बावजूद मॉइस्चराइजर लगाना बंद न करें। हल्का और नॉन-कॉमेडोजेनिक मॉइस्चराइजर इस्तेमाल किया जा सकता है।
बारिश के दिनों में भले ही धूप ज्यादा नहीं निकलती लेकिन रोजाना सनस्क्रीन लगाना न भूलें। जेंटल क्लीनिंग, हल्का हाइड्रेशन और रोजाना सनस्क्रीन पर ध्यान देना ज्यादा जरूरी है। इससे आपकी त्वचा स्वस्थ रहेगी और कील मुंहासे की समस्या भी कम होगी।
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बारिश के दिनों में भले ही धूप ज्यादा नहीं निकलती लेकिन रोजाना सनस्क्रीन लगाना न भूलें। जेंटल क्लीनिंग, हल्का हाइड्रेशन और रोजाना सनस्क्रीन पर ध्यान देना ज्यादा जरूरी है। इससे आपकी त्वचा स्वस्थ रहेगी और कील मुंहासे की समस्या भी कम होगी।
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