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छोटी दीवाली को नरक चतुर्दशी क्यों कहते हैं? जान लें इससे जुड़ी पौराणिक कथा

Written By: Naveen Khantwal
Published : Oct 16, 2025 12:58 pm IST,  Updated : Oct 16, 2025 01:01 pm IST
छोटी दिवाली का त्योहार साल 2025 में 19 अक्टूबर को मनाया जाएगा। छोटी दीपावली को नरक चतुर्दशी के नाम से भी जाना जाता है। ऐसे में आज हम आपको बताने वाले हैं कि छोटी दिवाली को नरक चतुर्दशी कहने के पीछे का कारण क्या है और इससे जुड़ी पौराणिक कथा।
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छोटी दिवाली का त्योहार साल 2025 में 19 अक्टूबर को मनाया जाएगा। छोटी दीपावली को नरक चतुर्दशी के नाम से भी जाना जाता है। ऐसे में आज हम आपको बताने वाले हैं कि छोटी दिवाली को नरक चतुर्दशी कहने के पीछे का कारण क्या है और इससे जुड़ी पौराणिक कथा।
नरक चतुर्दशी की कथा- पौराणिक कथा के अनुसार एक समय नराकासुर नाम के एक असुर का आतंक चरम पर था। नरकासुर ने अपने आतंक से देवी-देवताओं और मनुष्यों को बहुत परेशान किया। नरकासुर ने कई ऋषि-मुनियों के साथ ही 16000 कन्याओं को अपनी कैद में रखा था।
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नरक चतुर्दशी की कथा- पौराणिक कथा के अनुसार एक समय नराकासुर नाम के एक असुर का आतंक चरम पर था। नरकासुर ने अपने आतंक से देवी-देवताओं और मनुष्यों को बहुत परेशान किया। नरकासुर ने कई ऋषि-मुनियों के साथ ही 16000 कन्याओं को अपनी कैद में रखा था।
नरकासुर के आतंक से परेशान होकर देवी-देवता भगवान कृष्ण के पास पहुंचे। उन्होंने भगवान कृष्ण से गुहार लगाई कि नराकासुर के आतंक से उन्हें मुक्त करें। भगवान कृष्ण ने देवी-देवताओं की बात मानी और अपनी पत्नी सत्यभामा के साथ नरकासुर से युद्ध करने निकल गए। श्रीकृष्ण अपनी पत्नी सत्यभामा को इसलिए युद्ध में ले गए थे क्योंकि नरकासुर को वरदान मिला था कि उसकी मृत्यु किसी स्त्री के अलावा किसी के हाथों नहीं होगी। सत्यभामा भूदेवी का रूप थीं और कई शक्तियां उनके पास थीं इसलिए भगवान कृष्ण ने नरकासुर का वध करने के लिए उनकी मदद ली थी।
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नरकासुर के आतंक से परेशान होकर देवी-देवता भगवान कृष्ण के पास पहुंचे। उन्होंने भगवान कृष्ण से गुहार लगाई कि नराकासुर के आतंक से उन्हें मुक्त करें। भगवान कृष्ण ने देवी-देवताओं की बात मानी और अपनी पत्नी सत्यभामा के साथ नरकासुर से युद्ध करने निकल गए। श्रीकृष्ण अपनी पत्नी सत्यभामा को इसलिए युद्ध में ले गए थे क्योंकि नरकासुर को वरदान मिला था कि उसकी मृत्यु किसी स्त्री के अलावा किसी के हाथों नहीं होगी। सत्यभामा भूदेवी का रूप थीं और कई शक्तियां उनके पास थीं इसलिए भगवान कृष्ण ने नरकासुर का वध करने के लिए उनकी मदद ली थी।
श्रीकृष्ण और सत्यभामा ने नरकासुर के साथ भयानक युद्ध लड़ा था और अंत में उसका वध किया। नरकासुर का वध करने के बाद श्रीकृष्ण ने नरकासुर की कैद से 16000 कन्याओं और सभी ऋषि-मुनियों को मुक्त किया था। जिसके बाद लोगों ने दीप जलाकर उत्सव मनाया था।
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श्रीकृष्ण और सत्यभामा ने नरकासुर के साथ भयानक युद्ध लड़ा था और अंत में उसका वध किया। नरकासुर का वध करने के बाद श्रीकृष्ण ने नरकासुर की कैद से 16000 कन्याओं और सभी ऋषि-मुनियों को मुक्त किया था। जिसके बाद लोगों ने दीप जलाकर उत्सव मनाया था।
जिस दिन श्रीकृष्ण ने सत्यभामा के साथ मिलकर नरकासुर का वध किया था वो कार्तिक कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि थी। इसलिए इस दिन को नरक चतुर्दशी के नाम से जाना जाता है। इस दिन भगवान श्रीकृष्ण और सत्यभामा की पूजा करने से शुभ फलों की प्राप्त होती है। इस दिन को लोग छोटी दिवाली भी कहते हैं।
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जिस दिन श्रीकृष्ण ने सत्यभामा के साथ मिलकर नरकासुर का वध किया था वो कार्तिक कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि थी। इसलिए इस दिन को नरक चतुर्दशी के नाम से जाना जाता है। इस दिन भगवान श्रीकृष्ण और सत्यभामा की पूजा करने से शुभ फलों की प्राप्त होती है। इस दिन को लोग छोटी दिवाली भी कहते हैं।
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