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8.5 करोड़ रुपये की ठगी का डराने वाला मामला, स्टेप By स्टेप जानिए कैसे हुआ पूरा कांड

 Reported By: Nirnay Kapoor, Edited By: Subhash Kumar
 Published : Aug 29, 2025 07:01 pm IST,  Updated : Aug 29, 2025 07:01 pm IST

अहमदाबाद में क्राइम ब्रांच ने डिजिटल गिरफ्तारी करने वाले गैंग के सदस्यों की गिरफ्तारी की है। इन पर एक वरिष्ठ नागरिक के साथ 8.5 करोड़ रुपये की ठगी का आरोप है।

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सांकेतिक फोटो। Image Source : PTI

अहमदाबाद के पालड़ी क्षेत्र में रहने वाले एक वरिष्ठ नागरिक के साथ 8.5 करोड़ रुपये की ठगी की गई। आरोपियों ने खुद को मुंबई क्राइम ब्रांच और ईडी के कर्मचारी बताकर ठगी की। फरियादी को डराया गया कि उसकी डिजिटल गिरफ्तारी की जाएगी। पूरी शुरुआत 28 जुलाई को आए एक व्हाट्सएप कॉल से हुई, जिसमें आरोपी ने खुद को ईडी का कर्मचारी बताया। अब क्राइम ब्रांच ने इस डिजिटल अरेस्ट करने वाले गैंग के सदस्यों की गिरफ्तारी की है।

कैसे की गई ठगी?

दरअसल, आरोपी ने वरिष्ठ नागरिक से कहा कि 'नरेश गोयल जेट एयरवेज स्कैम मनी लॉन्ड्रिंग' मामले में केनरा बैंक मुंबई के खाते में 5 लाख रुपये जमा हुए हैं और फरियादी का नाम मनी लॉन्ड्रिंग अपराध से जुड़ा है। फरियादी को डराया गया कि अपराध से जुड़ने की जांच के लिए 40 दिन की अदालत रिमांड में उसकी गिरफ्तारी होगी और अगर उसने किसी को यह बात बताई तो यह देशविरोधी काम माना जाएगा। उसे यह भी कहा गया कि अगर वह सहयोग करेगा तो दिल्ली नहीं बुलाया जाएगा और ऑनलाइन कोर्ट में पेशी देनी होगी।

फरियादी का विश्वास जीतने के लिए आरोपियों ने नकली कोर्ट रूम बनाकर ऑनलाइन सुनवाई करवाई। फरियादी को यह दिखाने के लिए कि केस अदालत में चल रहा है, उसे चीफ जस्टिस का फर्जी लेटर भी भेजा गया, जिसमें लिखा था- “GOVERNMENTAL AFFAIRS, MINISTRY OF FINANCE - DEPT. OF REVENUE, SUPREME COURT OF INDIA, 'Hon'ble Justice Bhushan Ramkrishna Gavai, The Chief Justice of India”

शेयर बिकवाए गए और पैसों की ठगी की

फरियादी से जानकारी लेकर उसके शेयर बिकवाए गए और पैसों की ठगी की गई। कुल 8.5 करोड़ रुपये 7 अलग-अलग बैंक खातों में आरटीजीएस के जरिए ट्रांसफर करवाए गए। 27 जुलाई से 12 अगस्त के बीच बार-बार व्हाट्सएप कॉल किए गए। आरोपियों ने झूठ बोला कि जांच पूरी होने के बाद पैसे वापस कर दिए जाएंगे और इसी तरह पैसे हथिया लिए। फरियादी के ट्रांजैक्शन्स में से एक 80 लाख रुपये का था जो 'बालाजी खीरू एंड फास्ट फूड' के नाम से था। जांच में पता चला कि यह खाता पप्पू सिंह का है और उसकी गिरफ्तारी की गई। पप्पू सिंह नारोल का रहने वाला है और मूल रूप से राजस्थान का है।

दो अन्य आरोपी भी गिरफ्त में

पप्पू को पकड़ने के बाद अन्य दो आरोपी भी गिरफ्त में आ गए। आसिफ शाह, जो अमरेली का रहने वाला है, और विकास कुमार, जो उत्तर प्रदेश का रहने वाला है। आरोपियों से 32 मोबाइल फोन, 2 लैपटॉप, 1 पेटीएम स्वाइप मशीन, 6 बैंक चेकबुक, 2 पासबुक, 21 डेबिट-क्रेडिट कार्ड, 6 स्टाम्प और 5 पेनड्राइव जब्त किए गए। जिन मोबाइल फोन से कॉल किए जाते थे, उनमें एक ही समय पर 272 सिम सक्रिय थे। ये फोन सिर्फ व्हाट्सएप ओटीपी लेने के लिए उपयोग होते थे।

आरोपी आसिफ बैंक खातों को कमीशन के लिए किराए पर देता था। आरोपी विकास ने आसिफ से करोड़ों रुपये की लिमिट वाला खाता ढूंढने को कहा था। 24 जुलाई को विकास ने पप्पू सिंह के खाते के दस्तावेज आसिफ को भेजे। बताया गया कि पप्पू सिंह के खाते में 5 करोड़ की लिमिट है। विकास ने टेलीग्राम पर @alexmontiraj को सारी जानकारी भेजी। मोंटी कसीनो गेमिंग के पैसों का लेन-देन करता था और बैंक खातों को ऑपरेट करने पर 2% कमीशन देता था। विकास ने मोंटी को पप्पू सिंह के खाते की डिटेल दी। मोंटी ने 'अम्मा पे' नाम का एप लिंक भेजा जिसे पप्पू के मोबाइल में खोलना था। पप्पू ने लिंक खोलते ही उसके मोबाइल के सारे संदेश और ओटीपी फॉरवर्ड हो गए और खाते में 80 लाख रुपये ट्रांसफर हो गए। फिलहाल पप्पू सिंह, आसिफ और विकास को गिरफ्तार किया गया है। मोंटी की तलाश जारी है और शुरुआती जानकारी के अनुसार मोंटी के ऊपर कंबोडिया का कोई गैंग हो सकता है।

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