1. Hindi News
  2. गुजरात
  3. चिड़ियाघरों में जीवित भैंसों का वध, सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के आदेश में दखल से किया इनकार, जानिए पूरा मामला

चिड़ियाघरों में जीवित भैंसों का वध, सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के आदेश में दखल से किया इनकार, जानिए पूरा मामला

 Published : May 18, 2026 07:17 pm IST,  Updated : May 18, 2026 07:26 pm IST

गुजरात के दो चिड़ियाघरों में जीवित भैंसों का वध किया जाता है। एक एनजीओ ने इस मामले में कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। जो कि अब हाई कोर्ट से होते हुए ये मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया।

सांकेतिक तस्वीर- India TV Hindi
सांकेतिक तस्वीर Image Source : PIXABAY

सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात के दो चिड़ियाघरों में जंगली जानवरों को खिलाने के लिए परिसर के भीतर भैंसों के वध को चुनौती देने वाली एक जनहित याचिका खारिज करने के हाई कोर्ट के आदेश में हस्तक्षेप करने से सोमवार को इनकार कर दिया। न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने कहा कि पशु का वध किसी वाणिज्यिक या व्यक्तिगत उद्देश्य के लिए नहीं किया जा रहा है। पीठ ने यह टिप्पणी याचिकाकर्ता एनजीओ 'एनिमल वेलफेयर फाउंडेशन' द्वारा यह दलील देने के बाद की कि चिड़ियाघर परिसर में पशुओं का वध बूचड़खाना संचालित करने के समान है और कानूनों का अनुपालन आवश्यक है। 

चिड़ियाघर का प्रबंधन जैसा वे चाहें, करने दें

न्यायमूर्ति मेहता ने कहा, 'ये सभी नियम बूचड़ख़ानों के लिए हैं, जहां वध मानव उपभोग या वाणिज्यिक उद्देश्य से किया जाता है। उन्हें चिड़ियाघर का प्रबंधन जैसा वे चाहें, करने दें…।' याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता निखिल गोयल ने दलील दी कि भले ही यह वध गैर-वाणिज्यिक उद्देश्य के लिए हो, फिर भी चिड़ियाघर परिसर में पशुओं के वध का नियमन आवश्यक है। 

देश में कहीं भी ऐसी प्रथा नहीं 

उन्होंने कहा, 'चिड़ियाघर परिसर में किसी भी पशु का वध नियंत्रित होना चाहिए। केवल इसलिए कि यह गैर-वाणिज्यिक उद्देश्य से किया जा रहा है, नियम समाप्त नहीं हो जाते। देश में कहीं भी ऐसी प्रथा नहीं है।' गोयल ने सुप्रीम कोर्ट के 2017 के कॉमन कॉज बनाम भारत संघ के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि उस मामले में दिए गए निर्देशों के बाद सरकार ने वध-पूर्व, वध और वध-उपरांत चरणों से जुड़े 24 नियमों की पहचान की थी। 

जीवित भैंसों का चिड़ियाघर में होता है वध

उन्होंने दलील दी कि 24 नियमों में से केवल एक नियम ही लागू नहीं हो सकता, क्योंकि मांस मानव उपभोग के लिए नहीं है, लेकिन शेष सभी नियम अब भी लागू होंगे। गोयल ने कहा कि भारत के अन्य चिड़ियाघरों में प्रसंस्कृत मांस या भोजन की आपूर्ति के लिए निविदाएं जारी की जाती हैं, जबकि गुजरात के इन दो चिड़ियाघरों में जीवित भैंसों को परिसर में लाकर उनका वध किया जाता है और फिर उसका उपयोग कैद में रखे गए जंगली जानवरों को खिलाने के लिए किया जाता है। 

प्रदूषण और जल पर पड़ता है प्रभाव 

उन्होंने कहा, 'जब किसी पशु का वध होता है तो प्रदूषण और जल पर प्रभाव पड़ता है… यह केवल गुजरात के इन दो चिड़ियाघरों में होता है, जहां जीवित पशुओं को लाकर परिसर में ही उनका वध किया जाता है और फिर उपयोगी भाग निकालकर बाकी हटा दिया जाता है।' 

अदालत इस दलील से सहमत नहीं- जज विक्रम नाथ

उन्होंने यह भी दलील दी कि चिड़ियाघर परिसर में पशुओं का वध बूचड़खाना संचालन के समान है और इसलिए कानूनों का अनुपालन जरूरी है, जिसमें पशु क्रूरता निवारण अधिनियम और लाइसेंसिंग आवश्यकताएं शामिल हैं। न्यायमूर्ति विक्रम नाथ ने कहा कि अदालत इस दलील से सहमत नहीं है। 

जब हाई कोर्ट ने खारिज की थी NGO की याचिका

गत 29 जनवरी को गुजरात हाई कोर्ट ने जूनागढ़ के सक्करबाग प्राणी उद्यान परिसर में टेंडर प्रक्रिया के माध्यम से नियुक्त ठेकेदार द्वारा भैंसों के प्रबंधन और वध को चुनौती देने वाली एनजीओ की जनहित याचिका खारिज कर दी थी। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया था कि चिड़ियाघर में कोई मान्यता प्राप्त बूचड़खाना नहीं है और पशुओं का वध अवैध एवं अनियमित तरीके से किया जा रहा है। 

कोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि चिड़ियाघर प्राधिकारियों ने कानूनी नोटिस के जवाब में बताया था कि चिड़ियाघर का संचालन वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 तथा केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण द्वारा बनाए गए नियमों के तहत होता है। चिड़ियाघर प्राधिकरण ने हाई कोर्ट में यह भी कहा था कि खाद्य सुरक्षा एवं मानक नियम, 2011 इस मामले में लागू नहीं होते क्योंकि मांस मानव या वाणिज्यिक उपभोग के लिए नहीं है।

ये भी पढ़ें: 

ट्रंप की धमकी के बाद ईरान के न्यूज एंकर्स ने हाथ में उठाई AK-47, आम जनता को LIVE दी जा रही हथियार चलाने की ट्रेनिंग

राज्यसभा चुनाव: मध्य प्रदेश, राजस्थान से 1 और कनार्टक से कांग्रेस को मिलेंगी 3 सीट, झारखंड से भी 1 सीट का अनुमान

 
 
 
 

 

Advertisement

India TV हिंदी न्यूज़ के साथ रहें हर दिन अपडेट, पाएं देश और दुनिया की हर बड़ी खबर। गुजरात से जुड़ी लेटेस्ट खबरों के लिए अभी विज़िट करें।