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क्या बच्चों को भी हो सकता है गठिया? जानें जुवेनिइल आर्थराइटिस के लक्षण

 Written By: Ritu Raj
 Published : Oct 21, 2026 10:56 pm IST,  Updated : Oct 21, 2026 10:56 pm IST

गठिया केवल वयस्कों या बुजुर्गों को ही नहीं, बल्कि बच्चों को भी हो सकता है। लेकिन सवाल ये है कि इसके लक्षण क्या होते हैं और कारण क्या है। यहां जान लें।

क्या बच्चों को भी हो सकता है गठिया? जानें जुवेनिइल आर्थराइटिस के लक्षण- India TV Hindi
क्या बच्चों को भी हो सकता है गठिया? जानें जुवेनिइल आर्थराइटिस के लक्षण Image Source : MAGNIFIC

गठिया यानी आर्थराइटिस को आमतौर पर बढ़ती उम्र से जुड़ी बीमारी माना जाता है, लेकिन यह बच्चों को भी प्रभावित कर सकती है। बच्चों में होने वाले गठिया के सबसे प्रमुख प्रकारों में से एक है जुवेनाइल इडियोपैथिक आर्थराइटिस जो 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों में होने वाला एक प्रकार है। इसमें शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली जोड़ों में सूजन पैदा करने लगती है, जिससे दर्द, अकड़न और चलने-फिरने में परेशानी हो सकती है। ऐसे में डॉ. बिमलेश धर पांडे, निदेशक, रूमेटोलॉजी, फोर्टिस, नोएडा बता रहे हैं इसके लक्षण। 

बच्चों में गठिया के लक्षण क्या हैं

बच्चों में गठिया के लक्षण अक्सर सामान्य दर्द समझकर नजरअंदाज कर दिए जाते हैं। यदि किसी बच्चे को सुबह उठने पर जोड़ों में अकड़न, घुटनों या टखनों में सूजन, लगातार दर्द, लंगड़ाकर चलना या हाथ-पैर हिलाने में परेशानी हो रही है, तो इन लक्षणों पर ध्यान देना जरूरी है। छोटे बच्चे हमेशा अपने दर्द को शब्दों में व्यक्त नहीं कर पाते। ऐसे में माता-पिता को बच्चे की एक्टिविटी में बदलाव, खेलने में रुचि कम होने या बार-बार गोद में उठाए जाने की मांग जैसे संकेतों पर भी ध्यान देना चाहिए।

बच्चों में गठिया के कारण
बच्चों में गठिया का कोई एक निश्चित कारण नहीं है। जुवेनाइल इडियोपैथिक आर्थराइटिस में आनुवंशिक और प्रतिरक्षा प्रणाली से जुड़े कारक भूमिका निभा सकते हैं। यह जरूरी नहीं कि बच्चे को गठिया केवल परिवार में किसी सदस्य को यह बीमारी होने के कारण ही हो। समय पर पहचान और उपचार बेहद महत्वपूर्ण हैं। यदि जोड़ों में सूजन या अकड़न लंबे समय तक बनी रहती है, तो बाल रोग विशेषज्ञ या पीडियाट्रिक रूमेटोलॉजिस्ट से संपर्क करना जरूरी है। बचाव के लिए बच्चे के लक्षणों, शारीरिक जांच और जरूरत पड़ने पर ब्लड टेस्ट तथा इमेजिंग की मदद ली जाती है। इसके उपचार में दवाएं, फिजियोथेरेपी और नियमित निगरानी शामिल हो सकती हैं। सही समय पर उपचार से सूजन को नियंत्रित करने, जोड़ों को नुकसान से बचाने और बच्चे की सामान्य वृद्धि एवं गतिविधियों को बनाए रखने में मदद मिल सकती है। बच्चों में लगातार जोड़ों के दर्द को केवल बढ़ती उम्र या खेलकूद का असर मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

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