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चीन की नई रिसर्च में खुलासा, हवा में भी घंटों जिंदा रहता है कोरोना, जानिए डॉक्टरों की राय

 Written By: India TV Lifestyle Desk
 Published : Apr 13, 2020 12:16 pm IST,  Updated : Apr 14, 2020 06:02 am IST

चीन के वुहान में कोरोना वायरस से संक्रमित मरीजों के वार्डों से हवा के नमूनों की जांच की गई। इस नई रिसर्च में सामने आया कि वायरस 13 फीट (चार मीटर) तक ट्रेवल कर सकता है और कई घंटे हवा में रह सकता है।

चीन के वुहान में फैले कोरोना वायरस का कहर पूरी दुनिया से अभी खत्म ही नहीं हुआ था कि एक नई रिचर्स समाने आ गई है। ये रिसर्च चीन की एकेडमी ऑफ साइंस ने की है और इसमें कहा गया है कि कोरोना वायरस हवा में भी कई घंटों तक जीवित रहता है। चीन की इस रिसर्च से दुनियाभर में चिंता की जा रही है। ऐसे में हर किसी के दिमाग में एक ही सवाल आ रहा है कि अगर यह हवा में इतनी देर तक जीवित रहता है तो फिर सोशल डिस्टेसिंग कितनी कारगर साबित होगी। इस सवाल का  इंडिया टीवी के खास शो में चीन- अमेरिका के डाक्टरों ने जवाब दिया है।  

क्या है नई रिसर्च?

चीन के वुहान में एक रिचर्स की गई। इस रिसर्च में हूशेनशान हॉस्पिटल में 19 फरवरी से 2 मार्च के बीच जनरल वार्ड और आईसीयू से सैंपल लिए गए। आईसीयू की हवा से 40 सैंपल लिए गए। इस सैंपल में से 14 में कोराना वायरस मौजूद थे। आईसीयू की हवा में लिए गए सैंपल में 35 प्रतिशत कोरोना पॉजिटिव मिले। 

इस रिसर्च में सामने आया कि कोरोना वायरस मरीज के बिस्तर, डस्टबिन, माउस, स्वास्थ्य कर्मचारियों के जूते, दरवाजों आदि में मौजूद थे। इतना ही नहीं यह वायरस  13 फीट यानी 4 मीटर की दूरी तक पाया गया। इसके साथ ही यह हवा में कई घंटो तक जिंदा रहता है। यह रिसर्च एयरोसोल की धारणा पर आधारित है।

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क्या है एयरोसोल?
एयरोसोल से ही कोरोना का मूवमेंट होता है। इसका साइज करीब 5 मिलीमाइक्रोमीटर है जोकि बहुत ही बारीक पार्टिकल है। आपको बता दें कि एयरोसेल हवा में करीब 30 मिनट तक जिंदा रहता है। 
  
चीन से डॉक्टर संजीव चौबे के अनुसार वुहान से आई रिसर्च के अनुसार यह वायरस 13 फीट यानी 4 मीटर की दूरी तक रह सकता है। इसके साथ-साथ कई घंटों तक हवा में जिंदा रह सकता है।  वहीं यह सरफेस में अलग-अलग तरीके से बिहेव करता है। जिसके कारण अब हमें और ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत है। घरों में रहना आपके लिए काफी सुरक्षित होगा। रोजाना कोरोना वायरस  को लेकर कई रिसर्च की जा रही हैं। जिसके कारण हर एक दिन इस वायरस के बारे में कुछ न कुछ नया देखने को मिल रहा है। ऐसे में पूरी तरह इस वायरस को समझ पाना मुश्किल है। इसलिए आपके पास इससे बचने का एक ही रास्ता है कि आप सोशल डिस्टेसिंग का ध्यान रखें। अभी भारत में जो नियम फॉलो कर रहे हैं वहीं काफी है। इसमें अचानक से बदलाव करने से जनता पैनिक हो सकती हैं। 

अमेरिका से डॉक्टर सुरेंद्र पुरोहित के अनुसार, वुहान से जो रिसर्च आई है वो एक हॉस्पिटल की है। जहां पर कोरोना वायरस से संक्रमित मरीजों को रखा जाता था। जिससे पता चला कि यह 4 मीटर तक फैलता है। इसके साथ ही यह सबसे ज्यादा माउस, जूते और दरवाजों, डस्टबिन आदि में फैलता है। इस रिसर्च के अनुसार यह बात साफ हो गई है कि वायरस संक्रमित व्यक्ति के आसपास ज्यादा देर तक जीवित रहता है। 

एम्स की डॉक्टर पद्मा श्रीवास्तव के अनुसार, भारत में लोगों को इसके प्रति ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत है क्योंकि यह अलग-अलग सरफेस में अलग-अलग समय तक जिंदा रहता है। इसलिए खुद का ख्याल रखने के साथ-साथ सफाई का पूरा ध्यान रखें। 

डॉक्टर एम के सेन ने कहा कि इस रिसर्च में सामने आया कि जूतों में भी कोरोना पॉजिटिव निकला है। यह जूते उन डॉक्टर्स और स्वास्थ्य कर्मियों के है जो मरीजों के साथ रहे हैं।  एरोसोल 5 मिलीमाइक्रोमीटर तक रहता है जो किसी मरीज के आसपास ही होते है। वहीं अगर कोई व्यक्ति छींकता या खांसता है तो उसकी बूंदे  1 मीटर के अंदर रहती है। उस समय एयरोसेल 10-20 मिलीमाइक्रोमीटर  होते है। 

 

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