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डायबिटिक फुट के घाव को मामूली ड्रेसिंग समझना पड़ सकता है भारी, एंडोक्राइनोलॉजिस्ट से जानें क्यों जरूरी है समय पर इलाज?

 Written By: Poonam Yadav
 Published : Aug 05, 2026 04:09 pm IST,  Updated : Aug 05, 2026 04:09 pm IST

डायबिटिक फुट के घाव को मामूली समस्या समझकर नजरअंदाज करना गंभीर हो सकता है। एंडोक्राइनोलॉजिस्ट बताते हैं कि समय पर जांच, सही ड्रेसिंग और इलाज से इन जटिलताओं से बचा जा सकता है

डायबिटिक फुट के घाव का समय पर इलाज- India TV Hindi
डायबिटिक फुट के घाव का समय पर इलाज Image Source : MAGNIFIC

डायबिटीज के मरीजों के पैरों में छोटा सा छाला, जूते की रगड़ या त्वचा में हल्की सी दरार भी सामान्य घाव नहीं मानी जानी चाहिए। पुणे स्थित इनामदार मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल में एंडोक्रिनोलॉजिस्ट और डायबेटोलॉजिस्ट डॉ. सादिक मुल्ला कहते हैं कि लंबे समय तक ब्लड शुगर बढ़ी रहने से पैरों की नसों को नुकसान हो सकता है। इस स्थिति में दर्द, गर्मी, ठंड या चोट का एहसास कम होने लगता है। इसलिए घाव धीरे-धीरे बढ़ता रहता है, लेकिन मरीज को ज्यादा दर्द महसूस नहीं होता।

डायबिटीज के मरीजों में घाव जल्दी क्यों नहीं भरता?

डायबिटीज पैरों में खून के बहाव को भी कम कर सकती है। जब घाव तक सही मात्रा में खून नहीं पहुंचता, तो ऑक्सीजन, पोषण और शरीर की बीमारी से लड़ने वाले तत्व भी कम पहुंच पाते हैं। इसी वजह से डायबिटीज के मरीजों में घाव जल्दी नहीं भरता और उसमें संक्रमण तेजी से फैल सकता है। ऐसे मामलों में केवल रोज ड्रेसिंग करवाना काफी नहीं होता।

जांच से पता चलता है कितना घाव है कितना गहरा

डॉक्टर घाव का आकार देखने के साथ यह भी जांचते हैं कि वह कितना गहरा है, उसमें मवाद है या नहीं, बदबू आ रही है या नहीं, आसपास सूजन या लालपन है या नहीं, पैर में खून का बहाव कैसा है और एहसास ठीक है या नहीं। कई बार संक्रमण त्वचा और मांसपेशियों से आगे बढ़कर हड्डी तक पहुंच सकता है। ऐसी स्थिति में खून की जांच, एक्स-रे, एमआरआई या घाव से सैंपल लेकर जांच की जा सकती है।

इलाज में घाव के मृत या खराब हिस्से को हटाना, घाव पर पड़ने वाला दबाव कम करना, ब्लड शुगर को नियंत्रण में रखना और पैर में सही मात्रा में खून का बहाव बनाए रखना जरूरी होता है। अगर संक्रमण है, तो उसकी गंभीरता के अनुसार एंटीबायोटिक दवाएं दी जाती हैं। कुछ मामलों में, जब पैर में खून का बहाव बहुत कम हो जाता है, तब खून की नसों के विशेषज्ञ की सलाह और एंजियोप्लास्टी जैसी प्रक्रिया की जरूरत पड़ सकती है।

कब हो जाना चाहिए सावधान?

अगर घाव के आसपास सूजन बढ़ रही हो, मवाद या बदबू आ रही हो, त्वचा काली पड़ने लगे, बुखार आए, घाव गहरा होता जाए या ब्लड शुगर अचानक बढ़ जाए, तो इसे गंभीर चेतावनी माना जाना चाहिए। ऐसे समय में घरेलू नुस्खों, खुद से दवा लेने या केवल ड्रेसिंग के भरोसे रहना नुकसानदायक हो सकता है।

Disclaimer: (इस आर्टिकल में सुझाए गए टिप्स केवल आम जानकारी के लिए हैं। सेहत से जुड़े किसी भी तरह का फिटनेस प्रोग्राम शुरू करने अथवा अपनी डाइट में किसी भी तरह का बदलाव करने या किसी भी बीमारी से संबंधित कोई भी उपाय करने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें। इंडिया टीवी किसी भी प्रकार के दावे की प्रामाणिकता की पुष्टि नहीं करता है)

 
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