शराब का सेवन हमारे स्वास्थ्य के लिए बेहद हानिकारक माना जाता है, और इसका सबसे गंभीर असर सीधे तौर पर लिवर पर पड़ता है। यह वैज्ञानिक रूप से सिद्ध है कि नियमित रूप से शराब पीने से लिवर डैमेज होता है, लेकिन एक आम सवाल यह पूछा जाता है कि शराब पीने के ठीक कितने साल बाद लिवर खराब होता है? डॉ. रमेश गर्ग सीनियर डायरेक्टर और HOD, गैस्ट्रोएंटरोलॉजी, फोर्टिस, शालीमार बाग बता रहे हैं इस सवाल का जवाब।
क्या कहते हैं डॉक्टर
शराब का सेवन लिवर को कितनी जल्दी नुकसान पहुंचा सकता है, इसका कोई निश्चित समय या साल तय नहीं है। यह व्यक्ति की शराब पीने की मात्रा, सेवन का तरीका, उम्र, जेनेटिक फैक्टर, खानपान और पहले से मौजूद स्वास्थ्य स्थितियों पर निर्भर करता है। कुछ लोगों में लगातार शराब पीने के कुछ वर्षों के भीतर ही लिवर में फैट जमा होने लगता है, जबकि कुछ में लंबे समय तक शराब का सेवन करने के बाद भी गंभीर नुकसान के लक्षण दिखाई देते हैं। शराब से होने वाली लिवर की बीमारी आमतौर पर तीन चरणों में विकसित हो सकती है। पहला चरण अल्कोहलिक फैटी लिवर है, जिसमें लिवर की कोशिकाओं में फैट जमा होने लगता है। यह शुरुआती स्थिति है और शराब छोड़ने पर अक्सर ठीक हो सकती है। दूसरा चरण अल्कोहलिक हेपेटाइटिस है, जिसमें लिवर में सूजन और कोशिकाओं को नुकसान पहुंचता है। तीसरा और गंभीर चरण लिवर सिरोसिस है, जिसमें लिवर के स्वस्थ ऊतकों की जगह स्थायी निशान यानी फाइब्रोसिस बनने लगते हैं और लिवर की कार्यक्षमता प्रभावित होती है।
यह समझना जरूरी है कि लिवर की बीमारी शुरुआती चरणों में अक्सर बिना किसी स्पष्ट लक्षण के विकसित होती रहती है। थकान, भूख कम लगना, पेट में सूजन, आंखों और त्वचा का पीला पड़ना, पैरों में सूजन तथा पेशाब का रंग गहरा होना इसके संभावित संकेत हो सकते हैं। हालांकि, लक्षणों का इंतजार करना सही नहीं है। जो लोग नियमित रूप से शराब का सेवन करते हैं, उन्हें समय-समय पर लिवर फंक्शन टेस्ट (LFT), अल्ट्रासाउंड और डॉक्टर की सलाह पर फाइब्रोस्कैन जैसी जांच करवानी चाहिए। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि शराब की कोई भी मात्रा लिवर के लिए पूरी तरह सुरक्षित नहीं मानी जा सकती। लिवर को गंभीर नुकसान से बचाने का सबसे प्रभावी तरीका शराब का सेवन बंद करना है। यदि लिवर की बीमारी का पता चल चुका है, तो जल्द से जल्द हेपेटोलॉजिस्ट से संपर्क करना चाहिए।