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स्वाइन फ्लू का आयुर्वेद से प्राकृतिक इलाज कैसे करें, डॉक्टर ने बताया कौन सी जड़ी बूटी हैं असरदार

 Written By: Bharti Singh
 Published : Sep 03, 2026 11:54 am IST,  Updated : Sep 03, 2026 11:54 am IST

इन दिनों स्वाइन फ्लू के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। शरीर को बीमारी से बचाने के लिए आयुर्वेद में खास जड़ी बूटियों का इस्तेमाल करने की सलाह दी जाती है जिससे रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत हो और आप खुद को बीमारियों से सुरक्षित रख पाएं। आयुर्वेदिक डॉक्टर ने बताए फ्लू से निपटने के लिए क्या करें।

आयुर्वेदिक उपचार- India TV Hindi
आयुर्वेदिक उपचार Image Source : INDIA TV

स्वाइन फ्लू सांस से जुड़ी बीमारी है, जो इन्फ्लुएंजा A (H1N1) वायरस की वजह से होती है। स्वाइन फ्लू के लक्षण सामान्य फ्लू जैसे हो सकते हैं। इनमें बुखार, खांसी, गले में खराश, शरीर में दर्द, सिरदर्द, ठंड लगना और थकान शामिल हैं। हालांकि हर मरीज को बुखार हो ऐसा जरूरी नहीं है।

आयुर्वेद में स्वाइन फ्लू जैसी बीमारियों का इलाज कैसे किया जाता है?

आशा आयुर्वेद की डॉक्टर चंचल शर्मा के अनुसार आयुर्वेद में इलाज का उद्देश्य केवल बीमारी के लक्षणों को दबाना नहीं, बल्कि शरीर की प्राकृतिक क्षमता और इम्युनिटी को बेहतर करना होता है। आयुर्वेद प्राकृतिक और ओवरऑल ट्रीटमेंट पर ध्यान देता है। हालांकि H1N1 एक वायरल संक्रमण है और गंभीर मामलों में केवल घरेलू या आयुर्वेदिक उपाय काफी नहीं हो सकते हैं। लेकिन हैवी दवाओं के साइड इफेक्ट्स को कम करने और शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करने में कुछ हर्बल दवाओं और जड़ी बूटियों का इस्तेमाल मददगार साबित हो सकता है।

आयुर्वेद केवल बुखार या खांसी जैसे लक्षणों पर ध्यान देने के बजाय शरीर की पूरी स्थिति पर ध्यान देने की बात करता है। जिसमें खाना पीना, नींद, तनाव और रोजाना की लाइफस्टाइल में सुधार पर जोर दिया जाता है। आयुर्वेद में H1N1 जैसी बीमारी और उसके लक्षणों में कुछ जड़ी-बूटियों और खाद्य पदार्थों का इस्तेमाल फायदेमंद साबित हो सकता है। 

स्वाइन फ्लू से लड़ने के आयुर्वेदिक और प्राकृतिक उपाय 

गिलोय- आयुर्वेद में बुखार आने पर गिलोय का इस्तेमाल करने की सलाह दी जाती है। गिलोय का इस्तेमाल इम्युनिटी बढ़ाने के लिए किया जाता है। जिससे शरीर बीमारियों से लड़ पाता है।

तुलसी- फ्लू होने पर गले और सांस से जुड़ी तकलीफ होती है। इसमें आप तुलसी का इस्तेमाल कर सकते हैं। तुलसी का सेवन करने से गले की परेशानी दूर होती हैं और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है।

हल्दी- इसमें एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण पाए जाते हैं और इसे सूजन कम करने वाली डाइट का हिस्सा माना जाता है। हल्दी का सेवन शरीर की रोगों से लड़ने की शक्ति को बढ़ाता है।

अदरक- इसमें एंटीऑक्सीडेंट और सूजन कम करने वाले गुण पाए जाते हैं। इसे गले की परेशानी और पाचन के लिए भी पारंपरिक रूप से इस्तेमाल किया जाता है।

इसके अलावा हल्दी, अदरक, लहसुन और विटामिन-C से भरपूर खट्टे फलों को भी डाइट में शामिल करना चाहिए। इस मौसम में गुनगुने पानी का सेवन करें। 

  • रोजाना एक नियमित दिनचर्या रखें।
  • पौष्टिक और संतुलित भोजन करें।
  • धूम्रपान और शराब से बचें।
  • पर्याप्त नींद और आराम लें।
  • शरीर को हाइड्रेट रखें।
  • बीमारी के दौरान पर्याप्त आराम करें।
  • तनाव और मानसिक स्वास्थ्य
  • जीवनशैली में बदलाव
  • पौष्टिक और संतुलित भोजन करें।
  • धूम्रपान और शराब से बचें।
  • पर्याप्त नींद और आराम लें।
  • शरीर को हाइड्रेट रखें।
  • बीमारी के दौरान पर्याप्त आराम करें।
  • तनाव और मानसिक स्वास्थ्य।
  • रोजाना 5–10 मिनट ध्यान कर सकते हैं।
  • डॉक्टर की सलाह के अनुसार हल्की योग और सांस से जुड़ी एक्सरसाइज कर सकते हैं।
  • पर्याप्त आराम लें और तनाव कम करने की कोशिश करें।

पंचकर्म और सांस से जुड़ी समस्याएं

आशा आयुर्वेद के अनुसार, पंचकर्म शरीर को अंदर से शुद्ध करने और स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। सांस से जुड़ी समस्याओं में भी कुछ आयुर्वेदिक प्रक्रियाओं का इस्तेमाल किया जाता है। हालांकि H1N1 जैसे सक्रिय वायरल संक्रमण के दौरान पंचकर्म या किसी भी विशेष प्रक्रिया को बिना योग्य डॉक्टर की सलाह के नहीं करवाना चाहिए।

ध्यान दें- इन चीजों से H1N1 वायरस खत्म होने या स्वाइन फ्लू ठीक होने का पक्का वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इन्हें डॉक्टर के इलाज का विकल्प नहीं समझना चाहिए।

Disclaimer: (इस आर्टिकल में सुझाए गए टिप्स केवल आम जानकारी के लिए हैं। सेहत से जुड़े किसी भी तरह का फिटनेस प्रोग्राम शुरू करने अथवा अपनी डाइट में किसी भी तरह का बदलाव करने या किसी भी बीमारी से संबंधित कोई भी उपाय करने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें। इंडिया टीवी किसी भी प्रकार के दावे की प्रामाणिकता की पुष्टि नहीं करता है।)

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