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प्रदूषण का दिमाग पर हो रहा है असर, बढ़ रहा है ब्रेन स्ट्रोक का खतरा, स्वामी रामदेव से जानें बचने के उपाय

 Written By: Bharti Singh @bhartinisheeth
 Published : Oct 31, 2025 12:21 pm IST,  Updated : Oct 31, 2025 12:21 pm IST

Pollution Cause Of Brain Stroke: बढ़ते प्रदूषण से ब्रेन स्ट्रोक का खतरा भी तेजी से बढ़ रहा है। दिल्ली में हर साल ब्रेन स्ट्रोक के 30 हज़ार से ज़्यादा मामले रिपोर्ट होते हैं। जिसमें हर 3 में से 1 केस में मरीज़ की मौत हो जाती है। स्वामी रामदेव से जानिए ब्रेन स्ट्रोक के खतरे को कैसे दूर करें।

प्रदूषण से ब्रेन स्ट्रोक का खतरा - India TV Hindi
प्रदूषण से ब्रेन स्ट्रोक का खतरा Image Source : FREEPIK

तेज़ रफ्तार जान ले भी सकती है और जान बचा भी सकती है, लेकिन आज हम जिस स्पीड की बात कर रहे हैं वो ब्रेन स्ट्रोक से जान बचाएगी। मेरी मानिए और इस FAST शब्द को ज़हन में बिठा लीजिए। क्योंकि इसका मतलब अगर आप समझ गए तो ना जाने कितने लोगों की जान बच सकती है। जी हां, पहले इस शब्द का मतलब समझिए इसमें F मतलब FACE, किसी के चेहरे का एक हिस्सा अगर लटकने लगे, A मतलब ARM किसी का हाथ सुन्न होने लगे, S यानि SPEECH किसी की ज़ुबान लड़खड़ाने लगे, अगर इनमें से कोई भी लक्षण नज़र आए तो T यानि TIME ना वेस्ट करें और तुरंत अस्पताल पहुंचे।

क्योंकि ये सारे लक्षण ब्रेन स्ट्रोक के है। अगर आपने ये लक्षण पहचानकर तुरंत एक्शन लिया तो मरीज़ की जान बच सकती है। क्योंकि स्टडी कहती है कि ब्रेन स्ट्रोक आने पर शुरुआती साढ़े 4 घंटे Golden Hours होते हैं। इस वक्त प्रदूषण का जो हाल है उसे देखते हुए तो लापरवाही बिल्कुल नहीं होनी चाहिए। स्टडी बताती है कि पॉल्यूशन से ब्रेन स्ट्रोक के चांसेस बढ़ते हैं। अब दिल्ली को ही लीजिए आबादी करीब ढाई करोड़ है और हर साल ब्रेन स्ट्रोक के 30 हज़ार से ज़्यादा मामले रिपोर्ट होते हैं। हर 3 में से 1 केस में मरीज़ की मौत हो जाती है। 

ब्रेन स्ट्रोक का खतरा 

रिसर्च बता रही है कि ट्रैफिक के पॉल्यूशन में सिर्फ 2 घंटे के अंदर ही दिमाग की एक्टिविटी पर असर पड़ता है और वैसे भी ठंड में तो स्ट्रोक के मामले 25% तक बढ़ जाते हैं। इसके अलावा एक और बड़ी वजह है लाइफस्टाइल में हो रही गलतियां भी हैं। पराली जलाना भी तो गलती में ही गिना जाएगा, लेकिन इसका दिल-दिमाग से लेकर फेंफड़ों तक पर जो असर पड़ रहा है। उसे कोई समझे या ना समझे दिल्ली एनसीआर में रहने वाले लोग जरूर समझ रहे हैं। ऐसे में स्वामी रामदेव से जानिए प्रदूषण में दिमाग को कैसे स्वस्थ रखें औ दिमाग को दुरुस्त बनाएं?

ब्रेन स्ट्रोक आने पर लक्षण

  • तेज़ सिरदर्द और चक्कर
  • देखने में दिक्कत 
  • चेहरा टेढ़ा
  • हाथ-पैर सुन्न

दो तरह के ब्रेन स्ट्रोक- जिसमें क है इस्कीमिक, इसमें ब्रेन में ब्लड क्लॉटिंग से खून की सप्लाई रुक जाती है। 85% केस इसी वजह से आते हैं। दूसरा है हेमरेजिक, इसमें दिमाग की नस फटने से ब्लीडिंग होने लगते हैं। 15% मामले इस वजह से होते हैं।

ब्रेन स्ट्रोक का खतरा- जिन लोगों हाई ब्लड प्रेशर की समस्या रहती है उन्हें स्ट्रोक का खतरा 4 गुना ज्यादा रहता है। जो स्मोकर्स हैं उन्हें 2 गुना ज़्यादा स्ट्रोक का रिस्क रहता है। डायबिटिक और मोटापे से परेशान लोगों को 2 गुना ज़्यादा स्ट्रोक के चांस रहता है।

80% स्ट्रोक के मामले रुक सकेंगे

  1. बीपी कंट्रोल रखें
  2. सही-संतुलित खाना खाएं
  3. योग-एक्सरसाइज़ रोज करें
  4. धूम्रपान-एल्कोहल से बचें
  5. शुगर बैलेंस रखें
  6. तनाव ना बढ़ने दें

धुएं-स्मॉग का सेहत पर असर- गले में खराश, आंखों में जलन, कंजक्टिवाइटिस, नाक में खुजली, ज़ुकाम, सूखी खांसी, सीने मे चुभन, स्किन एलर्जी जैसी परेशानियां हो रही हैं।

प्रदूषण से बचने के लिए उपाय- बुजुर्ग, बच्चे, मरीज बाहर ना निकलें, घर से बाहर निकलने पर मास्क पहनें, घर में एयर प्यूरीफायर, खट्टी और ठंडी चीजें, सॉफ्ट ड्रिंक्स से बचें। न्यूट्रिशस फूड और आंवला खाएं, वक्त वक्त पर पानी पीते रहें, गले में खराश हो तो गरारे करें, नाक बंद हो तो सुबह में भाप लें।

ये 4 चीजें हैं प्रदूषण में असरदार

क्रैनबेरी- एंटीऑक्सीडेंटस से भरपूर स्किन एलर्जी रोकती है। इंफेक्शन से बचाती है इम्यूनिटी बढ़ाती है प्रदूषण का असर कम होता है।

अखरोट- घुटन से राहत मिलती है और फेंफड़ों के लिए रामबाण साबित होता है। गले-सीने की जकड़न साफ करने और चिड़चिड़ापन दूर करने में मदद मिलती है।

गुड़-  हीमोग्लोबिन बढ़ाता है और ब्लड में ऑक्सीजन बढ़ाता है। प्रदूषण का असर कम करता है।

नींबू- हाइड्रेटेड रखने में मदद मिलती है और बॉडी डिटॉक्स करने में कारगर साबित होती है।

Disclaimer: (इस आर्टिकल में सुझाए गए टिप्स केवल आम जानकारी के लिए हैं। सेहत से जुड़े किसी भी तरह का फिटनेस प्रोग्राम शुरू करने अथवा अपनी डाइट में किसी भी तरह का बदलाव करने या किसी भी बीमारी से संबंधित कोई भी उपाय करने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें। इंडिया टीवी किसी भी प्रकार के दावे की प्रामाणिकता की पुष्टि नहीं करता है।)

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