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बैठकर यूरिन करना चाहिए या खड़े होकर? फोर्टिस के यूरोलॉजिस्ट ने बताया सही तरीका

 Written By: Ritu Raj @rituraj141192
 Published : Jul 28, 2026 11:44 am IST,  Updated : Jul 28, 2026 11:44 am IST

बैठकर यूरिन करना सही है या खड़े होकर? यह सवाल सुनने में भले ही बहुत सामान्य लगे, लेकिन पुरुषों की सेहत और स्वच्छता के लिहाज से यह बेहद अहम है। ज़्यादातर पुरुष जल्दबाजी या आदत के कारण खड़े होकर पेशाब करते हैं, लेकिन सही तरीका क्या है। फोर्टिस के यूरोलॉजिस्ट से जानेंगे कि क्या है सही तरीका।

बैठकर यूरिन करना चाहिए या खड़े होकर? - India TV Hindi
बैठकर यूरिन करना चाहिए या खड़े होकर? Image Source : MAGNIFIC

यूरिनेशन एक बहुत कॉमन प्रोसेस है। इसके माध्यम से शरीर का कचरा बाहर निकल जाता है। आमतौर पर पुरुष खड़े होकर पेशाब करते हैं, लेकिन कुछ लोग बैठकर पेशाब करना पसंद करते हैं। लेकिन एक सवाल जो कई लोगों के मन में आता है वो है कि बैठकर यूरिन करना चाहिए या खड़े होकर। अगर आपके मन में भी ये सवाल तो ये आर्टिकल आपके लिए है। फोर्टिस के यूरोलॉजिस्ट डॉ. पंकज पवार बता रहे हैं कि बैठकर यूरिन करना चाहिए या खड़े होकर। चलिए जानते हैं। 

डॉ. पंकज पवार से जानें यूरिन करने का सही तरीका

यूरिन करने का सही तरीका सभी लोगों के लिए एक जैसा नहीं होता। यह व्यक्ति के लिंग,उम्र,स्वास्थ्य और शारीरिक स्थिति पर निर्भर करता है। यूरोलॉजिस्ट डॉ. पंकज पवार का मानना है कि सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि मूत्राशय बिना ज़ोर लगाए आराम से पूरी तरह खाली हो। केवल बैठकर या खड़े होकर यूरिन करने से कोई व्यक्ति स्वस्थ या अस्वस्थ नहीं होता। स्वस्थ पुरुष यदि खड़े होकर यूरिन करते हैं तो यह पूरी तरह सामान्य है और इसमें कोई समस्या नहीं है। लेकिन जिन पुरुषों को प्रोस्टेट बढ़ने,पेशाब करने में कठिनाई,कमजोर धार,बार-बार पेशाब आने या पेशाब के बाद भी मूत्राशय पूरी तरह खाली न होने का अहसास होता है,उनके लिए बैठकर यूरिन करना आरामदायक हो सकता है। बैठने की स्थिति में पेल्विक फ्लोर की मांसपेशियां ज्यादा रिलैक्स होती हैं, जिससे कुछ मरीजों में मूत्राशय बेहतर तरीके से खाली हो सकता है और ज़ोर लगाने की आवश्यकता कम पड़ती है। रात में बार-बार उठने वाले बुजुर्ग पुरुषों के लिए भी बैठकर यूरिन करना ज्यादा आरामदायक हो सकता है। 

भारतीय बनाम वेस्टर्न टॉयलेट
यूरोलॉजिस्ट डॉ. पंकज पवार बताते हैं कि भारतीय शौचालय में स्क्वाटिंग की स्थिति पेल्विक फ्लोर की मांसपेशियों को रिलैक्स करने में मदद करती है और कुछ लोगों में मूत्राशय बेहतर तरीके से खाली हो पाता है। हालांकि अभी तक ऐसे ठोस वैज्ञानिक प्रमाण नहीं मिले हैं जो यह साबित करें कि भारतीय शौचालय सभी लोगों के लिए वेस्टर्न कमोड से बेहतर है। मेरी राय में यदि किसी व्यक्ति को घुटनों,कमर या कूल्हों की समस्या नहीं है, तो भारतीय शौचालय का उपयोग पूरी तरह सुरक्षित है। वहीं बुजुर्गों, घुटनों के दर्द के मरीज, सर्जरी वाले लोगों के लिए वेस्टर्न कमोड ज्यादा बेहतर विकल्प हो सकता है।

यूरोलॉजिस्ट डॉ. पंकज पवार की राय
मेरे अनुभव में सबसे ज़रूरी बात यह नहीं है कि आप बैठकर यूरिन करते हैं, खड़े होकर या भारतीय शौचालय का उपयोग करते हैं। महत्वपूर्ण यह है कि पेशाब को कभी न रोकें, बिना ज़ोर लगाए आराम से मूत्राशय को पूरी तरह खाली करें और यदि पेशाब में दर्द,खून,बार-बार संक्रमण,कमजोर धार या बार-बार पेशाब आने जैसी समस्या हो तो इसे सामान्य मानकर न टालें। समय रहते यूरोलॉजिस्ट से सलाह लेना सबसे सही कदम हो सकता है।

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