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नींद में बड़बड़ाना, सिर्फ एक आम आदत या किसी गंभीर बीमारी का शुरुआती संकेत?

 Written By: Ritu Raj
 Published : Oct 09, 2026 03:28 pm IST,  Updated : Oct 09, 2026 03:28 pm IST

आपने नींद में बड़बड़ाते कई लोगों को देखा होगा। इसे कई लोग गंभीर बीमारी का संकेत मानते हैं लेकिन क्या सच में नींद में बड़बड़ाना किसी बीमारी का संकेत है या ये नॉर्मल बात है। चलिए जानते हैं क्या कहते हैं डॉक्टर।

नींद में बड़बड़ाना, सिर्फ एक आम आदत या किसी गंभीर बीमारी का शुरुआती संकेत?- India TV Hindi
नींद में बड़बड़ाना, सिर्फ एक आम आदत या किसी गंभीर बीमारी का शुरुआती संकेत? Image Source : MAGNIFIC

नींद में बोलना या बड़बड़ाना एक आम समस्या है, जिसे मेडिकल भाषा में ‘सोमनिलोकी’ कहा जाता है। इसमें व्यक्ति सोते समय कुछ शब्द बोल सकता है, अधूरे वाक्य कह सकता है या कभी-कभी जोर से चिल्ला भी सकता है। अक्सर व्यक्ति को सुबह उठने पर याद नहीं रहता कि उसने रात में क्या कहा था। आमतौर पर यह समस्या गंभीर नहीं होती, लेकिन यदि यह बार-बार हो या इसके साथ अन्य लक्षण दिखाई दें, तो इस पर ध्यान देना जरूरी है। डॉ. समीर भार्गव, मनोचिकित्सक, FMRI गुरुग्राम बता रहे कि ये नॉर्मल है या किसी बीमारी का संकेत। 

नींद में बड़बड़ाने के क्या कारण हो सकते हैं?

साइकेट्रिस्ट के अनुसार, नींद में बड़बड़ाने के पीछे कई कारण हो सकते हैं। मानसिक तनाव, चिंता, नींद की कमी और अनियमित डेली रूटीन इसके प्रमुख कारणों में शामिल हैं। जब व्यक्ति अधिक तनाव में होता है या किसी बात को लेकर लगातार सोचता रहता है, तो उसकी नींद प्रभावित हो सकती है। इसका असर कभी-कभी नींद के दौरान बोलने के रूप में भी दिखाई देता है। इसके अलावा, बुखार, कुछ दवाओं का असर, शराब का सेवन और नींद से जुड़ी अन्य समस्याएं भी इसका कारण बन सकती हैं। बच्चों में नींद के दौरान बड़बड़ाना सामान्य है और उम्र बढ़ने के साथ यह कम भी हो सकता है।
क्या यह किसी मानसिक बीमारी का संकेत है?

नींद में बड़बड़ाने का मतलब यह नहीं है कि व्यक्ति किसी मानसिक बीमारी से पीड़ित है। हालांकि, यदि इसके साथ लगातार चिंता, उदासी, चिड़चिड़ापन, डर या व्यवहार में बदलाव जैसे लक्षण दिखाई दें, तो मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह लेना सही है। कुछ मामलों में नींद में बोलना अन्य नींद संबंधी विकारों के साथ भी हो सकता है। उदाहरण के लिए, यदि व्यक्ति सोते समय चिल्लाता है, हाथ-पैर चलाता है, डरकर उठ जाता है या अपने सपनों के अनुसार शारीरिक गतिविधियाँ करता है, तो इसकी जाँच जरूरी हो सकती है। इसके अलावा, यदि खर्राटों के साथ साँस रुकने जैसी समस्या हो, तो स्लीप एपनिया की संभावना पर भी ध्यान देना चाहिए।

नींद में बड़बड़ाने से बचने के लिए क्या करें?
इस समस्या को कम करने के लिए रोजाना पर्याप्त नींद लेना और सोने-जागने का समय नियमित रखना जरूरी है। वयस्कों को आमतौर पर प्रतिदिन सात से नौ घंटे की नींद लेनी चाहिए। सोने से पहले मोबाइल फोन का इस्तेमाल कम करना, कैफीन का सेवन सीमित मात्रा में करना और तनाव कम करने के लिए ध्यान या गहरी सांस लेने जैसे अभ्यास करना भी मददगार हो सकता है।

कब डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए?
यदि नींद में बड़बड़ाने की समस्या अचानक शुरू हो, बार-बार होने लगे, नींद की गुणवत्ता प्रभावित करे या इसके साथ चिल्लाना, हिंसक गतिविधियां, चोट लगना अथवा दिन में अत्यधिक नींद आना जैसे लक्षण हों, तो डॉक्टर से संपर्क करें। जरूरत पड़ने पर साइकेट्रिस्ट या नींद संबंधी विकारों के विशेषज्ञ आगे की जांच की सलाह दे सकते हैं। नींद में बड़बड़ाना हमेशा किसी बीमारी का संकेत नहीं होता। सही दिनचर्या, पर्याप्त नींद और तनाव पर नियंत्रण से इसमें सुधार हो सकता है। हालांकि, लगातार बने रहने वाले या अन्य लक्षणों के साथ दिखाई देने वाले बदलावों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

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