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बवासीर कितनी तरह की होती है और किसमें रहता है जान का खतरा?

 Written By: Ritu Raj
 Published : Sep 17, 2026 12:54 pm IST,  Updated : Sep 17, 2026 12:54 pm IST

बवासीर एक ऐसी स्थिति है जिसमें मलाशय और गुदा के निचले हिस्से में मौजूद नसें सूज जाती हैं। लेकिन सवाल ये है क्या इससे जान भी जा सकती है। चलिए जानते हैं क्या कहते हैं डॉक्टर।

बवासीर कितनी तरह की होती है और किसमें रहता है जान का खतरा? - India TV Hindi
बवासीर कितनी तरह की होती है और किसमें रहता है जान का खतरा? Image Source : MAGNIFIC

बवासीर गुदा और मलाशय के निचले हिस्से की नसों में सूजन आने या उनके फूल जाने की स्थिति को कहते हैं। यह अब एक आम समस्या है, लेकिन इसके लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। बवासीर में काफी तेज दर्द होता है और कई बार सूजन की वजह से खून भी निकलने लगता है। समय रहते इसका इलाज कराना बेहद जरूरी है नहीं तो समस्या बढ़ सकती है। एक सवाल जो कई लोगों के मन में आता है वो है बवासीर कितनी तरह की होती है और क्या इससे मौत भी हो सकती है। डॉ. राकेश कुमार, महानिदेशक सर्जरी फोर्टिस हॉस्पिटल मानेसर बता रहे हैं बवासीर के मुख्य प्रकार और क्या इससे मौत हो सकती है। चलिए जानते हैं। 

1. आंतरिक बवासीर

यह मलाशय के अंदर होती है और शुरुआती स्टेज में आमतौर पर दर्द नहीं होता। मल त्याग के समय खून आना इसका प्रमुख लक्षण है। आंतरिक बवासीर को सामान्यतः चार ग्रेड में बांटा जाता है। ग्रेड 1 में बवासीर अंदर ही रहती है, ग्रेड 2 में मल त्याग के दौरान बाहर आकर अपने आप अंदर चली जाती है। ग्रेड 3 में इसे हाथ से अंदर करना पड़ता है, जबकि ग्रेड 4 में यह लगातार बाहर रहती है और वापस अंदर नहीं जाती।

2. बाहरी बवासीर
यह गुदा के बाहर त्वचा के नीचे होती है। इसमें सूजन, दर्द या गांठ महसूस हो सकती है। यदि इसमें खून का थक्का बन जाए तो इसे थ्रॉम्बोस्ड एक्सटर्नल हेमोरॉयड कहते हैं, जिसमें अचानक तेज दर्द और सूजन हो सकती है।

क्या बवासीर जानलेवा हो सकती है?
सामान्य बवासीर से आमतौर पर जान का खतरा नहीं होता। हालांकि, लंबे समय तक होने वाला या बार-बार होने वाला ब्लीडिंग खून की कमी का कारण बन सकता है। बहुत ज्यादा और लगातार ब्लीडिंग दुर्लभ स्थिति में गंभीर हो सकता है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि हर बार मल में खून आना बवासीर के कारण नहीं होता। गुदा में फिशर, पॉलीप, आंतों की सूजन और खासकर कोलोरेक्टल कैंसर में भी ब्लीडिंग हो सकता है। इसलिए पहली बार खून आने, लगातार ब्लीडिंग होने, वजन कम होने, मल की आदतों में बदलाव या एनीमिया जैसे लक्षण होने पर डॉक्टर से जांच कराना जरूरी है। कब्ज, जोर लगाकर मल त्याग करना, लंबे समय तक टॉयलेट पर बैठना और कम फाइबर वाला खाना बवासीर के जोखिम को बढ़ा सकते हैं। वहीं इससे बचने के लिए पर्याप्त पानी, फाइबर से भरपूर फूड्स का सेवन, नियमित एक्सरसाइज और कब्ज से राहत इसके बचाव में महत्वपूर्ण हैं।

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