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बच्चों में अस्थमा के लक्षण क्या हैं? डॉक्टर ने बताया किस तरह पहचानें

 Written By: Ritu Raj @rituraj141192
 Published : Jul 30, 2026 11:38 am IST,  Updated : Jul 30, 2026 11:38 am IST

अस्थमा आज के समय में बहुत कॉमन हेल्थ प्रॉब्लम बन चुका है। खासकर बच्चों में ये समस्या बढ़ते जा रही है। लेकिन पेरेंट्स को कई बार ये पता नहीं चल पाता कि बच्चों को अस्थमा है। डॉक्टर ने इसके कुछ प्रमुख लक्षण बताए हैं। यहां जानें।

बच्चों में अस्थमा के लक्षण क्या हैं? डॉक्टर ने बताया किस तरह पहचानें- India TV Hindi
बच्चों में अस्थमा के लक्षण क्या हैं? डॉक्टर ने बताया किस तरह पहचानें Image Source : INDIA TV

अस्थमा बच्चों में होने वाली एक सामान्य लेकिन गंभीर श्वसन संबंधी बीमारी है। इसमें बच्चे की सांस लेने वाली नलियों में सूजन आ जाती है, जिससे सांस लेने में दिक्कत होती है। यदि समय रहते इसके लक्षणों की पहचान कर ली जाए और सही इलाज शुरू किया जाए, तो बच्चों को इस बीमारी से बचाया जा सकता है। इसलिए हर पेरेंट्स को अस्थमा के शुरुआती संकेतों के बारे में पता होना जरूरी है। ऐसे में फोर्टिस के डॉक्टर ने बताया है कि बच्चों में अस्थमा के शुरुआती लक्षण क्या हैं। 

बच्चों में अस्थमा के प्रमुख लक्षण

डॉ. प्रशांत सक्सेना पल्मोनोलॉजी, पल्मोनोलॉजी क्रिटिकल केयर और स्लीप मेडिसिन ने बताया है कि बच्चों में अस्थमा के प्रमुख लक्षण क्या क्या होते हैं। यहां जान लें। 

1. बार-बार खांसी आना

अगर बच्चे को खासतौर पर रात में, सुबह जल्दी या खेलने-कूदने के बाद बार-बार खांसी आती है, तो यह अस्थमा का संकेत हो सकता है। कई बार सूखी खांसी ही इसका पहला लक्षण होती है।

2. सांस लेते समय सीटी जैसी आवाज 
सांस छोड़ते समय सीटी जैसी आवाज आना अस्थमा का सबसे आम लक्षण माना जाता है। यह आवाज इसलिए आती है क्योंकि एयरवेज संकरी हो जाती हैं।

3. सांस फूलना
यदि बच्चा सामान्य गतिविधियों, दौड़ने या सीढ़ियां चढ़ने पर जल्दी थक जाए या उसकी सांस फूलने लगे, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

4. सीने में जकड़न
बड़े बच्चे अक्सर सीने में भारीपन या जकड़न की शिकायत कर सकते हैं, जबकि छोटे बच्चे बेचैनी या बार-बार रोने के जरिए अपनी परेशानी जाहिर कर सकते हैं।

किन बच्चों में ज्यादा होता है खतरा?

अगर परिवार में किसी को अस्थमा, एलर्जी या एक्जिमा की समस्या रही हो, तो बच्चे में अस्थमा होने की संभावना बढ़ जाती है। इसके अलावा धूल, धुआं, पालतू जानवरों के बाल, परागकण, वायरल संक्रमण और प्रदूषण भी अस्थमा के लक्षणों को बढ़ा सकते हैं।

पेरेंट्स कब डॉक्टर से संपर्क करें?
अगर बच्चे को बार-बार खांसी, सांस लेने में तकलीफ, सीटी जैसी आवाज या रात में सांस की समस्या हो रही है, तो तुरंत बाल रोग विशेषज्ञ या पीडियाट्रिक पल्मोनोलॉजिस्ट से जांच कराएं। यदि बच्चा तेजी से सांस ले रहा हो, बोलने में कठिनाई हो रही हो या होंठ और नाखून नीले पड़ने लगें, तो यह मेडिकल इमरजेंसी हो सकती है और तुरंत अस्पताल जाना चाहिए।

अस्थमा को कैसे नियंत्रित रखें?
डॉक्टर द्वारा बताई गई दवाएं और इनहेलर नियमित रूप से इस्तेमाल करें। बच्चे को धूल, धुएं और अन्य एलर्जी पैदा करने वाले चीजों से बचाएं। नियमित फॉलो-अप कराएं और बच्चे के स्कूल या देखभाल करने वालों को भी उसकी बीमारी और इमरजेंसी प्लान की जानकारी दें। बच्चों में अस्थमा के लक्षण शुरुआती दौर में सामान्य खांसी या सांस की समस्या जैसे लग सकते हैं, लेकिन इन्हें नजरअंदाज करना ठीक नहीं है। समय पर पहचान, सही इलाज और ट्रिगर्स से बचाव के जरिए अस्थमा को प्रभावी ढंग से नियंत्रित किया जा सकता है, जिससे बच्चा स्वस्थ रहेगा।

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