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लिम्फैटिक वॉकिंग क्या है? क्या यह सच में सूजन और ब्लोटिंग को कम कर सकती है?

 Written By: Ritu Raj
 Published : Sep 26, 2026 09:00 am IST,  Updated : Sep 26, 2026 09:00 am IST

लिम्फैटिक वॉकिंग एक ऐसा फिटनेस ट्रेंड है जिसमें सामान्य वॉक की तुलना में बॉडी पॉश्चर, गहरी सांस, और हाथों के स्विंग पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। लेकिन क्या इससे सच में सूजन और ब्लोटिंग की समस्या दूर होती है। चलिए जानते हैं।

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लिम्फैटिक वॉकिंग क्या है? क्या यह सच में सूजन और ब्लोटिंग को कम कर सकती है? Image Source : MAGNIFIC

लिम्फैटिक वॉकिंग इन दिनों लोगों के बीच काफी लोकप्रिय हुआ है। इन दिनों सोशल मीडिया पर ये काफी वायरल है। यह कोई मुश्किल एक्सरसाइज नहीं, बल्कि सही मुद्रा, गहरी सांस और हाथों के मूवमेंट के साथ की जाने वाली एक वॉक है। हालांकि, नियमित रूप से चलना पाचन स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद हो सकता है, लेकिन यह समझना जरूरी है कि यह किन समस्याओं में मदद कर सकता है। ऐसे में डॉ. महादेवन बी, सीनियर कंसल्टेंट, गैस्ट्रोएंटरोलॉजी, ग्लेनीगल्स हेल्थसिटी से जानेंगे कि क्या ये सच में सूजन और ब्लोटिंग की समस्याओं को दूर करता है। 

क्या कहते हैं डॉक्टर

लिम्फैटिक सिस्टम ब्लड वेसल्स और लिम्फ नोड्स का एक नेटवर्क है, जो शरीर में तरल पदार्थों का संतुलन बनाए रखने और इम्यून सिस्टम को सपोर्ट करने में मदद करता है। हार्ट की तरह इसमें कोई सेंट्रल पंप नहीं होता। मांसपेशियों के एक्शन और सांस लेने की प्रक्रिया लिम्फ फ्लूइड के फ्लो में मदद करती है। हल्का चलना पैरों की मांसपेशियों को सक्रिय करता है और शरीर में तरल पदार्थों के सामान्य फ्लो को सपोर्ट कर सकता है। हालांकि, लिम्फैटिक वॉकिंग को हर तरह की सूजन का इलाज नहीं माना जा सकता। पैरों या पेट में लगातार रहने वाली सूजन नसों या लिम्फैटिक सिस्टम से जुड़ी समस्याओं, किडनी या लिवर की बीमारियां कुछ दवाओं के कारण हो सकती है। ऐसे लक्षणों में केवल वॉकिंग पर निर्भर रहने के बजाय डॉक्टर से जांच कराना जरूरी है।

गैस्ट्रोएंटरोलॉजी के नजरिए से देखें तो ब्लोटिंग एक अलग समस्या है। यह आमतौर पर गैस बनने, कब्ज, कुछ खाद्य पदार्थों को नहीं पचा पाने, आंतों की गति में बदलाव या इरिटेबल बॉवेल सिंड्रोम जैसी स्थितियों से जुड़ी हो सकती है। खाना खाने के बाद टहलने से आंतों की गतिविधि बेहतर हो सकती है और गैस को पाचन तंत्र से बाहर निकलने में मदद मिल सकती है, जिससे पेट में भारीपन और असहजता कम हो सकती है। खाना खाने के बाद 10–15 मिनट की हल्की वॉक भी कुछ लोगों के लिए फायदेमंद हो सकती है।

फिलहाल इस बात के क्लिनिकल प्रमाण नहीं मिले हैं कि ‘लिम्फैटिक वॉकिंग’ से ब्लोटिंग की समस्या दूर होती है। ब्लोटिंग में होने वाला कोई भी सुधार शारीरिक गतिविधि और पाचन पर उसके प्रभाव से अधिक संबंधित हो सकता है। यह सीधे तौर पर शरीर से ‘टॉक्सिन’ बाहर नहीं निकालती और न ही पेट की चर्बी कम करती है। लोग अपनी रोजमर्रा की दिनचर्या में हल्की वॉक को शामिल कर सकते हैं, पर्याप्त मात्रा में पानी पी सकते हैं और नियमित मल त्याग की आदतें बनाए रख सकते हैं। हालांकि, अगर पेट का लगातार फूलना, बिना किसी स्पष्ट कारण के वजन कम होना, तेज दर्द, उल्टी या मल में खून आने जैसे लक्षण दिखें, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।

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