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कम उम्र में क्यों बढ़ रहे हैं स्ट्रोक के मामले? न्यूरोलॉजिस्ट ने बताई वजह

 Written By: Poonam Yadav
 Published : Aug 10, 2026 01:06 pm IST,  Updated : Aug 10, 2026 01:06 pm IST

डॉक्टर कहते हैं कि अब समय आ गया है कि हम स्ट्रोक को केवल बुज़ुर्गों की बीमारी मानना छोड़ दें। उम्र कम होना सुरक्षा की गारंटी नहीं है। जागरूकता, समय पर पहचान और स्वस्थ जीवनशैली ही वह तीन चीज़ें हैं जो सबसे अधिक फर्क ला सकती हैं।

कम उम्र में स्ट्रोक के मामले बढ़ने की वजह,- India TV Hindi
कम उम्र में स्ट्रोक के मामले बढ़ने की वजह Image Source : UNSPLASH/MAGNIFIC

कुछ साल पहले अगर किसी 35 या 40 साल के व्यक्ति को स्ट्रोक हो जाता, तो पूरा परिवार हैरान रह जाता था। लेकिन ऐसे मामले अब पहले की तुलना में ज़्यादा देखने को मिल रहे हैं। नोएडा स्थित यथार्थ अस्पताल में अध्यक्ष एवं ग्रुप डायरेक्टर – न्यूरोलॉजी,  डॉ. कुणाल बहरानी, कहते हैं, '' मैं अक्सर ऐसे मरीजों से मिलता हूँ जो उम्र के उस पड़ाव पर होते हैं, जहाँ ज़िंदगी सबसे व्यस्त होती है करियर और भविष्य की योजनाएँ बन रही होती हैं। ऐसे में अचानक शरीर का एक हिस्सा काम करना बंद कर दे, बोलने में दिक्कत आने लगे या चेहरा टेढ़ा हो जाए, तो किसी को भी विश्वास नहीं होता कि यह स्ट्रोक हो सकता है।'' वो बता रहे हैं कि कम उम्र में स्ट्रोक जैसी गंभीर समस्या क्यों बढ़ गयी है और आपको कब सावधान हो जाना चाहिए? 

कम उम्र में क्या हैं स्ट्रोक के कारण?

डॉक्टर कहते हैं की मरीज या उनका परिवार सबसे पहला सवाल यही पूछते हैं कि क्या इतनी कम उम्र में भी स्ट्रोक हो सकता है? तो मेरा जवाब है, हाँ। लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि स्ट्रोक अचानक युवाओं की बीमारी बन गया है। असल बदलाव हमारी जीवनशैली में आया है। आज 30 और 40 की उम्र में हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज़, मोटापा और बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल पहले की तुलना में कहीं अधिक आम हो चुके हैं। चिंता की बात यह है कि इनमें से कई लोगों को पता भी नहीं होता कि उन्हें ये समस्याएँ हैं। वे खुद को पूरी तरह स्वस्थ मानते हैं क्योंकि उन्हें कोई तकलीफ़ महसूस नहीं होती और यहीं से जोखिम शुरू होता है

खराब जीवनशैली है बहुत बड़ी वजह

शरीर हमेशा शोर मचाकर बीमारी की शुरुआत नहीं करता। कई बार वह लंबे समय तक चुपचाप नुकसान झेलता रहता है। हमारी रोज़मर्रा की आदतें भी इसमें बड़ी भूमिका निभाती हैं। देर रात तक जागना, घंटों लैपटॉप के सामने बैठे रहना, तनाव, बाहर का खाना, व्यायाम के लिए समय न निकाल पाना और धूम्रपान जैसी आदतें धीरे-धीरे रक्त वाहिकाओं को प्रभावित करती हैं। यह नुकसान एक दिन में नहीं होता, बल्कि वर्षों में जमा होता है।

ये अन्य कारक भी हो सकते हैं वजह 

कम उम्र के मरीजों में कुछ कारण अलग भी हो सकते हैं। कुछ लोगों में जन्मजात हृदय संबंधी समस्याएँ, खून का जल्दी जमने की प्रवृत्ति, कुछ ऑटोइम्यून बीमारियाँ या गर्दन की रक्त वाहिकाओं में चोट भी स्ट्रोक का कारण बन सकती है। इसलिए हर युवा मरीज का मूल्यांकन अलग तरीके से करना पड़ता है। केवल उम्र देखकर कारण तय नहीं किया जा सकता।

समय पर अस्पताल आना है ज़रूरी

डॉक्टर कहते हैं, ''कई बार लोग है कि शायद कमजोरी होगी, सर्वाइकल की समस्या होगी या थोड़ी देर आराम करने से ठीक हो जाएगा। कुछ लोग पहले दर्द की दवा लेते हैं, तो कुछ घरेलू उपाय आज़माते हैं। इस बीच जो समय निकल जाता है, वही सबसे कीमती होता है। अगर मरीज समय पर अस्पताल पहुँच जाए, तो कई मामलों में मस्तिष्क को होने वाले नुकसान को काफी हद तक कम कर सकते हैं।

कब हो जाएं सावधान?

हर सिरदर्द स्ट्रोक नहीं होता और न ही हर चक्कर आना स्ट्रोक का संकेत है। लेकिन अगर अचानक चेहरे का एक हिस्सा टेढ़ा हो जाए, एक हाथ या पैर में कमजोरी आ जाए, बोलने में कठिनाई हो, शब्द स्पष्ट न निकलें या देखने में अचानक बदलाव महसूस हो, तो इंतज़ार नहीं करना चाहिए। ऐसे मामलों में हर मिनट महत्वपूर्ण होता है।

Disclaimer: (इस आर्टिकल में सुझाए गए टिप्स केवल आम जानकारी के लिए हैं। सेहत से जुड़े किसी भी तरह का फिटनेस प्रोग्राम शुरू करने अथवा अपनी डाइट में किसी भी तरह का बदलाव करने या किसी भी बीमारी से संबंधित कोई भी उपाय करने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें। इंडिया टीवी किसी भी प्रकार के दावे की प्रामाणिकता की पुष्टि नहीं करता है)

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