बार-बार चीजें भूलना, काम पर ध्यान न लगना, बात करते-करते कुछ और सोचने लगना। हर बार इसकी वजह सिर्फ थकान नहीं होती। अगर यह लंबे समय तक बना रहे, तो इसके पीछे स्वास्थ से जुड़ी समस्या भी हो सकता है। आजकल बहुत से यंगस्टर्स कहते हैं कि दिमाग सही नहीं चल रहा, फोकस नहीं हो रहा, बातें याद नहीं रहतीं। इसे आम भाषा में ब्रेन फॉग कहते हैं। यह अपने आप में कोई बीमारी या डायग्नोसिस नहीं है। यह कुछ लक्षणों का नाम है। असली सवाल यह है कि इसके पीछे क्या वजह है। डॉ. अजय फड़के, एगिलस डायग्नोस्टिक्स बता रहे हैं डॉक्टर से कब कंसल्ट करना चाहिए।
क्यों होती है ब्रेन फॉग की समस्या
नींद पूरी न होना, काम का ज्यादा तनाव, देर रात तक स्क्रीन, समय पर खाना न खाना, शराब या बहुत ज्यादा चाय-कॉफी। इन सबका असर सीधे मेमोरी और याददाश्त पर पड़ता है। ऐसे में पहले आदतें ठीक करें। रोज एक ही समय पर सोएं और कम से कम 7 घंटे की नींद लें। समय पर खाएं, पानी पूरा पिएं, थोड़ी कसरत करें और काम के बीच छोटे ब्रेक लें। दो से चार हफ्ते ये बदलाव करके देखें। इसके बाद भी फर्क न पड़े, तो इसे नजरअंदाज न करें।
कब कराएं जांच?
लगातार ब्रेन फॉग के पीछे कुछ आम वजहें होती हैं, जो साधारण ब्लड टेस्ट से पकड़ में आ जाती हैं। जैसे आयरन की कमी या एनीमिया, विटामिन B12 की कमी, थायरॉइड की गड़बड़ी और ब्लड शुगर का ऊपर-नीचे होना। वहीं B12 पर खास ध्यान दें। शाकाहारी लोगों में इसकी कमी काफी आम है, क्योंकि B12 मुख्य रूप से नॉन-वेज, अंडे और दूध से बनी चीजों में मिलता है। लंबे समय तक एसिडिटी की दवा या डायबिटीज की दवा मेटफॉर्मिन लेने वालों में भी B12 कम हो सकता है। महिलाओं में पीरियड्स की वजह से आयरन की कमी आम है।
कुछ और वजहें भी हो सकती हैं। स्लीप एप्निया जैसी नींद की समस्या, जिसमें व्यक्ति पूरी रात सोकर भी थका हुआ उठता है। डिप्रेशन और एंग्जायटी, जो ध्यान और याददाश्त पर सीधा असर डालते हैं। कोविड जैसे किसी वायरल इंफेक्शन के बाद भी कुछ लोगों में हफ्तों तक ब्रेन फॉग रहता है। कुछ दवाएं भी इसकी वजह बन सकती हैं। डॉक्टर आपके लक्षण और मेडिकल हिस्ट्री देखकर जांच तय करते हैं। आम तौर पर शुरुआत CBC, फेरिटिन, विटामिन B12, थायरॉइड और ब्लड शुगर से होती है। हर किसी को सारे टेस्ट कराने की जरूरत नहीं है। अगर B12 बॉर्डरलाइन आए और लक्षण बने रहें, तो डॉक्टर होमोसिस्टीन जैसे टेस्ट से इसकी पुष्टि कर सकते हैं।
कब डॉक्टर से मिलें?
अगर ब्रेन फॉग की वजह से पढ़ाई, ऑफिस का काम या रोज के काम प्रभावित होने लगें, तो डॉक्टर से मिलें। साथ में लगातार थकान, बिना वजह वजन बढ़ना या घटना, चक्कर, कमजोरी, हाथ-पैर में झुनझुनी, जल्दी सांस फूलना या लगातार उदासी हो, तब भी देर न करें। कुछ हालात में बिल्कुल इंतजार न करें। अचानक बहुत ज्यादा कन्फ्यूजन, बोलने में दिक्कत, चेहरे या शरीर के एक तरफ कमजोरी, बहुत तेज सिरदर्द, दौरा या बेहोशी हो, तो तुरंत इमरजेंसी में जाएं। यह ब्रेन फॉग नहीं, किसी गंभीर समस्या का संकेत हो सकता है। इसलिए हर बार ब्रेन फॉग को सिर्फ तनाव या बिजी लाइफस्टाइल कहकर न टालें। कई बार वजह एक साधारण ब्लड टेस्ट से पकड़ में आ जाती है, और उसका इलाज भी आसान होता है।