पटना। बिहार में रविवार को तीसरे दिन भी भारी बारिश जारी रही, जिससे आम जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया। उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी और दो पूर्व मुख्यमंत्रियों सतेंद्र नारायण सिंह एवं जीतन राम मांझी के घरों में भी पानी घुस गया है। अधिकारियों ने कहा कि बाढ़ व बारिश की वजह से 24 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है।
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बाढ़ और बारिश की वजह से उत्तर बिहार के कई जिलों में राष्ट्रीय राजमार्गो के क्षतिग्रस्त होने की रिपोर्ट है। राज्य में कई जगह बाढ़ का पानी घरों, दुकानों और अस्पतालों में घुस गया है। बारिश की वजह से ट्रेनों की आवाजाही, सड़क परिवहन और विमान के संचालन पर असर पड़ा है। लंबी दूरी की 12 ट्रेनों और कई यात्री ट्रेनों को रद्द कर दिया गया है।


मौसम विभाग ने अगले 24 घंटों में बारिश की संभावना व्यक्त की और राज्य सरकार ने इसको लेकर 'रेड अलर्ट' जारी किया है। आपदा प्रबंधन विभाग ने यहां कहा, "भारी से अत्यधिक भारी बारिश ने पूरे राज्य में अब तक 24 लोगों की जान ले ली है।"

गंगा, कोसी, गंडक, बागमती, महानंदा जैसी बड़ी नदियों में जलस्तर बढ़ रहा है, जिससे कई जगहों पर बांध टूटने का खतरा पैदा हो गया है। जल संसाधन विभाग ने संबंधित अधिकारियों को अलर्ट कर दिया है और जिला अधिकारियों से किसी भी स्थिति से निपटने के लिए तैयार रहने के लिए कहा गया है। केंद्र ने पहले से ही खतरनाक जगहों पर बचाव व राहत अभियानों के लिए राष्ट्रीय आपदा अनुक्रिया बल और राज्य आपदा अनुक्रिया बल को तैनात कर दिया है।

मौसम विभाग के अधिकारियों के अनुसार, राजधानी पटना में शनिवार से 151 मिलीमीटर की बारिश हुई है, जोकि हाल के वर्षो में एक रिकार्ड है। पटना में बाढ़ जैसी स्थिति पैदा हो गई है और यहां हर जगह पानी दिखाई दे रहा है। लोगों को अपने घरों में रहने को मजबूर होना पड़ रहा है, क्योंकि अधिकतर संकरी गलियां पानी से भरी हुई हैं।

लोगों की मदद के लिए कई जगहों पर नौकाओं की तैनाती की गई है। राजेंद्र नगर कॉलोनी में रहने वाले कॉलेज के छात्र संकेत झा ने कहा, "मैंने पहली बार पानी से भरे पटना में नावों को चलते देखा है।" एक सेवानिवृत्त स्कूल शिक्षक ने आईएएनएस से कहा, "ड्रेनेज के जाम होने से पूरा पटना जलमग्न हो गया है। इससे यहां के आवासीय स्थानों पर अफरा-तफरी मच गई है और बारिश ने पटना नगर निगम की कलई खोल दी है।"