नई दिल्ली: पांच राज्य के विधानसभा चुनाव के नतीजे घोषित होने के बाद लिटमस टेस्ट माने जाने वाले उत्तरप्रदेश के 2017 के विधानसभा चुनाव के लिए तैयारियां शुरू हो गई है। भाजपा 26 मई को प्रधानमंत्री की सहारनपुर रैली से इसकी शुरूआत कर सकती है तो कांग्रेस चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर को जोड़ते हुए अपनी चुनावी मुहिम को आगे बढ़ा रही है। वहीं सपा मुलायम सिंह यादव के मार्गदर्शन एवं राज्य के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के नेतृत्व में फिर सत्ता हासिल करने के लक्ष्य के साथ आगे बढ़ रही है।
बसपा की चुनावी रणनीति पूरी तरह से मायावती के ईद गिर्द है और आसन्न विधानसभा चुनाव में वह फूंक फूंक कर कदम उठा रही ताकि 2014 के लोकसभा चुनाव जैसी स्थिति का सामना नहीं करना पड़े जब पार्टी को एक भी सीट पर जीत हासिल नहीं हुई थी। चुनाव तैयारियों के तहत मायावती स्वयं जिला एवं मंडल स्तर पर तैयारियों की समीक्षा कर रही है।
उन्होंने हाल ही में वर्तमान विधायकों को फिर से टिकट देने का आश्वासन दिया और दलितों से एकजुट होने का आह्वान करते हुए आरोप लगाया कि सपा और भाजपा दोनों की नीयत में खोट है और वे दलितों का भला नहीं कर सकते। उत्तरप्रदेश में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव को देखते हुए भाजपा ने जून के दूसरे सप्ताह में इलाहाबाद में पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारणी की बैठक आयोजित करने का कार्यक्रम तय किया है।
इलाहाबाद कभी कांग्रेस का गढ़ माना जाता था और अभी यह धार्मिक, सांस्कृतिक केंद्र के रूप में जाना जाता है। 26 मई को ही भाजपा की केंद्र सरकार के 2 साल पूरे हो रहे हैं। इसी कारण प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने उत्तरप्रदेश को रैली के लिए चुना है और राजनीतिक गलियारों में ये कयास लगाया जा रहे हैं कि उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए पार्टी शंखनाद करेगी। राज्यसभा में बहुमत के लिए उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों में भाजपा अपनी जीत सुनिश्चित करने में कोई कसर नहीं छोड़ना चाहती।