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काले धन का पता लगाने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है सरकार: जेटली

 Written By: India TV News Desk
 Published : May 16, 2016 11:44 pm IST,  Updated : May 16, 2016 11:56 pm IST

केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने आज कहा कि सरकार विदेशी खातों में जमा काले धन का पता लगाने के हरसंभव प्रयास कर रही है।

Arun Jaitley
- India TV Hindi
Arun Jaitley Image Source : PTI

नई दिल्ली: केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने आज कहा कि सरकार विदेशी खातों में जमा काले धन का पता लगाने के हरसंभव प्रयास कर रही है। मोदी सरकार के दो साल पूरे होने के उपलक्ष्य में चर्चित मीडिया चैनल इंडिया टीवी द्वारा आयोजित मेगा कान्क्लेव शो संवाद में बोलते हुए जेटली ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि जिन लोगों ने ब्लैक मनी के खुलासे को लेकर उचित रास्ते को अख्तियार नहीं किया है उनकी रातों की नींद हराम हो सकती है।

जेटली ने कहा, “हमने एंटी ब्लैक मनी कानून तैयार किया है और लोगों से कहा है कि वो अपनी ब्लैक मनी के बारे में खुलासा करें और वो 30 फीसदी पेनाल्टी के साथ 60 फीसदी टैक्स का भुगतान करें। एचएसबीसी अकाउंट के ऊपर यूपीए की सरकार ने कुछ भी नहीं किया, हमने खातों की जांच की और ऐसे हर व्यक्ति पर आपराधिक मुकदमें दायर किए हैं। हमने जांच की है और लिचेस्टीन खाता धारकों के खिलाफ मुकदमें दायर किए हैं।”

जेटली ने कहा, “पनामा में दो तरह के लोग हैं। कुछ लोगों ने ने देश के बाहर पैसा जमा किया है आरबीआई की सहमति से  से ऐसा किया है जबकि कुछ ने इसके बिना अपना पैसा जमा किया है। सभी अवैध खाता धारकों को नोटिस भेज दिया गया है और जांच जारी है। इस साल हमने करीब 71 हजार करोड़ की कर चोरी पकड़ी है। हमने अपने बजट में यह घोषणा की थी कि इस साल 1 जून से जिस किसी के पास भी डोमेस्टिक अन एसेस्ड इनकम होगी उसे पेनाल्टी के साथ कर का भुगतना करना होगा और इसका खुलासा करना होगा। आज तक किसी भी सरकार ने ऐसा कदम नहीं उठाया। आप कह सकते हैं कि काले धन का पता लगाने के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं।”

केंद्रीय वित्त मंत्री ने कांग्रेस को चुनौती देते हुए कहा कि वो बताएं कि उन्होंने काले धन के मुद्दे को सुलझाने के लिए कौन से सार्थक कदम उठाए थे। उन्होंने कहा, “मैं अपने कांग्रेस और यूपीए के दोस्तों को चुनौती देता हूं कि वो मुझे बताएं उन्होंने काले धन वो वापस लाने के मुद्दे पर हमारे दो साल के मुकाबले कितने प्रयास किए। हम कुछ कदमों के जरिए काले धन को वापस ला रहे हैं, जिन्होंने भी अनुपालन खिड़की के माध्यम से खुलासा नहीं किया है, उन्हें रातों को नींद न आने की समस्या से जूझना होगा। हम जिस दिशा में आगे बढ़ रहे हैं वो देश और अर्थव्यवस्था के लिए बेहतर है।”

अगस्ता वेस्टलैंड के मसले पर उन्होंने कहा, “इस डील में जो घूस ली गई वो स्पष्ट है। ये दुनिया का पहला ऐसा मामला है जिसमें घूस लेने वाला पर्दे के पीछे था और बिचौलिये की पहचान हुई है, लेकिन जिसने भी घूस ली उसका पता लगाया जाना अभी बाकी है।”

जेटली ने यह भी कहा कि उनकी सरकार राज्यसभा में जीएसटी बिल पास करवाने के लिए (जहां हम कम संख्या में हैं) भ्रष्टाचार के मसले पर कांग्रेस के साथ समझौता नहीं करेगी। उन्होंने कहा, “हम भ्रष्टाचार का डटकर मुकाबला करेंगे और हम संसद में अगले सत्र में बिल को भी पास करवाएं। जीएसटी को छोड़कर हम राज्यसभा में महत्वपूर्ण बिलों को पास करवा चुके हैं जबकि तथ्य यह है कि राज्यसभा में हमारे पास बहुमत नहीं है। हमने बीते दो सालों और हालिया सत्र  में मिलाकर करीब 90 कानून पास करवाए हैं, साथ ही हमने 24 बिल भी पास करवाए हैं।”  

जेटली ने कहा कि जब भाजपा नीत एनडीए सरकार दो साल पहले सत्ता में आई थी, तो सबसे बड़ी चुनौती सरकार की साख को लेकर थी। उन्होंने कहा, “मुझे याद है कि कुछ साल पहले एक जानी मानी पत्रिका द इकोनॉमिस्ट की कवर स्टोरी में लिखा था कि आई (जो की भारत की बात करता है) यानी भारत ब्रिक्स के समूह से बाहर जा सकता है। ये दो साल चुनौती भरे रहे। एक वक्त था जब प्रधानमंत्री ने फैसले नहीं लिए। नीतिगत अपंगता के हालात थे। सरकार के सामने मुश्किल चुनौती साख को लेकर थी। मोदी जी की नेतृत्व क्षमताओं और उनके प्रशासन के तरीकों की बदौलत ही बीते दो सालों में सरकार वापस ट्रैक पर आई है।”

जेटली ने कहा, “पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्ता मुश्किल दौर से गुजर रही है। वैश्विक ग्रोथ की भविष्यवाणी काफी कम है, मांग काफी नीचे जा चुकी है। और अगर आप कुछ महत्वपूर्ण देशों की अर्थव्यवस्थाओं को देखें तो औसतन ग्रोथ माइनस टू से प्लस टू के बीच है।”

उन्होंने कहा, “मानसून ने बीते दो सालों से निराश किया है ये हमारे सामने एक बड़ी चुनौती है। तीसरी चुनौती राज्यसभा में है जहां हम अल्पमत में हैं। जो लोग पॉलिसी पैरालिसिस का इस्तेमाल भारत को दर्शाने के लिए करते थे आज कह रहे हैं कि भारत एक बेहतर स्थान और दुनिया की तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था है। मेरा मानना है कि अगर हम आज की ग्रोथ रेट को लेकर चलें तो अगले 10 से 20 सालों में हम सफलतापूर्वक गरीबी को मिटा देंगे, जो कि देश पर अभिशाप है।”

जब जेटली जी से पूछा गया कि अच्छे दिन कब आएंगे तो उसका जवाब देते हुए उन्होंने कहा, “चीन ने बीते 30 साल से 9 फीसदी की ग्रोथ रेट को बरकरार रखा है, लेकिन वो फिर भी उभरती हुई अर्थव्यवस्था है, न कि विकसित अर्थव्यवस्था। बीते दो सालों में हमने यही करने की कोशिश की है। हमने अर्थव्यवस्था को सही दिशा दी है। अगर यूपीए के कार्यकाल से तुलना करें तो अच्छे दिन जरूर आ गए हैं। लेकिन मेरी संतुष्टि के लिए, जिसे मै कह सकता हूं वो है कि हमने जो दिशा अख्तियार की है, देश सिर्फ विकास के पथ पर ही आगे बढ़ेगा।”

अरुण जेटली से जब पूछा गया कि सरकार ने साल 2022 तक 100 मिलियन नई नौकरियों का वादा किया है इसका जवाब देते हुए वित्त मंत्री ने कहा, “कोई भी सरकार एक ऐसे  देश में हर किसी को नौकरी उपलब्ध नहीं करवा सकती है, जहां की आबादी 125 करोड़ है। यह संभव नहीं है। जो लोग यह कह रहे हैं कि वो इतनी बड़ी संख्या को नौकरी दे सकते हैं उनकी अर्थव्यवस्था की समझ थोड़ी कम है। स्ट्रक्चर्ड इंडस्ट्री ने दो करोड़ नौकरियों का सृजन किया है और असंगठित क्षेत्र से भी 11 करोड़ नौकरियों का सृजन हुआ है। केवल असंगठित क्षेत्र को ही बेंचमार्क नहीं बनाया जा सकता है। मैं आपको एक उदाहरण दूं हमने मुद्रा की शुरुआत की है। अगर आप रोजगार सृजन करना चाहते हैं तो आपके असंगठित क्षेत्र को बढ़ावा देना होगा। आपको ऐसी अर्थव्यवस्था को बनाना होगा जो रोजगार का सृजन करे।”

आरबीआई गवर्नर की अंधों में काना राजा वाली टिप्पणी पर बोलते हुए उन्होंने कहा, “मैं किसी की शब्दावली को नियंत्रित नहीं कर सकता हूं, आईएमएफ कह रहा है कि भारत तेजी से बढ़ती हुई अर्थव्यवस्था है, वर्ल्ड बैंक कह रहा है कि भारत एक बेहतर स्थान है। अगर आप इस स्वीट स्पॉट परिस्थिति का विश्लेषण करें, जब वैश्विक अर्थव्यवस्था तेजी से बदल रही है आप 8 से 9 फीसदी की ग्रोथ रेट को हासिल नहीं कर सकते हैं। लेकिन आप 10 फीसदी के ग्रोथ मार्क को जरूर हासिल कर सकते हैं। याद रखें कि मोदी सरकार के दो साल के कार्यकाल के दौरान भारत ने दुनिया में तेजी से उभरती अर्थव्यवस्था का मुकाम हासिल किया है। यूपीए सरकार के कार्यकाल में ऐसा कभी नहीं हुआ। जब आर्थिक गतिविधियां होंगी तो रोजगार सृजन होगा, लेकिन पॉलिसी पैरालिसिस की स्थित में रोजगार सृजन नहीं होगा।”

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