कोलकाता: नेताजी सुभाष चंद्र बोस 1941 में अपने पैतृक घर में तत्कालीन ब्रिटिश सरकार की नजरबंदी से जिस कार में सुरक्षित निकल गए थे उनका परिवार उस कार की मरम्मत करा रहा है।
नेताजी शोध ब्यूरो (एनआरबी) के अधिकारियों ने कहा कि जर्मन ऑटोमोबाइल कंपनी ऑडी को चार दरवाजे वाले जर्मन वांडरर कार की मरम्मत का जिम्मा दिया गया है जो यहां उनके पैतृक आवास पर रखी हुई है।
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ब्यूरो के सचिव कार्तिक चक्रवर्ती ने कहा, उन्होंने अब पेंटिंग, पुराने पार्ट्स को बदलने आदि का काम शुरू कर दिया है। हम कार की उम्र बढ़ाना चाहते हैं जिसका राष्ट्रीय महत्व है। हम इसे सौ या दो सौ मीटर तक चलाना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि उम्मीद है कि दिसम्बर तक मरम्मत का काम पूरा हो जाएगा।
बीएलए 7169 नम्बर की इस कार में नेताजी को कोलकाता से झारखंड के गोमो तक उनके भतीजे शिशिर कुमार बोस जनवरी 1941 में ले गए थे। शिशिर बोस ने 1971 में फिल्म डिविजन के एक डॉक्यूमेंट्री की शूटिंग के दौरान अंतिम बार इस कार को चलाया था। शिशिर बोस नेताजी के बड़े भाई शरत चंद्र बोस के पुत्र हैं।